Tally क्या हैं? Tally के बारें में विस्तार से जानिए?

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Tally

दोस्तों क्या आप जानते हैं की टैली क्या है (What is Tally)? अगर आप किसी कंप्यूटर इंस्टिट्यूट में गए होंगे तो टैली कंप्यूटर कोर्स का नाम जरूर सुना होगा। 
इसके बारे में अक्सर लोग ये सवाल पूछते हैं की Tally करने के फायदे क्या हैं? अगर आपको इन सवालों के जवाब नहीं मालूम तो कोई बात नहीं। क्यों की आज की पोस्ट मैंने Tally की जानकारी हिंदी में देने के लिए ही लिखा है।
इसके साथ ही मैं आपको Tally का इतिहास भी बताऊंगा। आखिर टैली एकाउंटिंग का इस्तेमाल होना कब शुरू हुआ और इससे हम क्या क्या काम कर सकते हैं। ये सारी बातें हम आज यहाँ पुरे विस्तार से जानेंगे।
दोस्तों जैसा की हम जानते हैं की आज का ज़माना कंप्यूटर का है और हर काम के लिए इंसान कंप्यूटर की मदद लेते हैं। 
चाहे अंतरिक्ष जाना हो या एक बैंक, सरकारी कार्यालय हो या फिर एक फोटो प्रिंट कर के निकालना हर जगह कंप्यूटर का इस्तेमाल होता है।
इसी कड़ी में बहुत सारी कंपनियों में अकाउंट से जुड़े कामों के लिए अलग अलग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं। एकाउंटिंग के लिए Tally प्रयोग होने वाला काफी पॉपुलर एप्लीकेशन है। 
Tally किसे कहते हैं और इसे कैसे चलाते हैं आज हम इस पोस्ट के माध्यम से जानेंगे? तो चलिए अब जानते हैं की आखिर Tally क्या होती है।
सरल शब्दों में Tally को समझा जाए तो Tally का मुख्य कार्य किसी कंपनी के खाते को व्यवस्थित करना होता है।जिसमें आय-व्यय, नगद-उधार , भुगतान की गई राशि तथा बैंक के विभिन्न खातों का रिकॉर्ड उपलब्ध होता है।


हिस्ट्री ऑफ़ Tally

श्याम सुंदर गोयनका
Tally सॉफ्टवेयर को वर्ष 1981 में श्याम सुंदर गोयनका तथा उनके पुत्र भारत गोयनका द्वारा तैयार किया गया था।
इस अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर के तैयार करने के पीछे एक मुख्य उद्देश्य यह था कि उस समय श्याम सुंदर गोयनका एक कंपनी के मालिक थे। 
यह कंपनी प्लांट तथा टैक्सटाइल मिलों के कच्चे माल तथा मशीनों के पुर्जो की आपूर्ति करती थी. उस दौरान श्याम सुंदर जी एक ऐसा सॉफ्टवेयर की तलाश में थे जो उनकी कंपनी में एकाउंटिंग के कार्यो को पूरा कर सके।
उसके बाद उन्होंने अपने पुत्र भारत गोयनका के साथ सॉफ्टवेयर के विचार को साझा किया। भारत गोयनका जिन्होंने गणित में स्नातक (Math Graduate) शिक्षा प्राप्त की थी। उनके पिता ने उन्हें ऐसा सॉफ्टवेयर बनाने के लिए कहा जो उनकी कंपनी में वित्तीय कार्यों का प्रबंधन कर सके।
इस प्रकार अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर का पहला वर्जन लॉन्च किया। हालाँकि यह MS-DOS एप्लीकेशन के रूप में कार्य करता था। इस Version को “प्युट्रॉनिक्स” नाम दिया गया जिसमें केवल कुछ सीमित फ़ीचर्स ही मौजूद थे।
वर्ष 1999 में कंपनी ने इस नाम को औपचारिक रूप से बदलकर Tally Solutions रख दिया। वर्ष 2006 में कंपनी ने Tally 8.1 तथा Tally 9 Version लॉन्च किए गए। 2009 में Tally Solution ने Tally ERP 9 बिज़नेस मैनेजमेंट सोलुशन के रूप में लॉन्च किया।
साल 2015 में Tally Solution ने टैक्सेशन तथा कंप्लायंस फ़ीचर्स के साथ Tally ERP 9 5.0 Version लॉन्च किया। तथा हाल ही में कंपनी द्वारा अपडेटेड GST (गुड्स एंड सर्विस टेक्स्ट) अनुपालन सॉफ्टवेयर लॉन्च हैं।


