C.P.U. क्या हैं? C.P.U. के बारें में विस्तार से जानिए?

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What is C.P.U.? Know C.P.U. in Details in Hindi?


Central Processing Unit

Central Processing Unit
CPU का पूरा नाम Central Processing Unit है । इसे प्रोसेसर या माइक्रोप्रोसेसर भी कहता हैं । यह पीसी से जुड़े विभिन्न उपकरणों को नियंत्रित करता है । यह कम्प्यूटर द्वारा प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करता है ।

हिस्ट्री ऑफ़ सी.पी.यू. 

सन् 1823 में Baron Jons Jackob Berzelius ने सिलिकॉन(Si) की खोज किया था जो आज प्रोसेसर का मूल घटक हैं. उसी प्रकार सन् 1903 में निकोला टेसला ने विद्धुत तर्क सर्टिक (गेट्स या स्विच) का पेटेंट निर्माण किया गया था

John bardeen, Walter Brattain और William Shockly ने 23 दिसंबर, 1947 को बेल लेबोरेटरीज में पहला ट्रांजिस्टर का आविष्कार किया। Robert Noyce और Jack Kilby ने सन् 1947 में पहला एकीकृत सर्किट विकसित किया। 15 नवंबर 1971 को, इंटेल ने पहला माइक्रोप्रोसेसर, इंटेल 4004 पेश किया।मार्च 1991 में, AMD ने AM386 माइक्रोप्रोसेसर फैमिली की शुरुआत किया। इंटेल ने 22 मार्च, 1993 को पेंटियम प्रोसेसर जारी किया। 

प्रोसेसर 60 मेगाहर्ट्ज का प्रोसेसर था, इसमे 3, 1मिलियन ट्रांजिस्टर शामिल हैं और यह 878.00 डॉलर में बिकता हैं। इंटेल ने 4 जनवरी 2000 को 66 मेगाहर्ट्ज बस प्रोसेसर के साथ सेलेरान 533 मेगाहर्ट्ज जारी किया। इंटेल ने 22 अप्रैल, 2006 को कोर 2 डूओ प्रोसेसर E6320 (4M cache, 1,86 GHz, 1066 MHz FSB) जारी किया। इंटेल ने नवंबर 2008 में पहला कोर i7 डेस्कटॉप प्रोसेसर (i7-920, the i7-940, and the i7-965 Extreme Edition) जारी किया। 

इंटेल ने पहला कोर i5 मोबाईल प्रोसेसर (i5-430M and i5-520E) जारी किया।इंटेल ने जून कोर 2017 में पहला कोर i9 डेस्कटॉप प्रोसेसर, i9-7900x जारी किया। यह LGA 2066 सॉकेट का उपयोग करता हैं, जो 3.3 ghz पर चलता हैं, इसमें 10 कोर हैं, और 13.75 MB L3 कैश हैं।इंटेल ने अप्रैल 2018 में पहला कोर i9 मोबाईल प्रोसेसर, i9-8950HK जारी किया। यह BGA 1440 सॉकेट का उपयोग करता है, जो 2.9 GHz पर चलता हैं, इसमें छ: कोर हैं, और इसमें 12 MB L3 कैश की सुविधा हैं।   

सी.पी.यू. का आविष्कार 

15 नवंबर 1971 को इंटेल द्वारा पहला CPU (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट) का निर्माण किया गया था और अब AMD (एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसिस) तथा इंटेल द्वारा CPU का आविष्कार लगातार किया जा रहा हैं.आमतौर पर माइक्रोप्रोसेसर के आविष्कार का श्रेय इंटेल-4004 नामक माइक्रोप्रोसेसर को जाता है। इंटेल ने इसे 1971 में बाजार में निकाला था।

सी.पी.यू. का परिचय 

सीपीयू को हम कम्प्युटर का दिमाग भी कह सकते हैं। यह उन सारे निर्देशों का पालन करता है जो की कम्प्युटर द्वारा दिए जाते हैं। सीपीयू कम्प्युटर का हार्डवेयर है जो की कम्प्युटर के प्रोग्राम द्वारा दिये गए निर्देशों की देख रेख करता है।यह कम्प्युटर की सामान्य अरिथमेटिकल, लॉजिकल और इनपुट आउटपुट हर तरह के कार्यो को कम्प्युटर में करने का काम करता है।

