Computer Anti-Virus क्या हैं? Computer Anti-Virus के बारें में विस्तार से जानिए?

What is Computer Anti-Virus? Know Computer Anti-Virus in Details in Hindi?


COMPUTER ANTI-VIRUS
COMPUTER ANTI-VIRUS
 एंटी-वायरस Software वह सॉफ़्टवेयर है, जो कंप्यूटर से Virus, Worms और अन्य Malware का पता लगाता है, उन्‍हे रोकता है, और रिमूव करता है। एंटीवायरस सॉफ्टवेयर वायरस के साथ, स्पायवेयर और एडवेयर को भी रिमूव करता हैं या रोक सकता है। अधिकांश एंटी-वायरस प्रोग्राम्स में एक ऑटो अपडेट फीचर शामिल होता है।

एंटी-वायरस का इतिहास

आज से 70 वर्ष पूर्व पहले कंप्यूटर वायरस का जन्म हुआ तथा पहला ज्ञात कंप्यूटर वायरस क्रीपर वायरस के नाम से जाना गया उस समय मेनफ्रेम कंप्यूटर प्रचलन में थे. तो यह वायरस मेनफ्रेम कंप्यूटर सिस्टम को संक्रमित करता था. इस वायरस को हटाने के लिए अनेक शोध कार्य किये गए।
अंततः “रे टॉमलिंसन” द्वारा क्रीपर वायरस को नष्ट करने के लिए एक प्रोग्राम बनाया गया जिसे “द रीपर” के नाम से भी जाना जाता था. क्रीपर वायरस के बाद अनेक वायरस का जन्म हुआ तथा वर्ष 1981 में “एल्क क्लोनर” नामक ज्ञात वायरस उत्पन्न हुआ जिसने एप्प्ल कंपनी के दूसरी सीरीज के कंप्यूटर पर वायरस हमला किया।

1980 के दशक से पूर्व इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित थी जिस वजह से संक्रमित फ्लॉपी डिस्क के जरिए एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम में वायरस फैलते थे. परन्तु इंटरनेट के बढ़ते विकास की वजह से वायरस ऑनलाइन तेजी से फैलने लगे।
वर्ष 1987 में “एंड्रियास ल्युनिंग” तथा “काई फेज़” नामक व्यक्ति द्वारा पहला एंटीवायरस उत्पाद लॉन्च किया गया. वर्ष 1987 में ही McAfee कंपनी द्वारा Virus Scan नामक एंटीवायरस का पहला Version लॉन्च किया गया. McAfee इंटेल सुरक्षा कंपनी का एक हिस्सा थी।
समय के साथ वर्ष 1988 तक कई एंटीवायरस निर्माण करने वाली कंपनियों की संख्या में वृद्धि होती गई.
वर्ष 1987 में “फ्रेड कोहन” द्वारा कहे गए कथन के अनुसार “ऐसा कोई अल्गोरिथम नहीं है जो पूर्ण रूप से संभावित कंप्यूटर वायरस की जानकारी प्रदान कर सके” परन्तु वर्तमान समय में एंटीवायरस के जरिये काफी हद तक इन गुप्त वायरस के बारे में जानकारी प्राप्त कर नष्ट किया जा सकता है।
1990 में कंप्यूटर एंटीवायरस अनुसंधान संगठन (CARO) की स्थापना की गई. 1992 में AVG तकनीक का विकास किया गया. तथा इसी वर्ष एन्टी-वायरस गार्ड अर्थात प्रचलित AVG एंटीवायरस का पहला संस्करण लॉन्च किया गया. इस प्रकार समय के साथ विभिन्न कंपनियों द्वारा एंटीवायरस प्रोग्राम के निर्माण की ओर ध्यान दिया।