Tally का परिचय 

Tally का परिचय
किसी भी बिज़नस को ठीक ढंग से चलाने के लिए आवश्यक लाभ लेने के लिए ज़रूरी है की हम तरीके से उसका हिसाब रखे पहले ये कार्य पूरी तरह से मेनुल होता था, परन्तु आज ये सारा काम कंप्यूटर की मदद से संचालित किया जा रहा है।
अब बात आती है हिसाब की तो हिसाब का तात्पर्य यहा एंट्री से है आर्थात अगर आप बिज़नस का हिसाब रखना चाहते है तो आपको सबसे पहले एंट्री करना होगा और ये एंट्री आप दो तरह से कर सकते है।
1. मेनुअल
2. कंप्यूटर
मेनुअल एंटी करना मतलब हाथो से एंट्री करना रजिस्टर पर जबकि कंप्यूटर एकाउंटिंग का अर्थ एकाउंटिंग या एंट्री करना कंप्यूटर पर, मेनुअल एकाउंटिंग जहा हम घंटो या दिनों मे करते थे वही कंप्यूटर एकाउंटिंग हम बिना किसी गलती के मिनटों में कर सकते है।
कंप्यूटर पर एंट्री (या एकाउंटिंग ) करने के लिए हमे एक एकाउंटिंग सॉफ्टवेर की ज़रुरत होती है और टैली उसी तरह का एक एकाउंटिंग सॉफ्टवेर है, टैली एकाउंटिंग सॉफ्टवेर की खास बात ये है की इस पर एकाउंटिंग बड़ी आसानी से की जा सकती है और ये भारत और बहार के कई देशो में सबसे ज्यादा लोकप्रिय एकाउंटिंग सॉफ्टवेर है।
टैली एकाउंटिंग सॉफ्टवेर के अलावा और भी एकाउंटिंग सॉफ्टवेर है जेसे TALLY, MARG, QUICK
BOOKS, M-PROFIT, BUSY, ETC..
लेखानाकं की पारिभाषिक शब्दावली:-
  1. Trade(व्यपार )
  2. Profession (पेशा )
  3. Business (व्यवसाय)
  4. Owner (मालिक)
  5. Capital(पूंजी)
  6. Drawing (अहरण)
  7. Purchase (मालखरीदना )
  8. Sales (माल बेचना )
  9. Purchase Return (क्रय बापसी )
  10. Sales Return (विक्रयबापसी )

Trade :- Trade लाभ कमाने के उद्देश से किया गया वस्तुओ का क्रय विक्रय व्यपार कहलाता है अर्थात किसी से 1000/- रूपए में माल ख़रीदा और उसे 1200/- रूपय में बेचा तो यह २०० रूपए का लाभ लिया गया इसे ट्रेड करना बोला जायेगा।
 Profession :- ऐसा कोई वैधानिक कार्य जिसे करने से पूर्व अभ्यास की आवश्यकता हो और जिस कार्य से आय अर्जित हो पेशा कहलता है अर्थात जेसे अगर कोई गाना गाता है तो गाना गाना उसका शोक है,लेकिन अगर वह गाने गाकर पेसे कमाता है तो वह उसका प्रोफेशन या पेशा कहलायेगा।
 Business :- बिज़नस एक ब्यापक शब्द है जिसमे Trade और Profession दोनों आते है अर्थात किसी जगह पर जहा खरीदी बिक्री के साथ प्रोफेशनल लोग भी कम पर लगे होते है बिज़नस कहलाता है।
Owner :- मालिक वह होता हैजो बिज़नस मेंपैसा लगता हैऔर बिज़नस का संचालन करता है ,मालिक कहलाता है। मालिकतीन तरह के होते है:-
  1. एकाकी व्यापारी(Proprietor) 
  2. साझेदार (Partners)
  3. शेयरहोल्डर (Share Holders)