हम इसे इस तरीके से समझ सकते हैं की मान लीजिये आपने कीबोर्ड में ई टाइप किया और फिर आपको मॉनिटर मे ई दिखा यह कार्य भी सीपीयू की मदद से ही संभव हो पाया है।जब भी आप किसी स्थानीय बाज़ार में कम्प्युटर की दुकान पर जाते हैं तो सबसे पहले उसके सीपीयू का प्रॉसेसर देखते हैं उसके बाद ही सीपीयू को खरीदने का मन बनाते हैं। जब भी हम सीपीयू के किसी कॉम्पोनेंट को खंगालते हैं तो हम उसमे यह देखते हैं की वह कैसे काम करता है और कितनी तेज़ी से चलता है।

जब भी हम कम्प्युटर का उपयोग करते हैं तो हम ध्यान रखते हैं की कम्प्युटर फटा फट निर्देश दे और कार्य करे। जब भी निर्देश जटिल हो जाता है हम सीपीयू पर निर्भर हो जाते हैं क्यूंकी सीपीयू ही कम्प्युटर को सुचारु रूप से चलाने का काम करता है।पर जैसे की आजकल की तकनीकी है उसको देख कर हम कह सकते हैं की आजकल के सीपीयू बड़े ही ताकतवर और मजबूत हैं और बड़ी तेज़ी से काम भी करते हैं उनकी काम करने की क्षमता बड़ गयी है।

सी.पी.यू. क्या हैं?

सीपीयू को हम कम्प्युटर का दिमाग भी कह सकते हैं। यह उन सारे निर्देशों का पालन करता है जो की कम्प्युटर द्वारा दिए जाते हैं। सीपीयू कम्प्युटर का हार्डवेयर है जो की कम्प्युटर के प्रोग्राम द्वारा दिये गए निर्देशों की देख रेख करता है।

यह कम्प्युटर की सामान्य अरिथमेटिकल, लॉजिकल और इनपुट आउटपुट हर तरह के कार्यो को कम्प्युटर में करने का काम करता है। हम इसे इस तरीके से समझ सकते हैं की मान लीजिये आपने कीबोर्ड में ई टाइप किया और फिर आपको मॉनिटर मे ई दिखा यह कार्य भी सीपीयू की मदद से ही संभव हो पाया है।जब भी आप किसी स्थानीय बाज़ार में कम्प्युटर की दुकान पर जाते हैं तो सबसे पहले उसके सीपीयू का प्रॉसेसर देखते हैं उसके बाद ही सीपीयू को खरीदने का मन बनाते हैं।

जब भी हम सीपीयू के किसी कॉम्पोनेंट को खंगालते हैं तो हम उसमे यह देखते हैं की वह कैसे काम करता है और कितनी तेज़ी से चलता है।जब भी हम कम्प्युटर का उपयोग करते हैं तो हम ध्यान रखते हैं की कम्प्युटर फटा फट निर्देश दे और कार्य करे। जब भी निर्देश जटिल हो जाता है हम सीपीयू पर निर्भर हो जाते हैं क्यूंकी सीपीयू ही कम्प्युटर को सुचारु रूप से चलाने का काम करता है।पर जैसे की आजकल की तकनीकी है उसको देख कर हम कह सकते हैं की आजकल के सीपीयू बड़े ही ताकतवर और मजबूत हैं और बड़ी तेज़ी से काम भी करते हैं उनकी काम करने की क्षमता बड़ गयी है।

सी.पी.यू. के भाग

CPU के बहुत सारे भाग होते हैं जिसके बारे में नीचे बताया गया है:-

Airthmetic and Logic unit:- अंकगणितीय एवं तार्किक इकाई को हम एएलयू (ALU) के नाम से ज्यादा जानते हैं. ALU का कार्य कंप्यूटर में जोड़ना, घटाना, गुणा, भाग इत्यादि करना होता है. ALU के द्वारा ही हम तार्किक गणना या अंक गणितीय गणना भी कर सकते हैं।