एंटी-वायरस का परिचय 

एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर एक प्रोग्राम या कार्यक्रमों का सेट है जो कि सॉफ्टवेयर वायरस को रोकने, खोजना, पता लगाने और हटाने और अन्य दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर जैसे कीड़े, ट्रोजन, एडवेयर आदि के लिए डिज़ाइन किया जाता हैं। ये उपकरण उपयोगकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह स्थापित और अप-टू-डेट है क्योंकि एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर स्थापित किए बिना एक कंप्यूटर इंटरनेट से कनेक्ट होने के कुछ मिनटों में संक्रमित होता है। एंटी-वायरस कंपनियां दैनिक रूप से बनाए गए 60,000 से अधिक नए मैलवेयर से निपटने के लिए लगातार अपने वायरस का पता लगाने के उपकरण को अद्यतन करती हैं।

एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर एक प्रकार की उपयोगिता है जिसका उपयोग आपके कंप्यूटर से वायरस को स्कैन करने और हटाने के लिए किया जाता है। जबकि कई प्रकार के एंटीवायरस (या “एंटी-वायरस”) प्रोग्राम मौजूद हैं, उनका प्राथमिक उद्देश्य कंप्यूटर को वायरस से बचाना और पाए जाने वाले किसी भी वायरस को हटाना है।

अधिकांश एंटीवायरस प्रोग्राम में स्वचालित और मैन्युअल दोनों स्कैनिंग क्षमताएं शामिल हैं। स्वचालित स्कैन उन फ़ाइलों की जांच कर सकता है जो इंटरनेट से डाउनलोड की जाती हैं, कंप्यूटर में डाली गई डिस्क, और सॉफ्टवेयर इंस्टालर द्वारा बनाई गई फाइलें। स्वचालित स्कैन नियमित रूप से संपूर्ण हार्ड ड्राइव को भी स्कैन कर सकता है। मैनुअल स्कैन विकल्प आपको व्यक्तिगत फ़ाइलों या आपके पूरे सिस्टम को स्कैन करने की अनुमति देता है जब भी आपको लगता है कि यह आवश्यक है।

चूंकि नए वायरस लगातार कंप्यूटर हैकर्स द्वारा बनाए जा रहे हैं, एंटीवायरस प्रोग्राम को वायरस प्रकारों का एक Update  डेटाबेस रखना चाहिए। इस डेटाबेस में “वायरस परिभाषाओं” की एक सूची शामिल है जो फ़ाइलों को स्कैन करते समय एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर का संदर्भ देती है। चूंकि नए वायरस अक्सर वितरित किए जाते हैं, इसलिए आपके सॉफ़्टवेयर के वायरस डेटाबेस को Updating रखना महत्वपूर्ण है। सौभाग्य से, अधिकांश एंटीवायरस प्रोग्राम स्वचालित रूप से नियमित रूप से वायरस डेटाबेस को अपडेट करते हैं।
Antivirus ये एक Program (code) है. यह भी बोल सकते हो ये एक एसा Software है जो Computer में छुपे हुए सारे Virus Program को ढूंड निकालता है और उसको Computer से Delete यानि ख़तम कर देना. यह भी कह सकते हो ये Computer के लिए Safeguard जैसे काम करता जो Malware जैसे Computer Worms, Trojan Horse से बचाता है।

Antivirus Computer को Spyware और Adware से भी Protection देता है. इन सभी program को आपके Computer से Detect करके delete कर देते हैं. कुछ तो आपके Files को Short Cut कर देता है, Files गायब कर देता है, जो computer को Slow कर देता है।

मेरा कहने का मतलब है, ये एक अच्छा वाला Software उन सभी Programs को निकाल देता है जो आपके Computer के लिए हानी कारक होता है. अब आप ये सोच रहे है क्या Program ही virus है, हाँ virus भी एक Program ही होता है. इन दोनों को बनाने वाला भी एक इंसान ही होता है. Example:- Avira, Avast, AVG Kaspersky.

एंटी-वायरस क्या है ?