(i) Proprietor :- वह होता है जो अकेले बिज़नस में पेसे लगता है लाभ एवं हानि का स्वं जिम्मेदार होता है एकाकी व्यपारी कहलाता है।
(ii) Partners :- जब दो या दो से ज्यादा लोग बिज़नस में पैसा लगते है और बिज़नस के लाभ और हानि के उत्तरदायी होते है पार्टनर्स कहलाते है किसी बिज़नस में २० तक साझेदार हो सकते है।
(iii) Shareholder :- किसी बिज़नस में जब २० से ज्यादा लोग हिस्सेदार हो तब वह अंशधारी कहलाते है अर्थात अंश्भर के मालिक होते है।
Capital :- मालिक जो पैसा बिज़नस में लगता है उसे पूंजी बोला जाता है यह पूंजी केश या सम्पति के रूप में हो सकती है।
Drawing :-  मालिक अपने निजी खर्चो केलिए व्यपार से जब पेसे निकलता है तो उसे मालिक के निजी खर्चे या आहरण बोला जाता है। अर्थात किसी व्यापरी के कपड़ो की दुकान है दिवाली आने पर उसने कपड़े आपने ही दुकान से ले लिए तो इसे हम आहरण करना बोलेंगे अपनी की कैपिटल से पेसे या सामान लेना drawing कहलाता है।
Purchase :- Purchase का अर्थ माल खरीदना जो माल बेचने के लिए ख़रीदा जाए उसे हम Purchase कहेते है। याद रहे टैली में भवन खरीदना , फर्नीचर खरीदना Purchase करना नही कहलाता है , Purchase का अर्थ केवल स्टॉक या माल खरीदना जिसे बेचा जायेगा।
Sales :- बिज़नस द्वारा जब कोई माल बेचा जाये उसे हम सेल्स या माल बेचना बोलेंगे और टोटल सेल्स को टर्नओवर कहा जाता है।
 Purchase Return :- जब हम कोई माल किसी से ख़रीदे और किन्ही कारणों से माल में कोई खराबी या गलत माल आने पर उस माल को बापस करना, क्रय- वापसी या purchase Return कहालायेगा।
Sales Return :- जब कोई माल बेचा जाये और बेचे गये माल में कुझ खराबी मिलने पर या गलत माल जाने पर आप उस माल को वापस लेंगे तो या विक्रय वापसी या सेल्स return कहलायेगा।
Terminology of Accounting (Accounting Words):-
  1. Stock(रहतिया ) 
  2. Creditors(लेनदार ) 
  3. Debtors(देनदार ) 
  4. Asset(सम्पति)
  5. Fixed Assets(स्थायी सम्पति)
  6. Current Assets (अस्थायी सम्पति )
  7.  Liabilities (दायित्व )
  8. Fixed Liabilities or long term Liabilities (स्थयी)
  9. current Liabilities or Sort term Liabilities( अस्थायी)
  10.  Income(आय)
  11. Direct Income (प्रतक्ष्य आय ) 
  12. Indirect Income(अप्र्ताक्ष्य आय )
  13. Expenses (खर्चे )
  14. Direct Expenses (प्रतक्ष्य व्य )
  15. Indirect Expenses(अप्रतक्ष्य व्य )
  16. Revenue (राजस्व )

Stock :- हमारे पास वर्त्तमान में जो भी मॉल रखा होता है वह हमारा स्टॉक कहलाता है साल के अंत में जो मॉल बिना विके रहा जाता है उसे उस साल का अंतिम रहतिया closing stock कहा जाता है और साल के पहले दिन वही मॉल प्रारम्भिक रहतिया opening stock कहलाता है।
Creditors :- वह व्यक्ति या संस्था जो किसी दूसरे व्यक्ति या संस्था को उधार मॉल या सेवाए बेचती है या रुपया उधार देती है लेनदार या creditors कहलाते है |संझेप में उधार माल बेचने वाला क्रेडिटर कहलाता है।
उदहारण के लिए विनय ने अशोक को 5000/- रूपए का माल बेचा, तो यहा विनय क्रेडिटर कहलायेगा।
Debtors :- वह व्यक्ति या संस्था जो किसी दूसरे व्यक्ति या संस्था से उधार मॉल या सेवाए खरीदता है या रुपया उधार लेता है देंनदार या Debtors कहलाते है | संझेप में उधार माल खरीदने वाला डेबिटर कहलाता है।
उदहारण के लिए विनय ने अशोक को 5000/- रूपए का माल बेचा, तो यहा अशोक Debtors कहलायेगा। क्यंकि अशोक ने माल ख़रीदा।
Liabilities (Fixed Liabilities) :- Liabilities स्वामी के धन के अतिरिक्त बिज़नेस का वित्तीय दायित्व(कर्जे) लाइबिलिटी कहलाता है। वह, धन जो व्यावसायिक उपक्रम को दूसरों को देना है, दायित्व कहा जाता है ,इस प्रकार दायित्व देयताएँ हैं, ये सभी राशियाँ हैं, जो लेनदारों को भविष्य में देय हैं। 
उदाहरण लेनदार, देय बिल, ऋण एवं अधिविकर्ष इत्यादि Long term Liabilities (Fixed Liabilities) वे दायित्व है या वो कर्जे है जो बिज़नस को किसी को एक साल बाद चुकाना होता है Sort term Liabilities(Current Liabilities ) वे दायित्व है जो बिज़नस को एक साल के अंदर चुकाना होता है जेसे:- लेनदार।
Income :- आय आगम में से व्यय घटाने पर जो शेष बचता है,उसे आय (Income) कहा जाता है। व्यावसायिक गतिविधियों अथवा अन्य गतिविधियों से किसी संगठन के निवल मूल्य में होने वाली वृद्धि इनकम होती है। इनकम एक व्यापक शब्द है जिसमें लाभ भी शामिल होता है।आय = आगम – व्यय (Revenue – Expenses)।
Direct Income :- वह आय जो मुख्य व्यापर से आये उसे हम Direct Income कहते है। उदहारण के लिए अगर किसी की कपड़ो की दुकान है तो उसकी डायरेक्ट इनकम कपडे बेचकर मिले वाली इनकम होगी।
 Indirect Income :- मुख्य व्यवसाय के आलावा अगर कही से भी पेसे आये उसे हम indirect income कहते है | उदाहरण के लिए आपके कपड़ो की दुकान है और आप के पास कुझ जगह ज्यादा है तो आपने आधी जगह किराये पर दे दी तो अब इसे आने वाला पैसा या लाभ INDIRECT इनकम है।
Expenses :- Expenses का अर्थ है खर्चो से जो, देनिक,साप्ताहित,और महीने आदि में होते है |प्रयोग की गई वस्तुओं एवं सेवाओं की लागत को व्यय कहते हैं। ये वे लागते sहोती है जिन्हें किसी व्यवसाय से आय अर्जित करने की प्रकिया में व्यय किया जाता है। 
सामान्यत: एक्सपेसेंज को किसी अकाउंटिंग अवधि के दौरान असेट्स के उपभोग अथवा प्रयुक्त की गई सेवाओं की लागत से मापा जाता है। उदाहरण विज्ञापन व्यय, कमीशन, ह्रास, किराया, वेतन, मूल्यहास, किराया, मजदूरी, वेतन, व्याज टेलीफोन इत्यादि।
Direct Expenses:- किसी माल के उताप्दन से लेकर उसे विक्रय योगय स्थिति में लाने तक जो भी खर्च्र होते है उने Direct Expenses कहा जाता है। उदारण फक्ट्री बिल ,मजदूरी ,फैक्ट्री किराया , (wages), सामन लाने का किराया आदि।
Indirect Expenses :- कार्यलय से सम्धित सभी खर्चे Indirect Expenses कहलाते है जेसे ऑफिस का किराया, लाइट का बिल आदि।
Revenue :- यह व्यवसाय में कस्टमर्स को अपने उत्पादों की बिक्री से अथवा सेवाएँ उपलब्ध कराए जाने से अर्जित की गई राशियाँ होती हैं। इन्हें सेल्स रेवेन्यूज कहा जाता है। कहीं व्यवसायों के लिए रेवेन्यूज के अन्य आइटम्स एवं सामान्य स्त्रोत बिक्री, शुल्क, कमीशन, व्याज, लाभांश, राॅयल्टीज,प्राप्त किया जाने वाला किराया इत्यादि होते हैं। 