Memory:- CPU का एक मुख्य अंग स्मृति (Memory) है. यह एक भंडारण युक्ति (Storage Device) है. इसका उपयोग हम कंप्यूटर में डाटा को संग्रह करने के लिए करते हैं. कंप्यूटर में मेमोरी कई तरह से संग्रहित होती है जिनमें Main Memory, Internal Memory, Primary तथा Secondary Memory आते हैं. उदाहरण के लिए अगर कंप्यूटर पर कोई काम हो रहा हो या कंप्यूटर गतिशील हो तो इनका संग्रह Primary Memory में होता है परंतु जब डाटा को Save कर उस पर बाद में कार्य किया जाता है तो यह संग्रह Secondary Memory मेमोरी के अंतर्गत आता है।

Control unit:- नियंत्रण इकाई कंप्यूटर के हर इकाई को व्यवस्थित करता है. यह कंप्यूटर से जानकारी लेता है और उन्हें सिग्नल सीरीज में बदलता है ताकि कंप्यूटर के बाकी पार्ट्स अपना कार्य आसानी से कर सके. नियंत्रण इकाई कंप्यूटर के Input, Output, Processor इत्यादि की गतिविधियों के बीच सही तालमेल बिठाने का कार्य करता है. यह CPU के मुख्य घटक है. इनके अलावा भी सीपीयू के कुछ भाग हैं जो नीचे बताया गया है।

Motherboard:- मदरबोर्ड CPU का सबसे महत्वपूर्ण भाग है. मदरबोर्ड के साथ जुड़कर कंप्यूटर के सारे हिस्से अपना काम कर पाते हैं. मदरबोर्ड एक प्रकार का सर्किट होता है जिसमें सभी माइक्रोप्रोसेसर, चिपसेट, ग्राफिक कंट्रोलर, कैपेसिटी कंडेंसर, इंटीग्रेटेड सर्किट आदि जुड़े होते हैं।

SMPS:- एसएमपीएस हमारे कंप्यूटर को बिजली सप्लाई करता है. यह एक कोड की तरह होता है जो कंप्यूटर को CPU से जोड़ने का काम करती है. इसी कोड में सीपीयू की सारी मुख्य तारे जुड़ी रहती हैं. इसके बिना कंप्यूटर के पुर्जो तो जोड़ना संभव नहीं है।

System Buses:- Processor और memory के बीच डेटा को ले जाने के लिए इन system buses का उपयोग होता है. ये cable और connectors से बना एक pathway है. computer system के विभिन्न घटकों के बीच data और control signals का आदान – प्रदान हो सके इसके लिए ये buses एक communication path के रूप में कार्य करती है।

Computer system में मुख्य तीन प्रकार की सिस्टम बस होती है:-

  1. Address bus-निर्देश या डेटा के पते ले जाती है।
  2. Data bus-मेमोरी और प्रोसेसर के बीच डाटा को ले जाती है।
  3. Control bus-नियंत्रण संकेतों को ले जाने का काम करती है।

पार्ट्स ऑफ़ सी.पी.यू.  


CPU के मुख्य भाग के बारे में तो हमने जान लिया अब हम देखते हैं CPU में कौन कौन से पार्ट्स लगे होते हैं और उनका कार्य क्या होता है:-

Motherboard:- इन्हें कई नामो से जाना जाता है। जिसमे मैनबोर्ड, मदरबोर्ड , सिस्टमबोर्ड अधिक चलन में आते है। ये एक प्रकार के सर्किट होते है जिसमे सभी पुर्जे आपस में जुड़े रहते है। मदरबोर्ड में  माइक्रोप्रोसेसर ,RAM, चिपसेट, ग्राफिक कंट्रोलर, अन्य इनपुट आउटपुट कंट्रोलर स्थापित किये रहते है।

RAM (Random Access Memory):- यह कंप्यूटर की अस्थाई स्मृति होती है। ये कंप्यूटर के प्राथमिक संग्रहण उपकरण होते है RAM का संपर्क CPU के साथ सीधा होता है। किसी उपयोगकर्ता द्वारा भरी गई निर्देश या जानकारी ऑपरेटिंग सिस्टम से सर्वप्रथम RAM में आती है। उसके पश्चात CPU जरूरत के अनुसार किसी भी जानकारी को RAM से लेता है। RAM की स्मृति बस बिद्युत प्रवाह के साथ तक ही बनी रहती है। यानि जबतक कंप्यूटर में बिद्युत प्रवाहित होगा RAM की स्मृति बनी रहेगी।  जैसे ही बिद्युत प्रवाह हटेगा वैसे ही RAM की स्मृति नस्ट हो जायेगी। उसमे स्तिथ सारी जानकारी लुप्त हो जायेगी। 

