Computer भागों के बारे में विस्तार से जानिए?

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Know About Computer Parts in Detail in Hindi?

 
COMPUTER PARTS
Computer भागों के बारे में विस्तार से जानिए?
एक तकनीकी क्षेत्र है।  यह कुछ विशेष शब्दों एवं भाषाओं के आधार पर कार्य करता है. इसकी शब्दावली जानने के लिए इसके नियमों को जानना आवश्यक है। आप सोचते तो जरूर होंगे कि कंप्यूटर के आस-पास जो उपकरण रखे होते हैं; वे क्या होते हैं ? ये वे उपकरण होते है जो केबलों के साथ कंप्यूटर से जुड़े होते है।  इन्हें हम कंप्यूटर पेरिफेरल्स भी कहते हैं।  लेकिन कंप्यूटर के कुछ भाग जैसे मदर बोर्ड (Mother Board) मैमोरी चिप (Memory Chip) आदि सिस्टम यूनिट के अंदर होते हैं जो पेरिफेरल्स की श्रेणि में नहीं आते।
कंप्यूटर मुख्य रूप से दो भागों से मिलकर बना होता है:-
 
  1. हार्डवेयर (Hardware)
  2. सॉफ्टवेयर (Software)

 

 Hardware:- कम्प्यूटर के भौतिक हिस्से जिन्हे हम देख या छू सकते हैं वो हार्डवेयर कहलाते हैं. ये भाग मशीनी (मैकेनिकल),इलेक्ट्रीकल (electrical) या इलेक्ट्रोनिक (electronic) हो सकते हैं. हर कम्प्यूटर का हार्डवेयर अलग अलग हो सकता है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि कम्प्यूटर किस उद्देश्य के लिये प्रयोग में लाया जा रहा है और व्यक्ति की आवश्यकता क्या है
एक कम्प्यूटर में विभिन्न तरह के हार्डवेयर होते है जिनमें मुख्य हैं.सी.पी.यू. (CPU), हार्ड डिस्क (Hard Disk) , रैम (RAM), प्रोसेसर (Processor) , मॉनीटर (Monitor) , मदर बोर्ड (Mother Board) ,फ्लॉपी ड्राइव आदि. इनकी हम विस्तार से चर्चा आगे करेंगें. कम्प्यूटर के केबल, पावर सप्लाई युनिट,की बोर्ड (Keyboard) , माउस (Mouse) आदि भी हार्डवेयर के अंतर्गत आते हैं. की बोर्ड , माउस , मॉनीटर , माइक्रोफोन , प्रिंटर आदि को कभी कभी पेरिफेरल्स (Peripherals) भी कहा जाता है
 
Software:- कम्प्यूटर हमारी तरह हिन्दी या अंग्रेजी भाषा नहीं समझता.हम कम्प्यूटर को जो निर्देश देते हैं उसकी एक नियत भाषा होती है. इसे मशीन लैंग्वेज या मशीन की भाषा कहा जाता है. इसी मशीन की भाषा में दिये जाने वाले निर्देशों को प्रोग्राम (Program) कहते हैं. ‘सॉफ्टवेयर’ उन प्रोग्रामों को कहा जाता है, जिनको हम हार्डवेयर पर चलाते हैं और जिनके द्वारा हमारे सारे काम कराए जाते हैं बिना सॉफ्टवेयर के कम्प्यूटर से कोई भी काम करा पाना असंभव है
 
मुख्यत: सॉफ्टवेयर दो प्रकार के होते हैं:-
 
System Software:- “सिस्टम सॉफ्टवेयर” ऐसे प्रोग्रामों को कहा जाता है, जिनका काम सिस्टम अर्थात कम्प्यूटर को चलाना तथा उसे काम करने लायक बनाए रखना है.सिस्टम सॉफ्टवेयर की सहायता से ही हार्डवेयर अपना निर्धारित काम करता है. ऑपरेटिंग सिस्टम, कम्पाइलर आदि सिस्टम सॉफ्यवेयर के मुख्य भाग हैं ।
Application Software:- “एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर” ऐसे प्रोग्रामों को कहा जाता है, जो हमारे रोजमर्रा के कामों को कम्प्यूटर में अधिक तेजी और सरलता से करने में मदद करते हैं.आवश्यकतानुसार भिन्न-भिन्न उपयोगों के लिए भिन्न-भिन्न एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर होते हैं. जैसे लिखने के लिये, आंकड़े रखने के लिये, गाना रिकॉर्ड करने के लिये, वेतन की गणना, लेन-देन का हिसाब, वस्तुओं का स्टाक आदि रखने के लिये लिखे गए प्रोग्राम ही एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर हैं
कम्प्यूटर के विभिन्न भाग
 
कम्प्यूटर के विभिन्न भाग
 

Arithmetic logic unit

अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (Arithmetic logic unit) सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के मुख्य तीन घटकों में से एक है जिसमें मेमोरी यूनिट (Memory unit) और कंट्रोल यूनिट (Control unit) भी शामिल है A.L.U कंप्यूटर हार्डवेयर में एक डिजिटल सर्किट होता है, अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट का मुख्य कार्य होता है।
अंकगणितीय तर्क इकाई अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट का मुख्य कार्य होता है अंकगणितीय कार्य करना जैसे जोड़ना घटाना गुणा करना भाग करना और गणित की तरह और भी जितने कार्य होते हैं वह करना इसके अलावा तर्क संबंधित कार्य जितने भी होते हैं जैसे तुलना करना चयन करना मिलान करना डाटा को आपस में मर्ज करना इस प्रकार की कार्य अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (A.L.U)  करती है एएलयू को मुख्य रूप से बेसिक अर्थमेटिक ऑपरेशन के लिए ही डिजाइन किया गया है इसको A.L.U भी कहते है ।
यह यूनिट डाटा पर अंकगणितीय क्रियायें (जोड़ा, घटा, गुणा, भाग) और तार्किक क्रियायें (Logical operations) करती हैं । ए. एल. यू. A.L.U कंट्रोल यूनिट से निर्देश लेता है । यह मैमोरी से डाटा को प्राप्त करता है तथा प्रोसेसिंग के पश्चात् सूचना को मैमोरी में लौटा देता है । ए. एल. यू. (A.L.U) के कार्य करने की गति अति तीव्र होता है । यह लगभग 10,00,000 गणनायें प्रति सेकेंड की गति से करता है ।
  1. Accumulator
  2. Register
  3. ALU

इसमें कई रजिस्टर और एक्यूमुलेटर (Accumulator) होते हैं जो गणनाओं के दौरान intermediate रिजल्ट को संग्रह करते है । A.L.U (ए. एल. यू.) प्रोगाम के आधार पर कंट्रोल यूनिट के बताए अनुसार सभी डाटा मैमोरी से प्राप्त करके accumulator में रख लेता है ।

उदाहरणार्थ, माना दो संख्याओ a और b को जोड़ना है । कंट्रोल यूनिट a को मैमोरी से प्राप्त कर ए. एल. यू. में पहुँचाती हैं । अब यह b का मान मैमोरी से चुनकर ए. एल. यू. में िस्थत हो जाता है ।

 
  1. हार्ड डिस्क की भौतिक संरचना
  2. सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट क्या है? 
  3. कंप्यूटर में बूटिंग क्या होती है?

  1. + Add (जोडना)
  2. – Subtract (घटाना)
  3. x Multiply (गुणा करना)
  4. / Divide ( भाग देना)

  1. < Less then (छाेटा है)
  2. = equal to (बराबर है)
  3. > Greater then (बडा है)
यह सभी प्रकार की गणना और तुलना अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ए. एल.यु.) में होती हैं प्रोसेसिंग से पहले प्राइमरी मेमोरी (Primary memory)में जो डाटा होता है और जो निर्देश होते हैं वह अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट में ट्रांसफर हो जाते हैं और वहां पर उनकी प्रोसेसिंग का कार्य होता है Arithmetic logic unit (A.L.U) से जो परिणाम मिलते हैं उनको प्राइमरी मेमोरी में ट्रांसफर कर दिया जाता है और प्रोसेसिंग समाप्त होने के बाद मेंप्राइमरी मेमोरी (Primary memory)में जो डाटा बचता है या अंतिम परिणाम बचते हैं वह एक आउटपुट डिवाइस (Output device) के माध्यम से आप तक पहुंचा दिए जाते हैं
Arithmetic logic unit

Control Unit

सी. यू. (CU) हार्डवेयर की क्रियाओं को नियंत्रित और संचालित करता है । यह इनपुट-आउटपुट क्रियाओं को नियंत्रित करता है, साथ ही मैमोरी और ALU के मध्य डाटा के आदान-प्रदान को निर्देशित करता है । यह प्रोगाम को क्रियावितं करने के लिए निर्देशों को मैमोरी से प्राप्त करता है । निर्देशों को विघुत संकेतों में परिवर्तित करके यह उचित डिवाइसेस तक पहुँचाता हैं, जिससे डाटा प्रक्रिया का कार्य सम्पन्न हो सके ।
सी. यू. को कंप्युटर  का दिमाग भी कहते हैं ।एक Control Unit (CU) (या Controller) हार्डवेयर का एक टुकड़ा है जो बाह्य उपकरणों की गतिविधियों (Computer से जुड़ी अलग-अलग डिवाइस, जैसेMonitor, Hard Drive, Printer, आदि) का प्रबंधन करता है।
कंट्रोल यूनिट कंप्यूटर की मेमोरी और Peripheral के बीच सूचनाओं के हस्तांतरण को “go-between,” के रूप में कार्य करती है।आप तो जानते हैं कंप्‍यूटर कोई भी काम करने के लिये प्रोसेंसिग करता है प्रोसेसिंग काम होने की प्रकिया को कहा जाता है जिसमें यूजर द्वारा इनपुट डाटा को सूचना में परिवर्तन किया जाता है प्रोसेसिंग की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार होती है –
  1. सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट क्या है?
  2. कंप्यूटर में बूटिंग क्या होती है?