Tally क्या है?

Tally क्या है?
टैली अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर है जिसका निर्माण Tally solutions pvt. ltd द्वारा की गई है। भारत में इस्तेमाल होने वाला सबसे ज्यादा और पॉपुलर एकाउंटिंग एप्लीकेशन है।
छोटी बड़ी कंपनियों में एकाउंटिंग उद्देश्य के लिए इसी एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया जाता है।
 यह किसी ऑर्गेनाइजेशन या फिर कंपनी के अंतर्गत होने वाले लेनदेन और खर्चे के बारे में हिसाब किताब रखने में काफी मददगार होता है। 
यदि आप Commerce एवं Accounting के क्षेत्र मे काम करना चाहते हैं, तो यह आवश्यक है की आपके पास Tally Course से संबंधित पूरी जानकारी हो। 
इस क्षेत्र मे किसी भी प्रकार की नौकरी पाने से पहले आपको interview मे इस प्रश्न का सामना करना पड़ सकता है की “टैली क्या है और इसकी क्या आवश्यकता है?” और दूसरा प्रश्न यह भी हो सकता है की आपको टैली का इस्तेमाल करना आता है या नहीं।
आसान भाषा मे समझने की कोशिश करी जाये तो Tally एक software है जिसकी मदद से छोटे एवं मध्य उद्यम (व्यवसाय) अपने व्यापार से संबन्धित records रखते हैं। 

क्यूंकी यह शब्द accounting से संबंध रखता है, ऐसे मे यह कहा जा सकता है की टैली वह accounting software है जिसकी मदद से कोई भी व्यवसाय अपने व्यापार मे होने वाले घाटे/फायदे को record कर सकता है।

2006 मे कंपनी ने Tally 8.1 version release किया जो की एक से ज्यादा भाषाओं मे उपलब्ध था।

2009 मे कंपनी ने Tally ERP 9 launch किया जो की एक business management software था।
2015 मे कंपनी ने Vriddhi नाम का एक program launch किया जहां उन्होने अपने business partners के नाम classify किए।
2015 मे ही कंपनी ने Tally ERP मे tax से संबन्धित accounting features add किए जो लोगों द्वारा खूब पसंद किया गया।
2016 के आते आते कंपनी के 1 million से भी ज्यादा customers हो चुके थे।
2016-17 मे कंपनी ने अपने software मे GST से संबन्धित सेवाएँ भी add कर दीं।


Tally कैसे सीखें?