ROM Chip:- कंप्यूटर को बनाते समय ही रॉम में डाटा डालकर कंप्यूटर के मदरबोर्ड पर स्थाई रूप से लगा दिया जाता है।इस चिप में ऐसे प्रोग्राम (और डाटा (रखे जाते है जिनकी जरूरत कंप्यूटर को स्टार्ट करने पर पड़ती है।

Math coprocessor:- गणित से सम्बन्धित कार्यो को करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। सीपीयू के सहायता के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है। आधुनिक माइक्रोप्रोसेसर  में इन्हें अलग से लगाने की आवस्यकता नहीं पड़ती है। 


Sound card:- साउंड कार्ड का प्रयोग मल्टीमीडिया में ध्वनि के डिज़िटल सुचनावो को विद्युत संकेतो में बदलने के लिए किया जाता है। साउंड कार्ड को मदरबोर्ड में स्थापित किया जाता है।


Timer:- टाइमर मदरबोर्ड पर लगा रहता है। यह घड़ी के तरह कार्य करता है। इसे बैटरी से सप्लाई दी जाती है। जब कंप्यूटर बंद हो जाता है तो भी यह 
काम करती है। 


Speaker:- स्पीकर का प्रयोग सिस्टम यूनिट के अंदर ध्वनि संकेत उतपन्न करने के लिए किया जाता है।


Power Supply Unit:- पॉवर सप्लाई यूनिट कंप्यूटर को उच्च व् निम्न वोल्टेज की गड़बड़ियों से बचाता है। इसे बिजली के पंखे द्वारा हवा देकर ठंडा किया जाता है। पंखा इसमें लगा रहता है।


Hard Disk:- ये बहुत सी जानकारियो को संग्रहण कर रखने में सछम होती है।  इनमे जो जानकारी रक्षित (SAVE) होती है वो  RAM की तरह बिद्युत प्रवाह बंद होने के साथ मिट नहीं जाते। बल्कि इनपर जो जानकारी स्थापित (रछित SAVE) की जाती है वो हमेशा के लिए बनी रहती है। जबतक की उपयोगकर्ता द्वारा उसे मिटा न दिया जाय। इनकी छमता की माप मेगाबाइट , गीगाबाइट , टेराबाइट , पिकाबाइट इत्यादि में की जाती है। हार्ड डिस्क कंप्यूटर में स्थाई रूप में लगे होते है। दस्तावेज (FILE) के आदान प्रदान के लिए इन्हें एक एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में सामान्तया नहीं लगाया जाता है। 

सी.पी.यू. के प्रकार

बीसवीं शताब्दी में शोधकर्ताओं ने काफी अलग अलग तरह के सीपीयू बनाए थे लेकिन आजकल के कम्प्युटरों में जो सीपीयू होता है वह या तो 32 बिट या फिर 64 बिट होता है जो 32 बिट के सीपीयू होते हैं वो केवल उन्ही निर्देशों को ले पाते हैं जो की 32 बिट साइज के निर्देशों को संभाल सकें इसी प्रकार 64 बिट के जो सीपीयू होते हैं वह भी केवल उन्ही निर्देशों को संभाल सकते हैं जो की 64 बिट साइज़ के निर्देश हों क्यूंकी हर बिट की काम करने के क्षमता उसकी बिट पर निर्भर करती है इसलिए हर सीपीयू का बिट साइज़ अलग अलग होता है।

सी.पी.यू. के घटक 

CU:- मेमोरी से निर्देशों को निकालता है और डिकोड करता हैं और उन्हें निष्पादित (Execute) करता हैं।