 

प्रोसेसिंग क्या होता है?

आपके द्वारा इनपुट डाटा की सभी प्रकार की गणना और तुलना अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ए. एल.यु.) में होती हैं प्रोसेसिंग से पहले प्राइमरी मेमोरी (Primary memory) में जो डाटा होता है और जो निर्देश होते हैं वह अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट में ट्रांसफर हो जाते हैं और वहां पर उनकी प्रोसेसिंग का कार्य होता है Arithmetic logic unit (A.L.U) से जो परिणाम मिलते हैं उनको प्राइमरी मेमोरी में ट्रांसफर कर दिया जाता है और प्रोसेसिंग समाप्त होने के बाद में प्राइमरी मेमोरी (Primary memory) में जो डाटा बचता है या अंतिम परिणाम बचते हैं वह एक आउटपुट डिवाइस (Output device) के माध्यम से आप तक पहुंचा दिए जाते हैं

कैसे और क्‍या काम करता है कंट्रोल यूनिट?

इस सारी प्रोसेसिंग की प्रक्रिया को कंट्रोल करता है कंट्रोल यूनिट यानी इनपुट डिवाइस को डाटा कहां से लेना है उसको स्टोरेज डिवाइस में कब डालना है एलयू को एक बार डेटा कब लेना है और डेटा का क्या करना है और अंतिम परिणाम को आउटपुट डिवाइस तक कैसे भेजना है

यह सारे काम कंप्यूटर सिस्टम के कंट्रोल यूनिट (CU) से ही संभव होते हैं वह प्रोग्राम निर्देशों को सेलेक्ट करता है उनका समझता है तथा कंट्रोल यूनिट पूरी सिस्टम की कार्यप्रणाली को निर्देशित करने का काम करता है और प्रोग्राम का पालन करने में सक्षम होता है.यानी सोचने का काम करता है अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट और प्रोग्रामर द्वारा सभी प्रोग्राम्स में जो निर्देश दिए जाते हैं , उन सभी निर्देशों का पालन कराने का काम करता है कंट्रोल यूनिट, कंट्रोल यूनिट मेन मेमोरी में स्‍टोर किए गए सारे प्रोग्राम से निर्देशों को प्राप्त करता है

उन निर्देशों का अर्थ करता है और उनको इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल्स में कंवर्ट कर देता है जो सिस्टम के अन्य यूनिट को उनके कार्यों को करने के लिए सक्रिय करता है. वास्तव में कम्प्यूटर एक सिस्टम है . सिस्टम , विभिन्न Component  का एक समूह होता है . जो आपस में एक दुसरे से मिलकर किसी विशेष कार्य को पूरा करते है 


 कम्प्यूटर सिस्टम के निम्नलिखित Component  है:-

 
01.इनपुट यूनिट (Input Unit)
02.स्टोरेज यूनिट (Storage Unit)
03.आउटपुट यूनिट (Output Unit)
04.आउटपुट यूनिट (Output Unit)
 
Input Unit:– यूजर से डाटा और इंस्ट्रक्शन को ग्रहण कर , उन्हें प्रोसेस करने के लिए प्रोसेसिंग यूनिट को भेज देता है . प्रोसेसिंग यूनिट इंस्ट्रक्शन के आधार पर डाटा का प्रोसेस करता है. सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट-इंस्ट्रक्शन के आधार पर डाटा प्रोसेसर कर परिणाम को आउटपुट यूनिट को भेज देता है . डाटा को प्रोसेस करने से पूर्व प्रोसेसिंग यूनिट यह भी निर्णय लेता है कि कौन – सी इंस्ट्रक्शन अरिथमेटिक यूनिट द्वारा तथा कौन सी इंस्ट्रक्शन लॉजिकल यूनिट द्वारा सम्पादित होगी .डाटा की प्रोसेसिंग होने के बाद प्रोसेसिंग यूनिट आउटपुट को निर्दिष्ट आउपुट डिवाइस पर भेज देता है
 
Storage Unit:– इसके अंतर्गत दो प्रकार के स्टोरेज आते है – स्थायी स्टोरेज तथा स्थायीय अथवा तात्कालिक स्टोरेज . स्थायीय स्टोरेज केअंतगर्त वे उपकरण आतें है जीन पर डाटा और प्रोग्राम स्थायी तौर पर स्टोर किया जाता है जबकि अस्थाई अथवा तात्कालिक स्टोरेज के अंतर्गत कंप्यूटर की मुख्य स्मृति  आती है जिसमें सीपीयू प्रोसेसिंग से पूर्व इनपुट यूनिट द्वारा भेजे गये डाटा और इंस्ट्रक्शनतथा प्रोसेसिंग के दौरान इंटरमिडीएट रिजल्ट को तात्कालिक तौर पर स्टोर करके रखता है . परन्तु शाधारणतः स्टोरेज यूनिट के लिए स्थायीय स्टोरेज का प्रयोग किया जाता है
 
Output Unit:– प्रोसेस हुए डाटा अर्ताथ इन्फोमेशन को प्रदर्शित करता है जो सीपीयू द्वारा भेजा जाता है। जब इन्फोर्मेशन मोनिटर अर्ताथ कंप्यूटर स्क्रीन पर प्रदर्शित होता है तो उसे इन्फॉर्मेशन की सॉफ्ट कापी कहते है। तथा जब इन्फोर्मेशन प्रिंटर द्वारा पेपर पर प्रिंट होती है तो उसे इन्फोर्मेशन की हार्डकॉपी कहते है .उपर्युक्त चर्चा से यह स्श्पष्ट है की कम्प्यूटर सिस्टम द्वारा निम्नलिखित पाच आपरेशन सम्पादित किये जाते है –
 
  1. इनपुटिंग (Inputting)
  2. स्टोरिंग (Storing)
  3. प्रोसेसिंग (Processing)
  4. आउटपुटिंग (Outputting)
  5. कंट्रोलिंग (Controlling)

 

Inputting:– हम जिस किसी भी Device के द्वारा कंप्यूटर या personal कंप्यूटर में कुछ भी Input करते हैं. उसे Input device कहा जाता है. इसके कुछ उदहारण हैं Keyboard, Mouse, Scanner, microphone, Light Pen.
Storing:- यह एक तरह का हार्डवेयर होता है जो की डाटा को स्टोर, पोर्ट और लेने के काम मे आता है। यह जानकारी को अस्थायी रूप से और स्थायी रूप से रखने का काम करता है। यह किसी भी तरह का हार्डवेयर हो सकता है चाहे यह कम्प्युटर के अंदर लगता हो या फिर बाहर।
Processing:– यह सभी अंकगणितीय गणना करता है, ALU चिप CPU का एक स्मार्ट हिस्सा है जो संपूर्ण अंकगणित और तर्क कार्य करता है जैसे कि जोड़ना, घटाना, गुणा करना और विभाजन करना।
 
Outputting:– आउटपुट डिवाइस वो डिवाइस होती है जो कंप्यूटर के इनपुट डिवाइस द्वारा दिए गये निर्देशों को प्रोसेसिंग होने के बाद जिस डिवाइस में उसका परिणाम हार्डकापी के रूप में (प्रिंटर) या सॉफ्ट कॉपी (मॉनिटर) दीखता अर्थात प्रदान करता है वह आउटपुट डिवाइस कहलाता है।
 