Tally कैसे सीखें?

लोगों द्वारा अक्सर यह सवाल पूछा जाता है की वह Tally software का इस्तेमाल करना कैसे सीख सकते हैं। एवं कई बार लोग इस बात को ले कर confused रहते हैं की उन्हे online course करके टैली सीखना चाहिए या फिर offline classes की मदद से। 

यदि आपके मन मे भी इस प्रकार के सवाल हैं तो आप इस लेख को सम्पूर्ण रूप से पढ़ते रहें, आपको आपके हर सवाल का जवाब यकीनन प्राप्त हो जाएगा।

चाहे आप Tally software सीखने के लिए online course करें या फिर offline classes, सबसे महत्वपूर्ण चीज़ यह है की आपके अंदर सीखने की इच्छा एवं दृणनिष्ठा होनी चाहिए। 
यदि आप बेमन से सीखने की कोशिश करेंगे तो आपकी मदद शायद यह दोनों ही विकल्प न कर सकें।


(1) Tally Software Online Course

वैसे तो Internet पर आपको बहुत सारे course मिल जाएंगे जो यह दावा करते हैं की आप उनकी मदद से टैली के बारे मे सारा ज्ञान प्राप्त कर लेंगे, परंतु इनमे से कई सारे courses फर्जी होते हैं जिनका मकसद आपको सीखना नहीं बल्कि पैसे कमाना होता है। 
ऐसे मे यदि आप online course करना चाहते हैं तो किसी भी platform को चुनने से पहले उसके बारे मे अवश्य जान लें। किसी भी course को खरीदने से पहले उसके reviews अवश्य पढ़ें।
आप उन्ही Online Courses मे Enroll हों जो:-
  1. आपको Course Complete होने पर Certificate मुहैया करें।
  2. जिनके द्वारा मुहैया कराये जाने वाला Certificate Globally मान्य हो।

Note:- बहुत से Courses आपको course समाप्त होने पर Certificate देने का दावा करते हैं और देते भी हैं। परंतु यह certificate ज़रूरी नहीं की मान्य हो और आप जिस नौकरी के लिए इसे पाना चाह रहे हों वो इसे accept करे। ऐसे मे आप सिर्फ उनही courses का चुनाव करें जो आपको Genuine Certificate प्राप्त करवाने मे सक्षम हों।


(2) Tally Software Offline Course

Tally course करवाने के लिए आपको offline ढेरों institutes मिल जाएंगे। आप उनकी प्रसिद्धता एवं reviews देख कर उनका चुनाव कर सकते हैं। 
यदि आप जल्दी जल्दी कोर्स समाप्त करना चाहते हैं तो आप ऐसे institutes का चुनाव कर सकते हैं जो एक महीने मे पूरा कोर्स खतम करवा देते हैं। 
वहीं यदि आपके पास समय है और आप अच्छे से सॉफ्टवेयर को सीखने मे interested हैं तो आप 3 महीने वाले कोर्स का चुनाव कर सकते हैं।


Tally Course कितने दिनों का होता है?

टैली कोर्स 1 महीने, 2 महीने या 3 महीने तक चल सकता है। यह अलग अलग institutions पर निर्भर करता है की वह कोर्स कितने समय मे खतम करवाते हैं। 
ज्यादा तर institutes 3 महीने के कोर्स करवाते हैं जहां पहले महीने students को Tally से संबन्धित basic जानकारी दी जाती है और दूसरे और तीसरे महीनों मे उन्हे इसके advanced features जैसे की GST, PayRoll इत्यादि के बारे मे समझाया जाता है।


Tally मे Entry कैसे करें?

Tally मे Entry कैसे करें?

यदि आप एक बार इस software को अच्छे से समझ जाते हैं तो इस पर काम करना आपके लिए बेहद आसान हो जाता है। 

Entry करने से पहले आपको यह जानने की आवश्यकता होती है की आप इस Software को अपने System पर कैसे खोलें?
यदि आपके Desktop पर Tally ERP 9 नामक Icon उपलब्ध है तो आप उस पर Click करके इस सॉफ्टवेयर को खोल सकते हैं।
यदि आपके Desktop पर icon नहीं है तो आप इन Steps को Follow करें:-
  1. Start Button पर Click करें।
  2. Programs नामक Folder खोजें एवं उस पर Click करें।
  3. Program folder के अंदर आपको Tally ERP 9 नामक Icon मिल जाएगा, उस पर एक बार Click कर दें।
  4. अब आपको यह जानना होगा की आप किस प्रकार की Entry करना चाह रहे हैं। 

टैली पर आप इन प्रकार की Entries कर सकते हैं:-
  1. Purchase Entry
  2. Sales Entry
  3. Receipt Entry
  4. Payment Entry
  5. Contract Entry
  6. Journal Entry