ALU:- अंकगणित और तार्किक संचालन को संभालता हैं।

Register:- ये विशेष प्रकार के मेमोरी डिवाइस हैं जो उन डेटा संग्रहित करते हैं जिन्हें प्रोसेसर द्वारा संसाधित और पहले से ही संसाधित किया गया हैं। ठीक से काम करने के लिए, सीपीयू  सिस्टम क्लॉक, मेमोरी, सेकेंडरी स्टोरेज, डेटा और एड्रेस बसेस पर निर्भर करता हैं।

सी.पी.यू. के हिस्से

सीपीयू के काफी हिस्से होते हैं। इसका पहला हिस्सा अरिथमेटिक लॉजिक यूनिट (ए एल यू) होता है जो कि सामान्य अरिथमेटिक और लॉजिकल कामों को देखता है।दूसरा होता है कंट्रोल यूनिट (सि यू) यह कम्प्युटर के बाकी कामों को करता है। यह मेमोरी से निर्देशों को पढ़ता है समझता है और उन्हे सिगनलों में बदल देता है जिससे की कम्प्युटर के बाकी के हिस्सा चल सके और यह सही से काम कर पाये।

इसके कंट्रोल यूनिट कुछ जरूरी हिसाब यानि कैलक्युलेशन भी करती है जिससे की सीपीयू को सही से चलाया जा सके।तीसरा हिस्सा कैचे (cache) होता है वह तेज़ गति वाली मेमोरी को निर्देश देता है जिससे वह इसको कॉपी कर सके और पुनः प्राप्त कर सके। पुराने जमाने के जो सीपीयू होते थे उनमे अलग अलग कॉम्पोनेंट होते थे पर 1970 के बाद एक ही तरह का सर्किट इस्तेमाल होने लगा जिसे हम माइक्रो प्रॉसेसर बोलते हैं।सीपीयू भी एक तरह का माइक्रो प्रॉसेसर ही है। सीपीयू का आकार 2*2 का होता है। सीपीयू का एक ही कॉम्पोनेंट इतना सही से जुड़ा हुआ होता है की हम उसे आसानी से समझ नहीं सकते।

सीपीयू मदरबोर्ड पर एक जगह लगा हुआ होता है और मदरबोर्ड में इसके लिए एक सॉकेट होता है जो की हर प्रॉसेसर के लिए विशेष होता है।सीपीयू क्यूंकी काफी गरम हो जाते हैं इसके लिए हमे एक कूलिंग सिस्टम की आवश्यकता पड़ती है जो की इसकी तपत को कम कर सके। इसके लिए पंखा होता है जो की इसको ठंडा करने का काम करता है।कम्प्युटर के लिए विश्व ऐसा है की जैसे जीरो और एक से भरा हुआ हो। प्रॉसेसर के अंदर हम ट्रांजिस्टर की मदद से जेरो और एक को भरते हैं। इनमे छोटे छोटे स्विच होते हैं जो की बिजली को नियंत्रण में रखते हैं और स्विच का ऑन और ऑफ बताते हैं।

सी.पी.यू. के कार्य


यह कुछ काम हैं जो की सीपीयू आसानी से कर पता है:-

  1. मेमोरी से डाटा को पढ़ता है और लिखता है।
  2. एक नंबर को दूसरे नंबर से जोड़ता है।
  3. अवलोकन करता है की कोई नंबर दूसरे नंबर से बड़ा तो नहीं है।
  4. एक नंबर को एक जगह से दूसरे जगह लेकर जाने का काम करता है।
  5. निर्देशों की पालना करते हुए एक जगह से दूसरी जगह कूदता भी है पर इसके लिए कोई टेस्ट ट्रू (true) होना चाहिए।

इसी तरह के काफी उलझे हुए प्रोग्राम हम बना सकते हैं इस तरह के आसान निर्देशों द्वारा इनकी मदद से। यह इसीलिए आसान है क्यूंकी एक निर्देश बड़ा ही कम समय लेता है सीपीयू में इसको चलाने के लिए।आजकल के काफी सीपीयू एक अरब से ज्यादा निर्देश एक सेकंड में पूरा कर सकते हैं। सामान्यत: एक सामान्य सीपीयू को हम जितना जल्दी काम करवाने का सोचते हैं वह उससे भी काफी जल्दी काम करने की कोशिश करता है।