सरल शब्दों में समझें तो “एंटीवायरस वह सॉफ्टवेयर या प्रोग्राम होता है, जो कंप्यूटर में गुप्त सभी वायरस प्रोग्राम को डिलीट करने का कार्य करता है.” एंटीवायरस को Anti-Malware सॉफ्टवेयर के रूप में भी जाना जाता है. क्योंकि यह सिस्टम में Malware, Spyware आदि द्वेषपूर्ण प्रोग्राम्स का पता लगाने तथा उन्हें डिलीट करने में सक्षम होता है।
एंटीवायरस को मुख्यतः सिस्टम में छुपे वायरस का पता लगाने तथा उसे नष्ट करने के लिए निर्माण किया गया हैं. वर्तमान समय में अत्याधुनिक तकनीक के एंटीवायरस किसी सिस्टम में Adware, Spyware, Ransomware, Keyloggers, Backdoors, Trojan Horse आदि दुर्भाग्यवश प्रोग्राम से यूज़र के डेटा को सुरक्षित करता है. इसके साथ ही आपका यहाँ जानना जरूरी है एंटीवायरस का इस्तेमाल न सिर्फ कंप्यूटर सिस्टम में बल्कि वर्तमान समय में सोशल इंजीनियरिंग,  इंटरनेट बैंकिग, फिशिंग आदि से होने वाले ऑनलाइन हमलों से उपयोगकर्ता को बचाने के उद्देश्य से अनेक स्थानों पर किया जा रहा है।कोई भी एंटीवायरस अपने डेटाबेस में उपलब्ध जानकारी को फाइल्स के रूप में स्कैन करता है. यदि डेटाबेस में कोई पैटर्न समान (Duplicate) होता है तो इस स्थिति में एंटीवायरस उसे वायरस का नाम देता है।
जब भी कोई फाइल या प्रोग्राम सिस्टम में इनस्टॉल होता है तो एंटीवायरस उस फाइल या सॉफ्टवेयर को स्कैन करता है. यदि इनमें से कोई फ़ाइल या प्रोग्राम एंटीवायरस प्रोग्राम के विशिष्ट सूचक से मेल खाता है. तो एंटीवायरस उस प्रोग्राम को वायरस की श्रेणी में वर्गीकृत कर देता है. हालाँकि वायरस स्कैन करने के लिए प्रत्येक एंटीवायरस प्रोग्राम की भिन्न-भिन्न कार्य प्रणाली होती है।
जब एंटिवायरस द्वारा किसी वायरस अथवा बग को पहचान लिया जाता है. तब यह प्रोग्राम युजर को इस खतरनाक प्रोग्राम की जानकारी उपलब्ध करवाता है. और इसके साथ किये जाने वाले सलूक के विकल्प भी उपलब्ध करवाता हैं. युजर अपनी जानकारी और सुझाए गए विकल्पों के आधार पर किसी एक विकल्प का चुनाव करके वायरस को नष्ट कर देता है. इस तरह हमारा कम्प्युटर पुन: सुरक्षित हो जाता हैं।

एंटी-वायरस की विशेषताएँ

Background Scanning:- हम आमतौर पर सिस्टम के बैक-एन्ड पर कई फाइल ओपन रखते हैं. एक एंटीवायरस प्रोग्राम उन सभी फाइल्स को स्कैन करता है जो सिस्टम को दुर्भाग्यपूर्ण हमलों से सुरक्षित रखने के साथ ही Real-Time सुरक्षा प्रदान करता है. अतः बैकग्राउंड स्कैनिंग द्वारा एंटीवायरस कम्प्युटर को सुरक्षा प्रदान करता है।
Full System Scan:- Full System Scanning विशेषकर तब फ़ायदेमंद होती है जब आपके द्वारा सिस्टम में एंटीवायरस को अपडेट किया होता है. एंटीवायरस द्वारा सिस्टम को स्कैन कर यह सुनिश्चित किया जाता है कि कंप्यूटर में पहले से वायरस मौजूद है अथवा नहीं. इसके साथ ही वायरस से संक्रमित कंप्यूटर सिस्टम को दुरुस्त करने के बाद फुल सिस्टम स्कैनिंग महत्वपूर्ण होती है।
Virus Definition:- जी हाँ एक एंटीवायरस प्रोग्राम Malware की पहचान करने के लिए Virus की परिभाषा का उपयोग करते हैं. किसी फाइल या सॉफ्टवेयर को स्कैन करने के दौरान सिस्टम यदि किसी मैलवेयर से ग्रस्त किसी फ़ाइल को ढूंढता है तो मैलवेयर परिभाषा में वह मैलवेयर के समान होता है. अतः एंटीवायरस परिभाषा के आधार Malware को रोकने के साथ ही नष्ट भी कर सकता है।