Controlling: कंट्रोलिंग का कार्य कंट्रोल यूनिट अर्ताथ CU द्वारा किया जाता है
 
Control Unit

MEMORY UNIT

मैमोरी डाटा, निर्देशों और परिणामों के आउटपुट को संग्रह करके रखती है । यह कंप्युटर का महत्वपूर्ण भाग है, जहाँ डाटा तथा प्रोगाम, प्रक्रिया के दौरान िस्थत रहते हैं और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत उपलब्ध होते हैं । मैमोरी को प्रथमिकता या मेन मैमोरी (Main Memory) भी कहते हैं ।
कंप्युटर की मैमोरी Cells या Location में विभाजित होती है । प्रत्येक Cell का अपना एक Address होता है जिसके द्वारा हम उसको Refer करते हैं । मैमोरी की क्षमता 4 MB से लेकर 256 MB या इससे भी अधिक हो सकती है । कंप्युटर की मेन मैमोरी निम्नलिखित दो प्रकार की होती है-
  1. रैम या रेंडम एक्सेस मैमोरी (Ram-Random-Access-Memory)
  2. रोम या रीड ओनली मैमोरी (Rom-Read-Only-Memory)

 

Peripheral

इनपुट डिवाइसेस, आउटपुट डिवाइसेस और सेकेन्डरी स्टोरेज डिस्क, टेप, फ्लॉपी आदि को पेरीफेरल्स (Peripherals) कहा जाता है।
Input Devices:- वे उपकरण या डिवाइसेस (Devices), जिनकी सहायता से हम डाटा एंव निर्देश कंप्युटर को प्रेषित करते है, इनपुट डिवाइसेस (Input Devices) कहलाती हैं । इनपुट डिवाइसेस कंप्युटर एंव मानव के मध्य संपर्क (Communication) की सुविधा प्रदान करती है । इनपुट डिवाइसेस डाटा और निर्देशों को  कंप्युटर के समझाने योग्य संकेतों (1 और 0 के bit) में परिवर्तित करके कंप्युटर को प्रेषित करती हैं । इनपुट डिवाइसेस (Input Devices) के मुख्य उदाहरण निम्न प्रकार हैं-की-बोर्ड, माउस, जॉइस्टिक, ट्रैक बाल, लाइट पेन, टच स्क्रीन, ग्राफिक टेबलेट, स्कैनर ।
Output Devices:- आउटपुट डिवाइसेस के द्वारा कंप्युटर से प्राप्त किया जाता है । इन परिणामों को प्रायः डिस्प्ले डिवाइसेस (स्क्रीन) या प्रिंटर के द्वारा यूजर को प्रस्तुत किया जाता है । कुछ महत्वपूर्ण आउटपुट डिवाइसेस निम्नलिखित हैं- मॉनीटर, प्रिंटर, प्लॉटर, स्पीकर । मॉनीटर में एक टी. वी. के समान कैथोड रे ट्यूब (Cathod re Tube-crt) होती है । मॉनीटर के द्वारा हम प्रोगाम की सॉफ्ट कॉपी (soft copy) देख सकते हैं तथा प्रिंटर से उसकी हार्ड कॉपी (Hard copy) प्राप्त कर सकते है ।

Computer Software

कंप्युटर में किसी निश्चित कार्य को सम्पन्न करने के लिए कंप्युटर को दिये जाने वाले निर्देशों के समूह को प्रोगाम कहते है । ये प्रोगाम (program) कंप्युटर भाषा में कंप्युटर प्रोगामर द्वारा तैयार किये जाते हैं तथा इन प्रोग्रामों के समूह को सॉफ्टवेयर कहते हैं । सॉफ्टवेयर ना तो देखे जा सकते है और ना ही इन्हें छुआ जा सकता है । कंप्युटर सॉफ्टवेयर मानव और हार्डवेयर के मध्य संपर्क स्थापित करता है । कंप्युटर सॉफ्टवेयर निम्न प्रकार के होते हैं-
  1. सिस्टम सॉफ्टवेयर  (System Software)
  2. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software)
  3. यूटिलिटी सॉफ्टवेयर (Utility Software)
सिस्टम  सॉफ्टवेयर के उदाहरण ऑपरेटिंग सिस्टम तथा Translator हैं तथा एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के उदाहरण एमएस-वर्ड, एमएस-इक्सेल, पॉवर-पॉइंट, कोरल-ड्रॉ, टेली आदि हैं ।

BINARY CODE

यह एक कोडिंग प्रणाली  जिसमें 0 एंव 1 का प्रयोग किया जाता है. 0 का अर्थ है बंद करना एवं 1 का अर्थ है- चालू करना।कंप्यूटर इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स का उपयोग करता हैं, जो ऑन या ऑफ होता हैं। इसलिए उन्हें बाइनरी नंबर की एक सीरीज के रूप में दिखता हैं। यह डेटा 1s और 0s (on और off) के अनुक्रम के रूप में दर्शाया गया है।
सभी डेटा जो हम कंप्यूटर को प्रोसेस करना चाहते हैं, उन्हें इस बाइनरी फॉर्मेट में कनवर्ट करना होगा।जब कि बाइनरी नंबर को Boolean लॉजिक में True (1) या False (0) को रिप्रेजेंट करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, कई बाइनरी डिजिट को बड़ी संख्या स्‍टोर करने और काम्प्लेक्स फंक्‍शन करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता। वास्तव में, कोई भी नंबर को बाइनरी में रिप्रेजेंट किया जा सकता है।

बाइनरी कैसे काम करता है?

बाइनरी में 0s और 1s को क्रमशः OFF या ON को रिप्रेजेंट करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह OFF या ON इलेक्ट्रिक सिग्‍नल को ऑन या ऑफ को दर्शाता हैं।Decimal (Base 10) नंबर सिस्‍टम में प्रत्येक स्थान वैल्‍यू के लिए दस संभव वैल्‍यू (0,1,2,3,4,5,6,7,8, या 9) हैं। इसके विपरीत binary(Base 2) नंबर सिस्‍टम के पास दो संभावित वैल्‍यू को प्रत्येक प्‍लेस-वैल्‍यू के लिए 0 या 1 के रूप में दर्शाया गया है।
बाइनरी सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर की इंटरनल लैग्‍वेज है, इसलिए कंप्यूटर प्रोग्रामर को समझना चाहिए कि कैसे डेसिमल से बाइनरी में कन्‍वर्ट किया जाता है।वैसे तो Decimal को Binary में कन्‍वर्ट करने के लिए कई मेथड हैं, लेकिन इनमें आसान मेथड हैं- Decimal नंबर को 2 से डिवाइड करना और Remainder से Binary बनाना।

BIT

बिट स्टोरेज की इकाई है.Bit डाटा की सबसे छोटी इकाई होती है। जिसका इस्तेमाल कंप्यूटर में किया जाता है। यह 2 तरह से ही जानकारी को Save कर सकती है जैसे – On Or Off (0 Or 1) यहाँ पर 2 Value हो सकती है पहली है 0 (Zero) और दूसरी है One (1) यह कंप्यूटर की Basic Unit होती है।
विंडोज xp या 7 में माय कंप्‍यूटर आयकन पर राइट क्लिक करें और प्रॉपर्टीज मेनू दबाएं। अब खुलने वाली स्क्रीन पर ऑपरेटिंग सिस्टम का सिस्टम टाइप देख्‍ािये। वहाॅ आपको पता चलेगा कि आपका सिस्‍टम 32 बिट का है या 64 बिट का।
1 बाइट = 8  विट्स
BIT

CHIP

चिप कंप्यूटर का एक इलेक्ट्रॉनिक अंग होता है. इसमें हजारों परिपथ(Circuits) होते हैं. इसे ट्रांजिस्टर (Transistors), संधारित्र (Capacitors), प्रतिरोधक (Resistors), आदि उपस्थित होते हैं। कंप्यूटर में प्रयोग होने वाला चिप किसी अर्द्धचालक पदार्थ का बना होता है। ये बहुत पतला तथा छोटा सा अधिकतर सिलिकॉन धातु का बना एक टुकड़ा होता है जो कि सभी कंप्यूटरीकृत यंत्रो के संचालन का आधार होता है।
कंप्यूटर में प्रयोग होने वाला चिप किसी अर्द्धचालक पदार्थ का बना होता है। ये बहुत पतला तथा छोटा सा अधिकतर सिलिकॉन धातु का बना एक टुकड़ा होता है जो कि सभी कंप्यूटरीकृत यंत्रो के संचालन का आधार होता है। इस चिप का स्वरूप काफ़ी छोटे जो कि हमारे स्मार्टफोन में प्रयोग होता है, से लेकर एक पर्सनल कंप्यूटर या सुपर कंप्यूटर में प्रयोग होने वाले काफ़ी बड़े आकार तक का होता है। प्रारम्भ में जब चिप का अविष्कार किया गया था तब ये बहुत बड़े आकार के हुआ करते थे लेकिन समय के साथ जैसे -जैसे कंप्यूटर के आकार छोटे होते गए उसी तरह चिप भी अब काफ़ी छोटे आकार में आने लगे है।

कंप्यूटर में चिप का क्या काम होता है?