एक तरीका जिससे की प्रॉसेसर की स्पीड को हम नाप सकते हैं वह है एमआईपिएस (MIPS-Million Instructions Per Second)।फ्लोप्स (Floating Point Operations Per Second) और सीपीयू के घड़ी की गति को हम गीगाहर्ट्ज में नापते हैं और यह ये भी नापता है की प्रॉसेसर कितना काम कर रहा है।एक सीपीयू को लॉजिक गेट द्वारा बनाया जाता है नाकी किसी चलते फिरते पार्ट के द्वारा। कम्प्युटर का सीपीयू जो होता है वह भी कम्प्युटर के सारे पार्ट्स की तरह ही एक जगह जुड़ा होता है।

सी.पी.यू. की विशेषताएं

CPU कंप्यूटर का दिमाग होता है. यह मैमोरी से information को लेता है और उसे process करता है. Intel और AMD दो ऐसी कंपनियां है जो CPU का निर्माण करती है:-

CPU cache memory:- cache एक छोटी मैमोरी होती है जो कि सीपीयू के अंतर स्थित रहती है. जिससे कि सीपीयू जल्दी से मैमोरी को access कर पाता है. cache मैमोरी, main मैमोरी से information को fetch करता है और इस सूचना को सीपीयू को प्रोसेसिंग के लिए भेज देता है.cache मैमोरी जो है वह main memory से तेज होती है. इसमें तीन प्रकार की cache memory होती है- Layer1 (L1), layer2 (L2), layer3 (L3).L1 जो है वह L2 से छोटी होती है और तेज होती है. जबकि L2 जो है वह L3 से छोटी होती है और तेज होती है।

CPU Core:- सीपीयू के अंदर बहुत सारें cores होते है. और इनका प्रयोग parallel processing के कार्य के लिए किया जाता है. cores कंप्यूटर सिस्टम की efficiency (दक्षता) को बढ़ा देते हैं.प्रत्येक core की अपनी एक खासियत होती है और उनके पास खुद की cache memory होती है. और जरूरत पड़ने पर एक core दुसरे cores से communicate भी कर सकता है।

CPU Speed:- सीपीयू की speed को GHz (गीगाहेर्त्ज़) या MHz (मेगाहेर्त्ज़) में मापा जाता है. जहाँ हेर्त्ज़ (hertz) जो है वह फ्रीक्वेंसी की इकाई है.वह सीपीयू जिसकी जितनी ज्यादा फ्रीक्वेंसी होगी वह उतने ही ज्यादा speed से tasks (कार्यों) को पूर्ण कर सकता है।

Multithreading in CPU:- मल्टीथ्रीड़िंग के कारण ही सीपीयू parallel processing को सपोर्ट करता है. मल्टीथ्रीड़िंग में, सीपीयू के प्रत्येक physical core में दो logical cores होते है. जो कि parallel में कार्य करते हैं.इससे पूरी process की speed बढ़ जाती है।

CPU Bandwidth:- सीपीयू को input/output डिवाइस और मैमोरी से communicate करने के लिए एक सर्किट की आवश्यकता होती है जैसे:- PCI slots के द्वारा PCI cards से communicate किया जाता है और USB controllers से USB devices जैसे:- माउस, कीबोर्ड, प्रिंटर आदि के साथ communicate किया जाता है.वह speed जिस पर यह communication होता है उसे हम bandwidth कहते है. और bandwidth हर cpu में अलग अलग होता है. जिस cpu के पास ज्यादा cores होंगी उसका bandwidth ज्यादा होगा. और जिसके पास कम cores होंगी उसका कम बैंडविड्थ होगा।


फंक्शन ऑफ़ सी.पी.यू.