एंटी-वायरस की उपयोगिता 

एंटीवायरस से हमें क्या फायदे होते है या इसके क्या उपयोग है ? इसके बारे में जानकारी पाने के लिए हमने आपको नीचे जानकारी बताई है आप इन जानकारी को पढ़के इसके बारे में जानकरी पा सकते है:-
  1. यह आपके कंप्यूटर में सेव होने वाले सभी प्रकार के डाटा को सुरक्षित रखता है।
  2. इसकी मदद से आपके कंप्यूटर से कोई भी इंटरनेट के द्वारा कोई भी चीज़ नहीं चुरा सकता।
  3. किसी भी हानिकारक सॉफ्टवेयर को बिना किसी झिझक के डाउनलोड कर सकते हो।
  4. यदि आप पेड एंटीवायरस का इस्तेमाल अपने कंप्यूटर में कर रहे है तो निश्चित ही आपको ऑनलाइन ट्रांसक्शन में भी सुरक्षा रहेगी।
  5. अगर आपका सिस्टम या डिवाइस हैंग होती है या स्लो है तो आप एंटीवायरस को उसमे इनस्टॉल कर सकते है।
  6. आपके सिस्टम में भी अन्य प्रकार के सभी सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन बहुत ही अच्छी तरह से रन होंगे।
  7. इसे अपने सिस्टम में इनस्टॉल करने पर आपके कंप्यूटर की प्रोसेसिंग स्पेस बढ़ जाती है।
  8. कई बार कई कंप्यूटर की हार्ड डिस्क Corrupt हो जाती है एंटीवायरस को इनस्टॉल करने के बाद हार्ड डिस्क करप्ट नहीं होगी।

एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर की आवश्यकता 

हमें एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर की ज़रूरत है क्योंकि आज की दुनिया में कोई भी पीसी, जिसपर इफेक्टिव एंटिवायरस सॉफ़्टवेयर इंस्‍टॉल नहीं हैं वह इंटरनेट को कनेक्‍ट होने पर कुछ मिनटों में इन्फेक्टेड हो सकता है।

लेकिन कुछ यूजर्स को लगता हैं, की उनका पीसी तो इंटरनेक्‍ट से कनेक्‍ट नहीं हैं, तो उन्‍हे एंटीवायरस की आवश्यकता भी नहीं हैं। लेकिन, एंटीवायरस के बिना जब यूजर इन्फेक्टेड यूएसबी ड्राइव या डीवीडी को अपने पीसी में इन्‍सर्ट करते हैं, तो उनका पीसी तुरंत वायरस से इन्फेक्टेड हो जाता हैं।

आज कंप्यूटर के साथ-साथ अन्य डिवाइस, जैसे स्मार्टफोन या टैबलेट पर भी लगातार वायरस की बमबारी हो रही हैं, जो डिवाइस को नुकसान पहुंचाते हैं या संवेदनशील डेटा को चुरा लेते हैं जिसका इस्‍तेमाल वे अन्य आपराधिक एक्टिविटीज के लिए किया जा सकता है।

इसलिए यदि आप अपने कंप्यूटर में कहीं और से कुछ (एक फाइल या एक ईमेल) ले आते हैं तो आप अपने कंप्यूटर में वायरस ला सकते हैं।

एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर का नाम

यह हमने आपको कुछ एंटीवायरस के नाम बताये है आप जिनकी मदद से आप अपने कंप्यूटर या मोबाइल में इनस्टॉल करके एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का लाभ ले सकते है और वायरस को डिटेक्ट कर सकते है:-
  1. Bitdefender ( Antivirus ) Free Edition
  2. Avira
  3. Avast Free
  4. AVG Free
  5. Kaspersky Lab Internet Security 2020
  6. 360 Total Security
  7. Panda Free
  8. Comodo
  9. Check Point ZoneAlarm Free ( Antivirus ) + Firewall
  10. Microsoft Windows Defender
एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर का नाम

एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली 

सबसे पहले इसको आसान सी भाषा में समझाते हैं. जैसे सबको समझ में आए वैसे simple भाषा में इसके काम को समझाना चाहूँगा. Antivirus में पहले से ही बोहत सारे Virus के Signature (छाप) या Virus Definition Files होते हैं. ये सरे Robust files हैं इन files में Malware (Computer Virus) की list और उनके सम्भंदी जानकारी रहती है. इसको समझने के लिए Virus Defination को समझना होगा।
Antivirus बिना virus Defination के Malware को Idendify/पहचान कर ही नहीं सकता है. इसलिए Virus Defination को Update करना पड़ता है. क्यूंकि Malware defination के अंदर Virus Signature रहता है. Internet में जो पहले से Malware हैं उनके नाम और उनके संभंदी जानकारी रहती है इस Defination में.जब भी कोई File Malware से Infected होती है या Scan के दोरान अगर कोई Malware Detect होता है तो सबसे पहले Antivirus उसको Virus Definition के साथ similar है या नहीं ये Check करता है.Virus Definition कुछ Malware Properties और उसके जैसे Program रहते हैं. इसलिए यह भी जरुरी है की Virus Definition को Antivirus Company हमेशा  Update करे।
सबसे पहले यह Software Computers के अंदर मोजूद सारे Files को Scan करता है. जब भी कोई File Signature(छाप) या Virus Defination Files के साथ मैच होता है. उसी समय उस फाइल को Repair या Delete कर देता है. वैसे आप जो Action आप लोगे उसके उपर ही वो काम करता है. जब computer Virus Program Computer के अंदर घुस जाता है तो वो Computer Files के साथ उल्टा पुल्टा काम करने लगता है।
इसी ब्यवहार से ये पता चल जाता है की कुछ गड़बड़ File Computer के अंदर है. तुरंत उसके उपर Action लेना सुरु हो जाता है. अब थोडा Technical तरीके से समझते हैं की कैसे Computer में Virus का पता लगाया जाता है।

एंटी-वायरस किन किन तरीकों से Malware का पता लगाता है?

सबसे कठिन काम तो यही है की पुरे System में 500-1000 GB का DATA रहता है. और उसमे से virus को ढूंड निकलना तो चलिए जानते हैं किन किन तरीकों से ये पता लगाता है।
  1. Signature (based detection)
  2. Heuristic (based detection)
  3. Behavioral (based detection)
  4. Sandbox detection
  5. Data mining techniques

Signature:- ये एक सबसे पुराना तरीका है, Computer Virus को ढूंड निकाल ने का. जिसमे Computer में जितने भी .Exe Files हैं उन सभी को Virus Definition Files के साथ match करना पड़ता है या दुसरे Malware type के साथ मैच किया जाता है. जब भी कोई Unknown File को पहचान जाता है तब उसके उपर Action लिया जाता है।
इस Signature Based Technique में सारे प्रोग्राम को Scan किया जाता हैं. इस Technique में अगर कोई Application Download किये हो तो सबसे पहले Software को Scan किया जाता है. इसके बाद Install किया जाता है. इसलिए यही सलाह है की जब भी आप कोई Software को Download करते हो तब उसको पहले ही Scan कर लें. क्यूंकि एक बार जब आपका System Infected हो जाता है तो उसको Remove करना मुस्किल काम हो जाता है।
Heuristic:- ये detection technique को और Signature based detectction को मिलके इस्तेमाल किया जाता है. Heuristic technique को आज कल के सारे Antivirus में Use किया जाता है. virus definition file नहीं होने पे भी इस technology की मदद से आसानी से नए और पुराने Virus को भी खोज के निकला सकते है. इसके लिए latest virus definition होने की आवस्यकता नहीं।
Heuristic में ये एक संदेह जनक code या application को Virtual Environment में रन करता है और इसे ये पता लगता है की कोनसा program इस application को effect डालने की कोसिस कर रहा है. इस तरीके से दुसरे Real Software को भी बचाया जा सकता है।
Behavioral:- ये भी Virus को ढूंड निकालने का एक खास Detection तरीका है. जिसको Intrusion Detection Mechanism भी बोला जाता है. इसकी खासियत यह है की malaware के व्यवहार (Behavior) को detect करता है. malware को ये तभी detect करता है जब व दुसरे files को currupt या कोई उल्टा पुल्टा कम करने की कोसिस करता है. लेकिन ये खूबी दुसरे Detection में mechanism नहीं है।
Sandbox Detection:- लगभग Behavioral based detection mechanism पे ही ये काम करता है. इस mechanism में एक program को Virtual Environment में Run किया जाता है. अब इस process में program के Behavior को Identify किया जाता है. अगर anti virus को पता चलता है की ये program Malicius है तो उसपे action लिया जाता है।
Data Mining Techniques:- ये अब के समय का सबसे Latest Trending Technology है. जिसमे कुछ ख़ास Programs के Features होते हैं. data mining technique से Program Malicious है या नहीं ये पता लगाया जाता है।