किसी भी कंप्यूटर या स्मार्टफोन की कल्पना भी चिप के बिना असंभव है। चिप के बिना ये सभी यंत्र मात्र एक खाली डिब्बे जैसे है। चिप के कारण ही ये सभी यंत्र डेटा का संग्रह रख पाते है और फिर उसी के अनुसार हमारे दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करते है। चिप हमारे स्मार्टफोन तथा कंप्यूटर में सभी तरह के डेटा और जानकारियों का संग्रह अपने पास रखताहै।
 
कंप्यूटर चिप की इकाई:-
 
  1. 8 बिट = 1 बाईट
  2. 1 Kb (किलो बाईट) =1024 b (बाईट)
  3. 1 mb (मेगा बाईट) = 1024 kb (किलो बाईट)
  4. 1 gb (गीगा बाईट) = 1024 mb (मेगा बाईट)
  5. 1 tb (टैरा बाईट) =1024 gb (गीगा बाईट)
  6. 1 pb (पेटा बाईट) = 1024 tb (टेरा बाईट)

 

CHIP

MODEM 

मॉडेम यह एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। इसका प्रयोग डाटा को एक कंप्युटर से दूसरे कंप्युटर तक पहुँचाने के लिए किया जाता है । यह टेलीफोन लाइन द्वारा कार्य करता है। मॉडेम का प्रयोग हम डिजिटल संकेतों को एनालॉग संकेतों में परिवर्तित करने के लिए करते हैं जो मॉडुलेटर और  डी-मॉडुलेटर का संक्षिप्त रूप है । इस एनालॉग को हम संकेतों में परिवर्तित करते हैं। इस प्रकार से मॉडेम दो या दो से अधिक कंप्युटरों में मध्यस्थ का कार्य करता है। जब कंप्युटर नेटवर्क या इंटरनेट से जुड़ा होता है तो उस परिस्थिति में मॉडेम आकड़ों के संचारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । इसलिए मॉडेम खरीदते समय हमेशा इसकी गति का ध्यान रखना चाहिए । क्योंकि तेज गति वाला मॉडम खरीदने से धन और समय दोनों की बचत होती है ।
 
मॉडेम एक नेटवर्क हार्डवेयर डिवाइस है जो किसी कंप्यूटर को एक टेलिफोन लाइन या केबल या सैटेलाइट कनेक्शन पर डेटा भेजने और प्राप्त करने की अनुमति देता है, जिससे डिजिटल डेटा को फोन लाइन पर उपयोग किए गए एनालॉग सिग्नल में कन्‍वर्ट किया जा सकता है।Modem शब्द दों शब्दों Modulator के “MO” और Demodulator के “Dem” से मिलकर बना है, जो इसकी कार्यप्रणाली को दर्शाता है, Modem का प्रयोग कंप्यूटर को Telephone या Cable से डाटा भेजने के लिए किया जाता हैं| यह एक प्रकार का हार्डवेयर डिवाइस है जो एनालॉग और डिजिटल डेटा के बीच वास्तविक समय में दो-तरफा नेटवर्क संचार के लिए परिवर्तित होता है। यह कंप्यूटर या राउटर को ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ता है।
 

मॉडेम की कार्यप्रणाली

डिजिटल सिग्नल, एनालॉग फोन लाइन पर ट्रांसमिट नहीं हो सकते हैं इसलिए डिजिटल सिगनल्स को एनालॉग सिगनल्स में परिवर्तित किया जाता है यह क्रिया ‘Modulation’ कहलाती है इसी प्रकार एनालॉग सिगनल्स डिजिटल माध्यम पर ट्रांसमिट नहीं हो सकते हैं इसलिए एनालॉग सिगनल्स को डिजिटल सिगनल्स में परिवर्तित किया जाता है यह क्रिया ‘Demodulation’ कहलाती है Modulation और Demodulation इन दोनों क्रियाओं को करने वाला एक डिवाइस होता है जिसे मॉडेम कहते हैं मॉडेम Modulation तथा Demodulation का संक्षिप्त रूप है| मोडेम की गति को बीपीएस (bps) और केबीपीएस (Kbps) में मापा जाता है।
जब ट्रांसमिट डाटा सिग्नल कम शक्तिशाली होता है तब भी मॉडेम उपयोगी होता है क्योंकि दूर स्थित स्थानों तक डाटा ट्रांसमिशन के लिए डाटा सिगनल्स की गति मॉडेम द्वारा निर्धारित की जाती है| यह ट्रांसमिशन से पूर्व डाटा सिगनल्स की गति को बढ़ा देता है। आजकल फाइबर ऑप्टिक मॉडेम भी उपलब्ध है जो डिजिटल सिगनल्स को प्रकाशीय सिगनल्स में परिवर्तित कर सकते हैं जिससे फाइबर ऑप्टिक केबल्स में डेटा का ट्रांसमिशन किया जा सकता है AT&T द्वारा लांच किए गए मॉडेम का नाम data sets है। माइक्रो कंप्यूटर के लिए मॉडेम का डाटा ट्रांसफर रेट 300, 1200, 2400, 4800, और 9600 बिट्स प्रति सेकंड होती है बाजार में इससे अधिक गति के मॉडेम भी उपलब्ध है।

मॉडेम कितने प्रकार के होते हैं?

Modem के कार्यों को आपने समझ लिया। अब हम आपको Modem Types बताएँगे की Modem कितने प्रकार के होते है:-
 
 
Broadband Modem:- Broadband qModem कोHigh Speed Modem के रूप में जाना जाता है, Dsl या Cable Internet Access के लिए उपयोग किये जाने वाले Broadband Modem Traditional Dial Up की तुलना में High Speed हासिल करने के लिए Advance Signaling Technique का Use करते है। कुछ Broadband Routers में एक Hardware Intigrated Modem शामिल होता है।
Dial-up Modem:- Dial-up Modem को Local Telephone Line का पूरा उपयोग करने की आवश्यकता होती है, जिसका मतलब यह है कि एक बार में आप या तो Internet चला सकते हैं या Voice Call कर सकते हैं।
Dial Up Network, Traditional Modem, Telephone Lines पर Use किए गए Analog Form और Computer पर इस्तेमाल किए जाने वाले Digital Form के बीच Data Convert करते हैं।
Removable Modem:- Removable Modem पुराने Laptop Pcmcia Slot के साथ उपयोग किया जाता है और जरूरत के अनुसार इसे जोड़ा या हटाया भी जा सकता है।
On board Modem:- On board Modem Motherboard पर निर्मित Modem है, इस Modem को हटाया नहीं जा सकता है, लेकिन एक Jumper या Cmos (Cmos Setup) के माध्यम से Unable किया जा सकता है।

CD-ROM

इसका प्रयोग डाटा को स्टोर करने के लिए किया जाता है । इसमें 640mb से 680mb तक का डाटा स्टोर किया जा सकता है । सी.डी. रोम एक ऐसी डिस्क है, जिसमें कंप्युटर प्रोगाम रखे जाते हैं। सी.डी. रोम ऑडियों (Audio) और वीडियो (Video) के लिए भी प्रयोग होता है। हमारे कंप्युटर में सी.डी. रोम ड्राइव का होना आवश्यक है। सी.डी. रोम ड्राइव एक ऐसा यंत्र है जो सी.डी. रोम चलता है । सी.डी. रोम ड्राइव में सी.डी.-रोम डालकर कंप्युटर पर फिल्म भी देख सकते हैं ।
  
CD-ROM

HARD DISK DRIVE

 कंप्यूटर में हार्ड डिस्क ड्राइव मुख्य, और आमतौर पर सबसे बड़ा, डेटा स्टोरेज हार्डवेयर डिवाइस होता है।हार्ड डिस्क को Hard drive, HD, या HDD के रूप में भी जाना जाता हैं। यह एक नॉन- वोलेटाइल मेमोरी हार्डवेयर डिवाइस हैं जो कंप्यूटर पर डेटा को परमानेंटली स्‍टोर और रिट्रीव करता है।म्‍युजिक, वीडियो, टेक्स्ट डयॉक्‍युमेंटस्, और बनाई गई या डाउनलोड की गई किसी भी फ़ाइल सहित किसी भी टाइप के डेटा को स्टोर करने के लिए हार्ड ड्राइव का उपयोग किया जा सकता है।साथ ही, हार्ड ड्राइव कंप्यूटर पर रन हो रहे ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ़्टवेयर प्रोग्राम के लिए फ़ाइलों को भी स्‍टोर करता है।
हार्ड ड्राइव आमतौर पर किसी भी अन्य ड्राइव की तुलना में अधिक डेटा स्टोर करने में सक्षम है, लेकिन इसकी साइज और उसकी उम्र के प्रकार के आधार पर भिन्न हो सकता है। पुराने हार्ड ड्राइव में कई सौ megabytes (MB) से gigabytes (GB) कि स्‍टोरेज साइज होती थी।नए हार्ड ड्राइव में कई सौ gigabytes (GB) से कई terabytes (TB) कि स्‍टोरेज कैपेसिटी होती है। हर साल, नई और बेहतर तकनीक से हार्ड ड्राइव स्‍टोरेज साइज बढ़ रही है।आज आमतौर पर डेस्‍कटॉप पीसी या लैपटॉप में 160GB, 250GB, 500GB, 1TB और 2TB स्‍टोरेज साइज कि हार्ड डिस्‍क होती हैं।

 हार्ड डिस्क ड्राइव कैसे काम करता है?