Fetch:- प्रत्येक instruction मैमोरी में स्टोर रहता है और इनका अपना address होता है. इस address के द्वारा प्रोसेसर instruction को fetch करता है।

Decode:- फिर इसके बाद इस instruction को बाइनरी कोड में डिकोड किया जाता है जिससे कि cpu को instruction समझ में आये।

Execute:- इसके बाद प्रोसेसर इसे execute करता है।

Store:- execution के बाद जो भी result प्राप्त होता है उसे मैमोरी में store कर दिया जाता है।

सी.पी.यू. की उपयोगिता

यह एक ऐसा डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसमें लाखों ट्रांजिस्टरों को एकीकृत परिपथ अर्थात इंटीग्रेटेड सर्किट या आईसी के रुप में प्रयोग कर तैयार किया जाता है। इससे कंप्यूटर के सीपीयू अर्थात सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट की तरह भी काम लिया जाता है। इंटीग्रेटेड सर्किट के आविष्कार ने ही माइक्रोप्रोसेसर के निर्माण का रास्ता खोला था। माइक्रोप्रोसेसर के अस्तित्व में आने के पूर्व सीपीयू अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक अवयवों को जोड़कर बनाए जाते थे या फिर लघुस्तरीय एकीकरण वाले परिपथों से हैं।

सी.पी.यू. कैसे बनता है?

सीपीयू कैसे बनाया जाता है, ये समझना थोड़ा जटिल है. परन्तु फिर हम आपको एक आसान भाषा मे समझाते की कोशिश करेंगे. एक CPU को बनाने के लिए रेत यानी Sand को उपयोग में लिया जाता है. रेत में silicone dioxide काफी अधिक मात्रा में पाया जाता है, जो semiconductor बनाने के लिए जरूरी पदार्थ है।

सबसे पहले चरण में sand को high temperature में गर्म किया जाता है. उसके बाद विभिन्न chemicals की मदद से उसे purify किया जाता है. जिसके फलस्वरूप हमे cylinder shape में silicone प्राप्त होता है इसे ingot कहते है.अब एक पतली आरी से उस ingot को कई slices में cut किया जाता है, उन्हें हम wafers कहते है.उसके बाद काटी गयी इन slices को  photosensitive chemical से polish किया जाता है. अगले चरण में transistor के design को उन silicon slices पर ultraviolet laser के माध्यम से print किया जाता है।

एक बार जब उन स्लाइस पर ट्रांजिस्टर का डिज़ाइन छप जाता है, तो हम उन्हें काफी tiny wires के use से आपस मे connect करते है.अंत के चरण में उन्हें test किया जाता है और  उसके बाद उस silicon chip को metal cover में बंद करके आप तक भेज दिया जाता है. हालांकि ये प्रोसेस इतना आसान नही होता है. परन्तु हमने आपको एक आसान  भाषा में समझाने की कोशिश की उम्मीद है, आपको जानकारी समझ मे आयी होगी।


सी.पी.यू. मॉडल कैसे देखे?

अगर आप अपने PC के CPU model और उसकी details check करना चाहते है, तो उसके लिए आपको हमारे द्वारा बताए गए तरीके को follow करना है. इस तरीके से न केवल आप अपने सीपीयू के बारे में जानकारी प्राप्त कर पाएंगे बल्कि एक computer system की overall technical specifications को भी देख पाएंगे. CPU models के बारे में जानने के कई तरीके है।

अगर आप Windows Key और Pause key को एक साथ press करेंगे तो आपके सामने पूरे system की पूरी जानकारी नई window में ओपन हो जाएगी. इसमे आपको पता चलेगा processor name (e.g.,Intel, AMD, Pentium), model (e.g., Core (TM) i5), Model number (e.g., 3570), frequency (e.g.,3.40GHz), number of cores (e.g.,4 CPU) etc.एक दूसरा तरीका भी है, जिसमे आप window menu पर जाकर Run सर्च करे. अब इस सॉफ्टवेयर को open करे. अब यहां पर आपको msinfo32 ये command type करके enter करना होगा. आपके सामने system details की विंडो खुल जाएगी।

सी.पी.यू. कोर क्या होते है?

प्रत्येक सीपीयू कम से कम एक प्रोसेसर से बनता है जो सभी प्रोसेसिंग करता है. बहुत दिनों तक सीपीयू को सिंगल प्रोसेसर से ही काम चलाना पड़ा है. इस प्रोसेसर को ही प्रोसेसिंग कोर कहते है.समय के साथ एडवांस टेक्नोलॉजी ने एक सीपीयू को मल्टीकोर (प्रोसेसर) का इस्तेमाल करने लायक बनाया.आज, एक अकेला सीपीयू एक से ज्यादा प्रोसेसर्स से युक्त हो सकता है. इन प्रोसेसर की संख्याओं के आधार पर ही सीपीयू का नामकरण किया जाने लगा है:-