मान लीजिये की हमे यह Entry Pass करनी है:-
26 August 2019 Telephone Expense to Airtel: 2000
01 September 2019 Electric Bill: 5000
इस Entry को Fill करने के लिए आपको निम्न Steps follow करने होंगे:-
  1. टैली सॉफ्टवेयर को Open करें एवं Homepage या Dashboard (मुख्य Page) पर आ जाएँ।
  2. इसके बाद यह आपको Year Period Select करने के लिए कहेगा। उपरयुक्त उदाहरण मे दर्शाये गए Data के अनुसार हम Period 2019-20 का चुनाव करेंगे क्यूंकी यहाँ 2019 के bills की बात हो रही है।
  3. इसके बाद हम उपरयुक्त दर्शाये गए Entry Types मे से कोई एक चुनेंगे जैसे: Payment Entry
  4. इसके बाद आप Date डालेंगे (उदाहरण डाटा मे date, 26 aug और 01 sep 2019 दर्शाई गयी है तो हम वही Enter करेंगे)
  5. अब आप जिनहे payment करना चाहते हैं यह Software उनकी Bank Details (Credit/Debit Card Details) इत्यादि माँगेगा। यदि यह details आपके पास पहले से Saved हैं तो आप उन्हे चुन लें। अन्यथा आप नयी details add करने के लिए ALT + C shortcut का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  6. यदि आप किसी प्रकार का Comment डालना चाहते हैं तो आप डाल सकते हैं।
  7. Enter button की मदद से सारी Details Save कर लें।
  8. इसी प्रकार आप और भी entries save कर सकते हैं।


Tally सॉफ़्टवेयर के मुख्य फ़ीचर्स

Tally सॉफ़्टवेयर के मुख्य फ़ीचर्स
Tally मल्टी-यूज़र सॉफ्टवेयर है अर्थात एक Tally सॉफ्टवेयर में कई यूजर्स काम कर सकते हैं। जिससे नए यूज़र को किसी विशेष कंप्यूटर सिस्टम की आवश्यकता नहीं होती है।
टेली सॉफ्टवेयर की पूरी जानकारी तथा इस सॉफ्टवेयर की कार्य-प्रणाली को सीखने के बाद कोई भी व्यक्ति किसी कंपनी में अकाउंटिंग कार्य हेतु नौकरी के लिए आवेदन कर सकता है अर्थात विद्यार्थी भी बिना ग्रेजुएशन की डिग्री के टैली सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इस क्षेत्र ने कई प्रकार फ्रीलॉसिंग जॉब लोगों को उपलब्ध करने में मदद की है। फाइनेंस मैनेजर, फाइनेंस एडवाइजर, पब्लिक अकाउंटेंट आदि और आजकल लगभग सभी कंपनियों को एक अकाउंटेंट की आवश्यकता होती है जो उचित रूप से खातों को चला सकें।
टेली Easy-to-Use सॉफ्टवेयर है। टैली सॉफ्टवेयर को इस तरह से डिजाइन तथा विकसित किया गया है जिससे दैनिक जीवन में तथा बिजनेस में वित्तीय क्रियाकलापों को व्यवस्थित किया जा सके।
अधिकतर कंपनियां पैसों के लेन देन का रिकॉर्ड रखने के लिए टैली सॉफ्टवेयर का उपयोग करती हैं, जिससे जाहिर होता है कि आने वाले समय में Tally की मांग बढ़ती ही जाएगी।
इस प्रकार के अनेक महत्वपूर्ण एकाउंटिंग फ़ीचर्स Tally सॉफ्टवेयर में होते हैं। तथा प्रत्येक नए वर्जन के साथ Tally के फ़ीचर्स भी अपग्रेड होते रहते हैं।
यदि आप वास्तविक जीवन में इन सभी फीचर्स का फायदा लेना चाहते है तो आपको खुद टेली सॉफ़्टवेयर पर हाथ आजमाने होंगे अर्थात टेली सीखना पडेग़ा।