रैम जैसे volatile स्‍टोरेज के विपरीत, हार्ड ड्राइव अपने डेटा को पॉवर ऑफ होने पर भी स्‍टोर करती है। यही कारण है कि जब आप अपने कंप्यूटर को रिस्‍टार्ट करते हैं, तो आपको अपने सभी डेटा का एक्‍सेस मिल जाता है।
हार्ड ड्राइव को पूरी तरह से समझने के लिए आपको यह जानना होगा कि यह फिजिकली कैसे काम करती है। असल में, इसमें डिस्क होते हैं, जो एक के ऊपर दूसरे कुछ मिलीमीटर पर रखे होते हैं। इन डिस्क को platters कहा जाता है।
इन platters को इस तरह से पॉलिश किया जाता है ताकि वे हाई मिरर शाइन और अविश्वसनीय रूप से चिकने बन जाए जो बड़ी मात्रा में डेटा को स्‍टोर कर सकते हैं।इसके बाद इसमे एक आर्म होता है, जो platters के ऊपर और नीचे लगे होते हैं। यह डिस्क पर डेटा को राइट और रिड करता है। यह प्लेटर पर फैला हुआ होता है और इसके सेंटर एज़ से प्लेटर पर मूव करता हैं।
इसके एक छोर पर लगे हेड से यह प्लेटर पर डेटा को Read/Write करता है।औसत डोमेस्टिक ड्राइव में यह आर्म प्रति सेकंड लगभग 50 बार हिलता है।हार्ड ड्राइव पुराने कैसेट टेप की तरह इनफॉर्मेशन स्टोर करने के लिए मैग्नटिज़म का उपयोग करते हैं। इसी कारण से, कॉपर हेड का उपयोग किया जाता है क्योंकि उन्हें आसानी से मैग्नटाइज़ किया जा सकता हैं।
HARD DISK DRIVE

MOTHER BOARD

यह एक तरह से कम्प्यूटर की बुनियाद है.कम्प्यूटर का प्रोसेसर, विभिन्न प्रकार के कार्ड जैसे डिस्प्ले कार्ड, साउंड कार्ड आदि मदरबोर्ड पर ही स्थापित किये जाते हैं.मदरबोर्ड एक Printed Circuit Board (PCB) होता है।
मदरबोर्ड कम्प्युटर का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है. जिसमे सभी आवश्यक उपकरण जुडे रहते हैं. इनमें CPU, RAM, HDD, Monitor, BIOS, CMOS, Mouse, Keyboard आदि उपकरण शामिल है जो Dedicated Ports के माध्यम से जुडे रहते हैं।

 

Peripheral

पैरिफैरल्स हार्डवेयर के वह इलेक्ट्रो-मैकनिकल भाग हैं जो सीपीयू में बाहर से जोड़े जाते हैं. ये सीपीयू को प्रोग्राम्ड निर्देश या आंकड़े उपलब्ध कराते हैं और सीपीयू द्वारा प्रोसेस्ड जानकारी को ग्रहण करते हैं. पैरिफैरल्स को भी अलग अलग श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है।

 

Computer Hardware 

हमने जाना कि पैरिफैरल्स (Peripherals) हार्डवेयर के वह इलेक्ट्रो-मैकनिकल भाग हैं जो सीपीयू में बाहर से जोड़े जाते हैं. ये सीपीयू को प्रोग्राम्ड निर्देश या आंकड़े उपलब्ध कराते हैं और सीपीयू द्वारा प्रोसेस्ड जानकारी को ग्रहण करते हैं. पैरिफैरल्स को मुख्यत: दो भागों में बांटा जा सकता है।
  1. इनपुट डिवाइस (Input Device)
  2. आउटपुट डिवाइस (Output Device)

इनपुट डिवाइस (Input Device)-जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है कि यह वह डिवाइस है जिनके द्वारा हम कम्प्यूटर को निर्देश देते हैं. इनसे संदेश लेकर कम्प्यूटर उन पर प्रोग्राम के अनुरूप काम करता है. जैसे कि की-बोर्ड,माउस,जॉय स्टिक,माइक्रोफोन आदि।
आउटपुट डिवाइस (Output Device)-जिस प्रकार इनपुट डिवाइस प्रयोक्ता (User) से निर्देश लेने के लिये काम आती है उसी प्रकार आउटपुट डिवाइस वो डिवाइस है जिनके द्वारा हम कंम्यूटर द्वारा प्रोसेस्ड जानकारी को देखते या ग्रहण करते हैं. मुख्य रूप से स्क्रीन (मॉनीटर) एवं प्रिंटर इसके उदाहरण है।

MONITER

मॉनिटर कंप्यूटर का एक आउटपुट डिवाइस है। जो एक तार के जरिए सीपीयू से जुड़ा होता है। कंप्यूटर में हमारा सारा काम सीपीयू में होता है, लेकिन उसे देखने के लिए मॉनिटर की जरुरत होती है। मॉनिटर एक विज्युअल डिस्प्ले यूनिट होता है। यह टेलीविजन की तरह दिखता है। इसका मुख्य काम सीपीयू में चल रही प्रक्रियाओं को दिखाना है।

 

मॉनिटर मुख्य रुप से तीन प्रकार के होते हैं:-
  1. CRT (Monitor)
  2. LCD (Liquid Crystal Display)
  3. LED ( Light Emitting Diode)

वहीं रंगों के आधार पर मॉनिटर को अगर वर्गीकृत किया जाए तो ये हैं उनके प्रकार:-

  1. मोनोक्रोम
  2. ग्रे-स्केल

 

MONITER

Central Processing Unit

सीपीयू का पूरा नाम सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट है। ये कंप्यूटर का मुख्य भाग होता है। क्योंकि ये कंप्यूटर से जुड़े सभी उपकरणों को नियंत्रित करता है। इसे प्रोसेसर, माइक्रोप्रोसेसर, सेंट्रल प्रोसेसर कई नामों से जाना जाता है। इसे कंप्यूर का ब्रेन भी कहते हैं।

ये कंप्यूटर के मदरबोर्ड में लगा होता है और ये यहीं से इनपुट को प्रोसेस कर के आउटपुट देता है। ये बहुत ही तेजी से काम करता है। ये लगभग 1 सेकंड में ट्रिलियन कैलकुलेशन कर सकता है । ये हैं सीपीयू के मुख्य भाग।

  1. अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (A.L.U)
  2. कंट्रोल यूनिट (C.U)
  3. मेमोरी यूनिट (M.U)

कंप्यूटर अपने आप में एक साथ काम कर रहे कई भागों की प्रणाली है, इसके मुख्य भाग निम्न है:-

  1. सिस्टम इकाई (system unit)
  2. इनपुट आउटपुट डिवाइस (input output devices)
  3. भण्डारण इकाई (storage unit)
  4. संचार (communication)


System Unit:- इसे ‘सिस्टम कैबिनेट’ भी कहा जाता है, कंप्यूटर के मुख्य भाग इसके अन्दर लगे हुए होते है, जैसे प्रोसेसर, रेम, मदरबोर्ड इत्यादि।

Storage unit:- कंप्यूटर के साथ जुडी वह मेमोरी इकाई जिसमे कंप्यूटर का सभी डाटा सहेज कर रखा जाता है, जैसे हार्ड डिस्क, सी.डी., फ्लोपी डिस्क, पेन ड्राइव, बाहरी हार्ड डिस्क, डी.वी.डी. इत्यादि।

Communication:- किसी कंप्यूटर को अन्य कंप्यूटर और इंटरनेट से जोड़ने के लिए प्रयोग में आने वाले यंत्र इस श्रेणी में आते है, जैसे मॉडेम, वाई फाई रिसीवर इत्यादि।