Antivirus को Update करना क्यूँ जरुरी है?

हर रोज नए नए Virus बन रहें कुछ लोगों का ये भी कहना है. जो Company anti Virus बनाती हैं वही Virus भी बनाते हैं. लेकिन इसलिए आपको नए virus के attack से बचने के लिए हर रोज Update करना बहुत जरुरी है. update से latest definition files भी स्टोर हो जाएँगी और new virus को identify और block करने में आसानी होगी।
  1. Background Scanning
  2. Full System Scans

Background Scanning:- जब आप System में कुछ files, Application और Online कुछ करते रहते हो तब भी यह आपके सारे Files को Scan करता रहता है. इसे Background Scaning कहते हैं. इसे आपके computer को Real Time Protection और Safeguard मिलता है. आपके system के उपर कोई भी Malware Attack नहीं कर सकते।
Full System Scans:- वैसे तो Full Sacn करने की जरुरत इतनी ज्यादा नहीं है. अगर आप आप पहलीबार कोई नया Antivirus आपके System में Install कर रहे हो तब आपको एक बार Full scan करने की अबस्यकता है. इस्से आपके System मतलब Computer में जितने भी छुपे हुए Computer Malware हैं वो सब Remove हो जायेंगे. इसके बाद अपने आप Background Scan होता रहता है. और बिच बिच अपने Laptop को Full Scan कर लेना चाहिए।

Computer में Antivirus होने के फायदे

इसमें कोई प्रश्न ही नहीं उठता की क्या इसके कोई फायदे हैं? हाँ अभी के समय में Internet में इतना ज्यादा Malware attack हो रहा है. इसलिए आपको Free वाला या Paid वाला दोनों में से कोई एक को जरुर अपयोग करें:-
  1. सबसे पहले तो ये आपके सारे डाटा को सुरक्षित रखता है।
  2. Computer से कोई भी आपके Data को Internet से कोई भी चुरा नहीं सकता।
  3. कोई भी Software को आप बे झिजक Download कर सकते हो।
  4. कोई Computer virus आपके Computer को नुकसान करने से पहले ये अपना करवाई उसके उपर कर देता है।
  5. अगर Paid वाला हैं, तो आपके सारे Online Transaction भी सुरक्षित होंगे।
  6. इस्से आपके पैसे बचेंगे क्यूंकि Malware जो नुकसान होगा उन पैसे से तो आप दो तिन Antivirus खरीद लोगे।
  7. आपका System कभी Hang या Slow नहीं होगा।
  8. System Software और Application Software बहुत Smooth Run होंगे।
  9. Processing Speed बढ़ जाएगीं और कभी System Crash भी नहीं होगा।
  10. Hard Disk Corrupt होने को संभावना भी कम है।


वायरस और एंटी-वायरस में क्या अंतर है?

वायरस कंप्यूटर वायरस होते है जो कंप्यूटर प्रोग्राम को चलने नहीं देते है और टाइम टाइम पर ये अपडेट होते रहते और जिस भी कंप्यूटर में रहते है उनमे से डाटा चोरी करके शेयर भी करते रहते है . इन्ही को रोकने के लिए एंटीवायरस का उपयोग में लिया जाता है ताकि हम अपने कंप्यूटर को समय रहते सुरक्षित रख सके और अपने डाटा को भी चोरी होने से रोक सके। 

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