Tally सॉफ्टवेयर की उपयोगिता तथा विशेषताएं

  1. पुरानी बही खाता प्रणाली का स्थान Tally सॉफ्टवेयर ने लिया है। जिससे समय, धन तथा ऊर्जा दोनों की बचत हुई है।
  2. यूजर फ्रेंडली तथा सरलतम उपयोग के कारण Tally का इस्तेमाल बैंकों, ऑडिटर्स, चार्टेड अकाउंटेंट जैसे विभिन्न वित्तीय स्थानों के साथ ही छोटे स्तर के व्यापार में उपयोग होता है।
  3. पारंपरिक खाता व्यवस्थित प्रणाली में कॉपी, डायरी आदि में पेन-पेंसिल की मदद से खाते का रिकॉर्ड व्यवस्थित किया जाता था। जिसे हम “कागज़ी रिकॉर्ड” भी कह सकते हैं। परन्तु आज कंप्यूटर के इस युग में Tally सॉफ्टवेयर की मदद से कॉलम, ग्राफ तथा इनबिल्ट कैलकुलेटर से एकाउंट को तैयार करना (प्रबंधन कार्य) सरल हो गया है।
  4. Tally में व्यवस्थित डेटा को लंबे समय तक सहेजना आसान है तथा उस डेटा को अन्य व्यक्ति या कंपनी के साथ साझा करने में भी आसानी होती थी।
  5. इस सॉफ्टवेयर में पुरानी एकाउंटिंग प्रणाली के मुक़ाबले अनेक सुविधाएं मौजूद हैं, जिसमें डेटा को सुरक्षित रखने के लिए फ़ाइल में लॉक लगा सकते हैं।
  6. अकाउंटिंग में Tally के इस्तेमाल से गणितीय त्रुटियों से बचा जा सकता है। जिससे यह व्यापार के प्रबंधन में मदद करता है. जहाँ बहुत अधिक लेखांकन एवं गणना की आवश्यकता होती है।


Tally Software के Limitations

Tally Software के Limitations
वैसे तो यह software दुनिया भर मे बेहद प्रसिद्ध एवं सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाला software है, परंतु हर software की तरह इसकी भी कुछ सीमाएं हैं जिनके आगे यह काम करने मे असमर्थ है। टैली सॉफ्टवेयर free और paid दोनों ही versions मे उपलब्ध है। 
यदि आप इसके free version का इस्तेमाल करते हैं तो आपको कई सारी limitations का सामना करना पड़ सकता है।
Free version मे आपको वह कई सारे ज़रूरतमन्द features नहीं मिलेंगे जो paid version मे उपलब्ध हैं एवं आपके व्यवसाय पर भारी प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसा इसलिए क्यूंकी किसी भी कंपनी का मकसद पैसा कमाना होता है, और यदि वे आपको सारे features मुफ्त मे मुहैया करवा देंगे तो वे पैसे कैसे कमाएंगे। 
हालांकि यह software सभी अच्छे features अपने paid versions मे देता है परंतु अच्छी खबर यह है की इसका paid version भी बेहद affordable है और छोटे व्यवसाय आसानी से इस software को अपने budget मे afford कर सकते हैं।


Tally करने के फायदे

स्टूडेंट्स पढाई करने के दौरान बहुत असमंजस में फंसे रहते हैं की पढाई में कौन सी लाइन चुने? कौन सा कोर्स करने से फायदा है और उसमे करियर बनाने का चांस ज्यादा है। 
मैं यहाँ वैसे स्टूडेंट्स के लिए मार्गदर्शन के रूप में विकल्प लेकर आया हूँ जिन्होंने 12 वीं में कॉमर्स की पढाई की है। ऐसे स्टूडेंट्स के लिए Tally course करना करियर बनाने के लिए बहुत अच्छा विकल्प है।
स्टूडेंट्स अक्सर 12 वीं के बाद ये सोचते हैं की अपना करियर कहाँ बनाये? क्या करे की अछि जॉब मिल सके? कुछ ऐसे स्टूडेंट्स भी होते हैं जो गरीब परिवार से होते हैं और अच्छा कोर्स नहीं कर पाते। 
ऐसे लोग ये चाहते हैं की काम समय में कोई कोर्स कर के अच्छी जॉब कर सके। तो मैं यहाँ आप को ये बताना चाहते आपकी इस खवाहिश को Tally course कर के आप पूरा कर सकते हैं।
जी हाँ आपने सही सुना Tally आज के समय काफी प्रचलित सॉफ्टवेयर है और इस पर काम जानने वाले बहुत काम लोग हैं। इसीलिए इसमें जॉब ऑफर मिलने के बहुत अच्छे चांस हैं और आप अच्छा पैसा कमा सकते हैं।
हर तरफ Tally का डिमांड दिनबदिन बढ़ता जा रहा है। इस कोर्स को करने के लिए ज्यादा पैसे भी खर्च करने की जरुरत नहीं है।
  1. आपको विभिन्न करियर विकल्प मिलते हैं।
  2. जीएसटी युक्त टेली सीखाई जाती है।
  3. यह टेली कोर्स टेली बनाने वालों द्वारा विकसित किया गया है। 
  4. टेली जॉब पोर्टल की एक्सेस मिल जाती है।
  5. सर्टिफिकेट को डिजिटल वेरिफाई किया जा सकता है।
  6. इंडस्ट्री में मान्य है।
  7. ऑनलाइन मूल्यांकन सुविधा मिलती है।