Input Output Device:- कंप्यूटर के प्रयोगकर्ता से इनपुट लेने और उसे आउटपुट दिखाने के लिए प्रयोग होने वाले यंत्र इस श्रेणी में आते है, जैसे कीबोर्ड, माउस, टचपेड, स्कैनर, मॉनिटर, प्रिंटर इत्यादि।

Central Processing Unit

KeyBoard

की-बोर्ड एक इनपुट डिवाइस है। ये डाटा को इनपुट करने का काम करता है। इसका उपयोग कंप्यूटर को निर्देश देने के लिए किया जाता है। इसकी मदद से हम लिखने का काम करते हैं, ना सिर्फ लिखने बल्कि कंप्यूटर को नियंत्रित करने के लिए भी कीबोर्ड का इस्तेमाल किया जाता है। कंप्यूटर कीबोर्ड की बनावट एक टाइपराइटर की तरह ही होती है। कीबोर्ड को उसके काम के आधार पर छह भागों में बांटा गया है:-
  1. फंक्शन की (Function Keys)
  2. टाइपिंग की (Typing Keys)
  3. कंट्रोल की (Control Keys)
  4. नेविगेशन की (Navigation Keys)
  5. इंडिकेटर लाइट्स (Indicator Lights)
  6. न्यूमेरिक की (Numeric Keyboard)

 

की-बोर्ड कंप्युटर का सबसे तेज महत्वपूर्ण और आवश्यक पेरिफेरल है की बोर्ड, जो कंप्युटर में शब्दों और संख्याओं की प्रवष्टि के लिए प्रयुक्त होता है। यह इलेक्ट्रॉनिक टाइपराइटर के की बोर्ड की भांति होता है, परंतु इसमें कुछ अतिरिक्त कीज भी होती हैं । एक आधुनिक की बोर्ड में 104 कीज होता हैं ।
KeyBoard

Mouse

अपने नाम के अनुसार ही कंप्यूटर का माउस दिखने में चूहे के समान ही होता है। यह कंप्यूटर का इनपुट डिवाइस है। इसका इस्तेमाल मुख्य रुप से मॉनिटर पर आइटम को चुनने, उसे खोलने और बंद करने में किया जाता है। माउस के जरिए भी हम कंप्यूटर को निर्देश देते हैं।
माउस का इस्तेमाल उसे मूव करके किया जाता है। माउस में मुख्य रुप से तीन बटन होते हैं। लेफ्ट की(Left Key), राइट की(Right Key) और स्क्रॉल की (Scroll key)। लेफ्ट की का इस्तेमाल ऑब्जेक्ट को चुनने, राइटर की उपयोग विकल्प के लिए और स्क्रॉल की का प्रयोग पेज को स्क्रॉल करने के लिए किया जाता है।
Mouse

Speaker

स्पीकर की सहायता से हम ध्वनि को सुन सकते हैं। यह कंप्युटर में भंडारित एलेक्ट्रॉनिक तंरगों को आवाज में परिवर्तित करता हैं ।इसके इस्तेमाल से हम किसी प्रकार की ध्वनि सुनते है। स्पीकर ध्वनि के रूप में आउटपुट की सॉफ्ट कॉपी प्रस्तुत करता है। यह एक आउटपुट और हार्डवेयर डिवाइस है। जिसमें कंप्यूटर से साउंड जनरेट होता है।
साउंड कार्ड कंप्यूटर का एक कॉम्पोनेन्ट होता है यह कॉम्पोनेन्ट कंप्यूटर स्पीकर से जो Sound Produce होता है उसे जनरेट करता है। इन्हें कंप्यूटर के साथ जोड़कर आप कंप्यूटर की ऑडियो साउंड सुन सकते है।कंप्यूटर से जुड़े सीडी/डीवीडी में जो ऑडियो सेव होती है वह उनसे इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को लेता है और उन्हें ऑडियो में बदल देता है।
 

स्पीकर का सबसे ज़रुरी काम होता है की वह इलेक्ट्रोमेग्नेटिक वेव को साउंड वेव में बदलता है। स्पीकर में आगे की तरफ एक गोल आकार का Cone होता है जो पेपर, प्लास्टिक या किसी हल्के मेटल का बना हुआ होता है। इसके पीछे एक Iron Coil लगी होती है।

यह परमानेंट मैगनेट के बिल्कुल आगे होती है।जब स्पीकर की Coil को एम्पलीफायर से जोड़ा जाता है और उसको पॉवर दी जाती है तो इलेक्ट्रोमेग्नेटिक फ़ील्ड जनरेट होता है। जिससे वह Coil को अपनी तरफ खींचता है। और उसे एम्पलीफायर के सिग्नल के अनुसार बार-बार छोड़ता है। जिससे Coil के वाइब्रेशन से साउंड जनरेट होती है।

Speaker

Microphone

माइक्रोफोन आवाज को एलेक्ट्रॉनिक तरंगों मे बदलने का कार्य करता है जो की तारों या केबलों द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाई जा सकती है । माइक्रोफोन को हम माइक भी कहते है । Microphone ऐसी युक्ति होती है जो sound vibration को इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल में परिवर्तित करता है.Microphone ध्वनि को विद्युत उर्जा में परिवर्तित करता है जिसे फिर इलेक्ट्रॉनिक एम्पलीफायर और ऑडियो प्रोसेसिंग सिस्टम द्वारा process किया जाता है।
Microphone

Scanner

स्कैनर एक फोटोकॉपी की मशीन की तरह काम करता है जो तस्वीरों और फोटो की कंप्युटर में सीधी नकल करने के काम आता है ।स्कैनर (Scanner) एक इनपुट डिवाइस है। कंप्यूटर डाटा या इन्फॉर्मेशन को डिजिटल में लेता है। इसलिए इमेज, डॉक्यूमेंट, टेक्स्ट इत्यादि को Scanner डिजिटल Format में Convert करके Computer में सेव करता है। स्कैनर की सहायता डाटा को अपलोड करना आसान होता है।
स्कैनर दो तरह के होते हैं-
  1. हैंड हेल्ड स्कैनर (Hand Held Scanner)
  2. फ्लैटबेड स्कैनर (Flat Held Scanner)।


Hand Held Scanner:- यह एक ऐसा छोटा यंत्र है, जिसे हम एक साथ से पकड़ सकते हैं। यह एक पेपर से कंप्युटर पर तस्वीर उतारने के काम आता है। यह तभी प्रयोग में लाया जा सकता है, जब हमें छोटी तस्वीरें, हस्ताक्षर या लोगों की नकल कंप्युटर पर लेनी होती है ।

Flat Held Scanner:- यह स्कैनर एक ही बार में पूरे पेज की नकल करने का काम कर सकता है । फ्लैटबेड स्कैनर आकार में बड़ा होता है और हैंड हेल्ड की अपेक्षा अधिक महंगा होता हैं ।

OCR:- OCR की फुल फॉर्म “Optical Character Recognition” है। पेपर पर प्रिंट किये हुए डाटा को ओसीआर आसानी से पढ़ लेता है। पासपोर्ट क्लियर करने में OCR का उपयोग है।

OMR:- OMR की फुल फॉर्म “Optical Mark Recognition” है। उत्तर पुस्तिका की जांच करने में ओएमआर का उपयोग किया जाता है।

BCR:- इस प्रकार का स्कैनर बार कॉड को रीड करने में काम आता है । प्रोडक्ट पर बार कोड आता है जिस पर उस प्रोडक्ट की जानकारी होती है।

MICR:- इस प्रकार के स्कैनर का उपयोग मैग्नेटिक कैरेक्टर को पढ़ने में होता है। बैंकों में चेक क्लियर करने में MICR का कार्य है। ये सभी कंप्यूटर Scanner है लेकिन एक बायोमेट्रिक स्कैनर भी होता है। इसके द्वारा फिंगरप्रिंट को स्कैन किया जाता है।

 

स्कैनर के उपयोग 

आमतौर पर आप परीक्षाओं के फॉर्म ऑनलाइन Fill Up करते हो। ऑनलाइन फॉर्म के लिए आवश्यक सभी डाक्यूमेंट्स जैसे कि फ़ोटो, मार्कशीट, सिग्नेचर इत्यादि को ऑनलाइन अपलोड करना होता है। स्कैनर का कार्य इन सभी डॉक्यूमेंट को स्कैन करके डिजिटल में चेंज करना है।प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तर पुस्तिका के रूप में अभ्यर्थियों को ओएमआर शीट दी जाती है।

इस OMR शीट की जांच OMR स्कैनर के द्वारा करते हैं। पुस्तकों को ऑनलाइन अपलोड करने के लिए Scanner का उपयोग किया जाता है। ई बुक के माध्यम से हम ऑनलाइन लर्निंग करते है। यह स्कैनर से सम्भव हुआ है।वर्तमान में स्कैनर All In One आता है। इसका आशय यह है कि MFD (Multi Functional Device) डिवाइस का उपयोग होता है जिसमें Scanner, प्रिंटर, फोटोकॉपी तीनो होते है। स्कैन की हुई इमेज मूल इमेज से क्वालिटी में कम होती है। आपके स्मार्टफोन का कैमरा भी एक Scanner की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

Scanner
 

Printer

प्रिंटर एक ऑनलाइन आउटपुट डिवाइस (Online Output Device) है जो कंप्यूटर से प्राप्त जानकारी को कागज पर छापता है कागज पर आउटपुट (Output) की यह प्रतिलिपि हार्ड कॉपी (Hard Copy) कहलाती है कंप्यूटर से जानकारी का आउटपुट (Output) बहुत तेजी से मिलता है और प्रिंटर (Printer) इतनी तेजी से कार्य नहीं कर पाता इसलिये यह आवश्यकता महसूस की गयी कि जानकारियों को प्रिंटर (Printer) में ही स्टोर (Store) किया जा सके इसलिये प्रिंटर (Printer) में भी एक मेमोरी (Memory) होती है जहाँ से यह परिणामों को धीरे-धीरे प्रिंट करता हैं।

 

प्रिंटर के प्रकार

Printing Method:- प्रिंटिंग (Printing) में प्रिंट करने की विधि बहुत महत्वपूर्ण कारक है प्रिंटिंग विधि (Printing Method) दो प्रकार की इम्पैक्ट प्रिंटिंग (Impact Printing)  तथा नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटिंग (Non-Impact Printing) होती है।

Impact Printing:- Impact Printer वे प्रिंटर होते हैं जो अपना Impact (प्रभाव) छोड़ते हैं जैसे टाइपराइटर प्रिंटिंग (Printing) की यह विधि टाइपराइटर (Typewriter) की विधि के समान होती है जिसमें धातु का एक हैमर (hammer) या प्रिंट हैड (Print Head) होता है जो कागज व रिबन (Ribbon) से टकराता है इम्पैक्ट प्रिंटिंग (Impact Printing) में अक्षर या कैरेक्टर्स ठोस मुद्रा अक्षरों (Solid Font) या डॉट मेट्रिक्स (Dot Matrix) विधि से कागज पर उभरते हैं Impact Printer की अनेक विधियाँ हैं। जैसे-

  1. Dot Matrix Printer
  2. Daisy Wheel Printer
  3. line Printer
  4. Chain Printer
  5. Drum Printer etc.

Dot Matrix Printer:- यह एक इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printer) है अतः यह प्रिंटिंग करते समय बहुत शोर करता हैं इस प्रिंटर के प्रिंट हैड (Print Head) में अनेक पिनो (Pins) का एक मैट्रिक्स (Matrix) होता है और प्रत्येक पिन के रिबिन (Ribbon) और कागज (Paper) पर स्पर्श से एक डॉट (Dot) छपता हैं।

अनेक डॉट मिलकर एक कैरेक्टर बनाते (Character) है प्रिंट हैड (Print Head) में 7, 9, 14, 18 या 24 पिनो (Pins) का उर्ध्वाधर समूह (Horizontal Group) होता है एक बार में एक कॉलम की पिने प्रिंट हैड (Print Head) से बाहर निकलकर डॉट्स (Dots) छापती है जिससे एक कैरेक्टर अनेक चरणों (Steps) में बनता है और लाइन की दिशा में प्रिंट हैड आगे बढ़ता जाता है।

डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर (Dot Matrix Printer) की प्रिंटिंग गति (Printing Speed) 30 से 600 कैरेक्टर प्रति सेकंड (CPS-Character Per Second) होती हैं डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर (Dot Matrix Printer) में पूर्व निर्मित मुद्रा अक्षर (Font) नहीं होते हैं इसलिये ये विभिन्न आकार-प्रकार और भाषा के कैरेक्टर (Character) ग्राफिक्स (Graphics) आदि छाप सकता हैं यह प्रिंट हैड (Print Head) की मदद से कैरेक्टर बनाते है जो की कोड (0 और 1) के रूप में मेमोरी (Memory) से प्राप्त करते है प्रिंट हैड में इलेक्ट्रॉनिक सर्किट (Electronic Circuit) मौजूद रहता है जो कैरेक्टर को डिकोड (Decode) करता हैं इस प्रिंटर की प्रिंट क्वालिटी (Quality) अच्छी नहीं होती हैं।

Daisy Wheel Printer:- यह ठोस मुद्रा अक्षर (Solid Font) वाला इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printer) है इसका नाम डेजी व्हील (Daisy Wheel) इसलिये दिया गया है क्योंकि इसके प्रिंट हैड की आकृति एक पुष्प गुलबहार (Daisy) से मिलती हैं।

डेजी व्हील प्रिंटर (Daisy Wheel Printer) धीमी गति का प्रिंटर है लेकिन इसके आउटपुट की स्पष्टता उच्च होती है इसलिये इसका उपयोग पत्र (Letter) आदि छापने में होता है और यह लैटर क्वालिटी प्रिंटर (Letter Quality Printer) कहलाता है।

इसके प्रिंट हैड (Print Head) में चक्र या व्हील (Wheel) होता है जिसकी प्रत्येक तान (Spoke) में एक कैरेक्टर (Character) का ठोस फॉण्ट (Solid Font) उभरा रहता हैव्हील कागज की क्षैतिज दिशा में गति करता है और छपने योग्य कैरेक्टर का स्पोक(Spoke) व्हील के घूमने से प्रिंट पोजीशन (Position) पर आता है एक छोटा हैमर (Hemmer) स्पोक रिबन (Ribbon) और कागज पर टकराता हैं जिससे अक्षर कागज पर छप जाता है इस प्रकार के प्रिंटर अब बहुत कम उपयोग में हैं।

 

Line Printer:- यह भी एक इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printer) हैं बड़े कंप्यूटरों के लिए उच्च गति (High Speed) के प्रिंटरो की आवश्यकता होती है उच्च गति के प्रिंटर एक बार में एक कैरेक्टर छापने की बजाय एक लाइन पृष्ट को एक बार में छाप सकते है इनकी छापने की गति 300 से 3000 लाइन प्रति मिनिट (Line Per Minute) होती हैं ये प्रिंटर Mini व Mainframe कंप्यूटर में बड़े कार्यों हेतु प्रयोग किये जाते है लाइन प्रिंटर (Line Printer) तीन प्रकार के होते हैं:-

  1. Drum Printer
  2. Chain Printer
  3. Band Printer
Drum Printer:- ड्रम में तेज घूमने वाला एक ड्रम (Drum) होता है जिसकी सतह पर अक्षर (Character) उभरे रहते हैं एक बैंड (Band) पर सभी अक्षरों का एक समूह (Set) होता हैं, ऐसे अनेक बैंड सम्पूर्ण ड्रम पर होते हैं जिससे कागज पर लाइन की प्रत्येक स्थिति में कैरेक्टर छापे जा सकते हैं ड्रम तेजी से घूमता हैं और एक घूर्णन (Rotation) में एक लाइन छापता है एक तेज गति का हैमर (Hammer) प्रत्येक बैंड के उचित कैरेक्टर पर कागज के विरुद्ध टकराता हैं और एक घूर्णन पूरा होने पर एक लाइन छप जाती हैं।
Chain Printer:- इस प्रिंटर में तेज घूमने वाली एक चेन (Chain) होती है जिसे प्रिंट चेन (Print Chain) कहते हैं चेन में कैरेक्टर छपे होते है प्रत्येक कड़ी (Link)  में एक कैरेक्टर का फॉण्ट (Font) होता हैं प्रत्येक प्रिंट पोजीशन (Print Position) पर हैमर (Hammer) लगे होते हैं  जिससे हैमर (Hammer) कागज पर टकराकर एक बार में एक लाइन प्रिंट करता हैं।
Band Printer:- यह प्रिंटर चेन प्रिंटर (Chain Printer) के समान कार्य करता है इसमें चेन (Chain) के स्थान पर स्टील का एक प्रिंट बैंड (Print Band) होता है इस प्रिंटर में भी हैमर (Hammer) एक बार में एक लाइन प्रिंट करता हैं।

नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटिंग 

नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटिंग (Non-Impact Printing) में प्रिंट हैड (Print Head) या कागज (paper) के मध्य संपर्क नहीं होता है इसमें लेजर प्रिंटिंग (Lager Printing) द्वारा तकनीक दी जाती है इसलिये इसकी Quality High होती है Non-Impact Printer की अनेक विधियाँ हैं जैसे-

  1. Laser Printer
  2. Photo Printer
  3. Inkjet Printer
  4. Portable Printer
  5. Multi functional Printer
  6. Thermal Printer.