Tally इस्तेमाल करने के फायदे

Tally इस्तेमाल करने के फायदे
(1) Business Grow करने मे आसानी होती है :- बढ़ते व्यवसाय के साथ ज़रूरत होती है पुरजोर monitoring की। इसकी मदद से यह पता लगता है की कब व्यवसाय फायदे मे चलता और कब उसे घाटे की मार झेलनी पड़ती है। एक बार जब यह पता लग जाये की व्यवसाय मे हो रहे घाटे कब और किन कारणों से उत्पन्न होते हैं तो उसके बाद उन्हे सुधारना और business grow करना बेहद आसान हो जाता है। टैली की मदद से आप सूची, पेरोल और बैंकिंग तथा इत्यादि चीजों का record आसानी से रख सकते हैं।
(2) Data Security :- किसी भी software को इस्तेमाल करने से पहले कोई भी company चाहेगी की उसका data software कंपनी द्वारा अन्य स्थानों पर share न किया जाये। ऐसा करने से कंपनी के competitors इस बात का लाभ उठा सकते हैं एवं आपके data की मदद से अपनी strategy तैयार कर आपको business मे पीछे छोड़ सकते हैं। टैली को इस्तेमाल करने का सबसे बड़ा फायदा यह है की आपका data कसी अन्य व्यवसाय या व्यक्ति द्वारा साझा नहीं करा जाता।
इस software मे store किए जाने वाला data पूरी तरह से आप तक सीमित रेहता है और कोई चाह कर भी आपके data तक नहीं पहुँच सकता जब तक आपकी अनुमति न हो। शुरुवात मे लोगों को यह बात हजम करने मे मुश्किल ज़रूर हुई, परंतु आज इस कंपनी के 1 million से भी ज्यादा satisfied customers हैं। इससे इस बात का अंदाज़ा तो हो ही जाता है की आप इस कंपनी पर भरोसा कर सकते हैं।
(3) Manage Client Data :- जब आप टैली software का इस्तेमाल करते हैं तो आपको client के data को manage करने के लिए किसी प्रकार के अन्य software का इस्तेमाल नहीं करना पड़ता। आप एक ही जगह पर client के सारे data को संजोग कर रख सकते हैं एवं उसमे किसी भी प्रकार के बदलाव कर सकते हैं। आपको बार बार शुरू से शुरुवात करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
(4) Globally Accessible :- किसी भी प्रकार की record book को हर समय अपने साथ ले कर घूमना मुमकिन नहीं है। ऐसे मे Globally Accessible का अर्थ है की आप टैली software की मदद से दुनिया के किसी भी कोने मे कहीं भी बैठे हुए अपने data को Internet की मदद से देख एवं analyze कर सकते हैं। इसके लिए बस आपको एक system और Internet की आवश्यकता होती है।
(5) GST Solution :- भारत मे 2016-17 मे उद्यमों मे GST के लागू होने के बाद से काफी प्रभाव पड़ा। शुरुवाती दौर मे लोगों को इसे समझने मे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसी बात को ध्यान मे रखते हुए Tally Solutions ने अपने software मे GST File करने का feature उपलब्ध करवाया। इस feature की मदद से लोगों को GST के बारे मे जानना एवं GST return भरना बेहद आसान हो गया। इसकी मदद से लोगों को GST से जुड़े लगभग सभी सवालों का न सिर्फ जवाब मिला बल्कि उन्हे GST भरने मे काफी आसानी भी हुई।
(6) Saves Incorrect Data :- जब आपके company मे लोग manually details record करते हैं तो उसमे इस बात के काफी आसार होते हैं की उनसे record store करने मे कोई गलती या चूक हो जाये। परंतु टैली सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से इन गलतियों से बचा जा सकता है। यह आपके Post-Dated चेक, bank मे किए गए निवेश एवं अन्य जानकारियों का record रखने मे बेहद सक्षम है।
Accounting किसी भी व्यवसाय का एक अभिन्न हिस्सा है और इसका सही से किया जाना भी बेहद ज़रूरी है क्यूंकी इसमे करी जाने वाली एक गलती पूरे व्यवसाय को मिट्टी मे मिलाने के लिए काफी होती है।
(7) Saves Time :- Manually records को दर्ज करने मे अक्सर काफी लंबा समय लगता है और ऐसे मे गलतियों के होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। टैली का इस्तेमाल आपके बेहद कीमती समय को बर्बाद होने से एवं गलत डाटा रेकॉर्ड होने से बचाता है।
इस लेख में हमने आपको टेली सॉफ़्टवेयर की पूरी जानकारी दी हैं। आपने जाना कि टेली क्या होती हैं? टेली के कुछ मुख्य फीचर्स तथा टेली कैसे सीखते है? इन सभी के बारे में जाना है. हमे उम्मीद है कि यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा।
आप इस लेख को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें ताकि उन्हे भी टेलि के बारे में जानकारी मिल जाएं और कुछ समझ नहीं आया है या फिर कोई सवाल रह गय है तो आप कमेंट करके पूछ सकते है।

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