 

Lager printer:- नॉन इम्पैक्ट पेज प्रिंटर हैं लेजर प्रिंटर का प्रयोग कंप्यूटर सिस्टम में 1970 के दशक से हो रहा हैं पहले ये Mainframe Computer में प्रयोग किये जाते थे 1980 के दशक में लेजर प्रिंटर का मूल्य लगभग 3000 डॉलर था।

  

ये प्रिंटर आजकल अधिक लोकप्रिय हैं क्योकि ये अपेक्षाकृत अधिक तेज और उच्च क्वालिटी में टेक्स्ट और ग्राफिक्स  छापने में सक्षम हैं अधिकांश लेजर प्रिंटर (Laser Printe) में एक अतिरिक्त माइक्रो प्रोसेसर(Micro Processor) रेम (Ram) व रोम (Rom) का प्रयोग (use) किया जाता है यह प्रिंटर भी डॉट्स (dots) के द्वारा ही कागज पर प्रिंट (print) करता है परन्तु ये डॉट्स (dots) बहुत ही छोटे व पास-पास होने के कारण बहुत सपष्ट प्रिंट (print) होते है।

 

इस प्रिंटर में कार्टरेज का प्रयोग किया जाता है जिसके अंदर सुखी स्याही (Ink Powder) को भर दिया जाता हैं लेजर प्रिंटर के कार्य करने की विधि मूलरूप से फोटोकॉपी मशीन की तरह होती है लेकिन फोटोकॉपी मशीन में तेज रोशनी का प्रयोग किया जाता है लेजर प्रिंटर )Laser Printer 300 से लेकर 600 DPI  (Dot Per Inch) तक या उससे भी अधिक रेजोलुशन की छपाई करता है रंगीन लेजर प्रिंटर उच्च क्वालिटी का रंगीन आउटपुट देता हैं इसमें विशेष टोनर होता है जिसमे विभिन्न रंगों के कण उपलब्ध रहते हैं  यह प्रिंटर बहुत महंगे होते है क्योकि इनके छापने की गति उच्च होती हैं तथा यह प्लास्टिक की सीट या अन्य सीट पर आउटपुट (output) को प्रिंट (print) कर सकते है। 

 

लेजर प्रिंटर की विशेषताए:-

  1. उच्च रेजोलुशन
  2. उच्च प्रिंट गति
  3. बड़ी मात्रा में छपाई के लिए उपयुक्त
  4. कम कीमत प्रति प्रष्ट छपाई
  5. लेजर प्रिंटर की कमियां
  6. इंकजेट प्रिंटर से अधिक महगां
  7. टोनर तथा ड्रम का बदलना महगां
  8. इंकजेट प्रिंटर से बड़ा तथा भारी
  9. थर्मल ट्रांसफर प्रिंटर
यह एक ऐसी तकनीक है जिसमे कागज पर wax आधारित रिबन से अक्षर प्रिंट (Print) किये जा सकते है इस प्रिंटर के द्वारा किया गया प्रिंट ज्यादा समय के लिए स्थित नहीं रहता अर्थात कुछ समय बाद प्रिंट किया गया Matter पेपर से मिट जाता हैं सामान्यतः इन प्रिंटरो का प्रयोग ATM मशीन में किया जाता हैं।
 

Photo Printer:- फोटो प्रिंटर एक रंगीन प्रिंटर होता है जो फोटो लैब की क्वालिटी फोटो पेपर पर छापते हैं इसका इस्तेमाल डॉक्युमेंट्स की प्रिंटिंग के लिए किया जा सकता है इन प्रिंटरो के पास काफी बड़ी संख्या में नॉजल होते है जो काफी अच्छी क्वालिटी की इमेज के लिए बहुत अच्छे स्याही के बूंद छापता है।

कुछ फोटो प्रिंटर में मिडिया कार्ड रिडर भी होते है ये 4×6 फोटो को सीधे डिजिटल कैमरे के मिडिया कार्ड से बिना किसी कंप्यूटर के प्रिंट कर सकता है ज्यादातर इंकजेट प्रिंटर और उच्च क्षमता वाले लेजर प्रिंटर उच्च क्वालिटी की तस्वीरे प्रिंट करने में सक्षम होते हैं।

कभी कभी इन प्रिंटरो को फोटो प्रिंटर के रूप में बाजार में लाया जाता है बड़ी संख्या में नॉजल तथा बहुत अच्छे बूंदों के अतिरिक्त इन प्रिंटरो में अतिरिक्त फोटो स्यान (cyan) हल्का  मैजेंटा (magenta) तथा हल्का काला (black) रंगों में रंगीन कर्टेज होता है ये अतिरिक्त रंगीन कार्टेज को सहायता से अधिक रोचक तथा वास्तविक दिखने जैसा फोटो छापते है इसका परिणाम साधारण इंकजेट तथा लेजर प्रिंटर से बेहतर होता है।

Inkjet Printer:- यह Non Impact Printer है जिसमे एक Nozzle (नोजल) से कागज पर स्याही की बूंदो की बौछार करके कैरेक्टर व ग्राफिक्स प्रिंट किये जाते है इस प्रिंटर का आउटपुट बहुत स्पष्ट होता हैक्योंकि इसमें अक्षर का निर्माण कई डॉट्स से मिलकर होता हैं रंगीन इंकजेट प्रिंटर में स्याही के चार नोजल होते है।

नीलम लाल पीला काला इसलिए इसको CMYK प्रिंटर भी कहा जाता हैं तथा ये चारो रंग मिलकर किसी भी रंग को उत्पन्न कर सकते है इसलिए इनका प्रयोग (use) सभी प्रकार के रंगीन प्रिंटर (Colored Printer) में किया जाता है|इस प्रिंटर में एक मुख्य समस्या है कि इसके प्रिंट हैड में इंक क्लौगिंग (Ink Clogging) हो जाती है यदि इससे कुछ समय तक प्रिंटिंग ना कि जाये तो।

इसके नोजल के मुहाने पर स्याही जम जाती है। जिससे इसके छिद्र बंद हो जाते है। इस समस्या को इंक क्लिोंगिग कहा जाता है। आजकल इस समस्या को हल कर लिया गया है। इसके अलावा इस प्रिंटर की प्रिंटिंग पर यदि नमी आ जाये तो इंक फैल जाती है। इसकी प्रिंटिंग क्वालिटी प्रायः 300 Dot Per Inch होती हैं।

Portable Printer:- पोर्टेबल प्रिंटर छोटे कम वजन वाले इंकजेट या थर्मल प्रिंटर होते है जो लैपटॉप कंप्यूटर द्वारा यात्रा के दौरान प्रिंट निकलने की अनुमति देते है यह ढोने में आसान इस्तेमाल करने में सहज होते है मगर कापैक्ट डिज़ाइन की वजह से सामान्य इंकजेट प्रिंटरो के मुकाबले महंगे होते है।

इनकी प्रिंटिंग की गति भी सामान्य प्रिंटर से कम होती है कुछ प्रिंट डिजिटल कैमरे से तत्काल फोटो निकालने के लिए इस्तेमाल किये जाते है इसलिए इन्हें पोर्टेबल फोटो प्रिंटर कहा जाता है।

Multi functional / All in one Printer:- ऐसा प्रिंटर जिसके द्वारा हम किसी Document को Scan कर सकते हैं उसे प्रिंट कर सकते है तथा प्रिंट करने के बाद फैक्स भी कर सकते हैं उसे मल्टीफंक्शनल प्रिंटर कहा जाता हैं।मल्टीफंक्शनल/ऑल इन वन प्रिंटर को मल्टीफंक्शनल डिवाइस (Multi Function Device) भी कहा जाता है यह एक ऐसी मशीन है जिसके द्वारा कई मशीनों के कार्य जैसे प्रिंटर स्कैनर कॉपीयर तथा फैक्स किये जा सकते है।
Home Offices:- मल्टीफंक्शन प्रिंटरो में बहुत लोकप्रिय होता हैं इसमें इंकजेट या लेजर प्रिंट विधि का प्रयोग हो सकता है कुछ मल्टीफंक्शन प्रिंटरो में मिडिया कार्ड रिडर का प्रयोग होता है जो डिजिटल कैमरा से कंप्यूटर के प्रयोग के बगैर सीधे-सीधे इमेज छाप सकता है।
Printer
 

Webcam

वेब कैमरा या वेबकैम एक वीडियो कैमरा होता है जो कि कंप्यूटर या कंप्यूटर नेटवर्क तक, या के माध्यम से, चालु समय में घटनाओं का प्रसार करता है। वेब कैमरा आम तौर पर एक यूएसबी, फायरवायर, या इसी तरह के किसी केबल से जुड़ता है, या कंप्यूटर हार्डवेयर में निर्मित होता है।
Webcam

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