Dual-Core:- जिस सीपीयू में दो प्रोसेसर होते है और उसे ड्यूल-कोर्स प्रोसेसर कहते है. आपने कम्प्यूटर स्टोर में सेलर को कहते सुना होगा कि यह ड्यूल-कोर प्रोसेसर है. तब वह इसी की बात कर रहा होता है. Intel Pentium Dual Core Processors इसी श्रेणी के प्रोसेसर है।

Quad-Core:- वह सीपीयू जो चार प्रोसेसरों से मिलकर बना होता है उसे क्वाड-कोर प्रोसेसर कहते है.Intel i5 Processors क्वाड-कोर प्रोसेसर में गिने जाते है।

Hexa-Core:- अब तो आपको भी अंदाजा लग गया होगा कि हम कितने प्रोसेसर बताने वाले है. आपने सही पकड़ा है छह. जिस सीपीयू में छह प्रोसेसर होते है उसे हेक्सा-कोर प्रोसेसर कहते है.Intel i5 के कुछ प्रोसेसर तथा Intel i7 Processors इस श्रेणी के प्रोसेसर्स है।

Octa-Core:- सीपीयू में आठ प्रोसेसर होना उसे ओक्टा-कोर प्रोसेसर बनाता है.Intel i7 Processors श्रंख्ला के 9th Generation के बाद के प्रोसेसर इस श्रेणी में गिने जाते है।

सी.पी.यू. के फ़ायदे 

  1. कंप्यूटर में मल्टी-कोर प्रोसेसर होने का मतलब है कि यह कुछ कार्यक्रमों के लिए तेजी से काम करेगा।
  2. चालू होने पर कंप्यूटर उतना गर्म नहीं हो सकता है।
  3. कंप्यूटर को कम शक्ति की आवश्यकता होती है क्योंकि यह कुछ वर्गों को बंद कर सकता है यदि उन्हें जरूरत नहीं है।
  4. अधिक सुविधाओं को कंप्यूटर में जोड़ा जा सकता है।

सी.पी.यू. के हानियाँ 

Cost:- प्रोसेसर जितना तेज होगा, कीमत उतनी ही अधिक होगी। चाहे आप खुद एक सिस्टम का निर्माण कर रहे हों, कंप्यूटर निर्माता से प्रोसेसर-स्पीड के विकल्पों में से चयन कर रहे हों या आपके पास पहले से मौजूद कंप्यूटर के अपग्रेड की जांच कर रहे हों, अधिक से अधिक और तेज CPU शक्ति प्राप्त करने के लिए अधिक खर्च करने की योजना बनाते हैं। कच्ची गति हालांकि, कीमत का एकमात्र निर्धारक नहीं है। गति और लागत के बीच का समीकरण तब और जटिल हो जाता है जब आप सर्वर-बनाम डेस्कटॉप-क्लास प्रोसेसर, कोर की संख्या, बिल्ट-इन कैश मेमोरी की मात्रा और सीपीयू कितनी प्रणाली रैम का समर्थन कर सकते हैं।
Warmth:- तेज़ प्रोसेसर अधिक गर्मी उत्पन्न करते हैं और धीमी प्रोसेसर की तुलना में अधिक आक्रामक शीतलन उपायों की आवश्यकता होती है। थर्मल सुरक्षा को ठीक से कॉन्फ़िगर किए बिना, अधिकांश कंप्यूटर बूट नहीं करेंगे, पावर-ऑन सेल्फ टेस्ट या POST में निर्मित सुरक्षात्मक उपायों को लागू करते हैं, जो रूटीन शुरू होने पर चलते हैं।

प्रोसेसर के शीर्ष पर संलग्न, एक हीट सिंक में एक धातु ब्लॉक होता है जो पतले आयताकार पंखों के साथ सबसे ऊपर होता है जो थर्मल ऊर्जा का संचालन करने का एक निष्क्रिय साधन प्रदान करता है।
उचित हीट सिंक के अलावा, आपको कंप्यूटर के मामले में, या यहां तक ​​कि एक तरल शीतलन प्रणाली के अंदर अतिरिक्त शीतलन प्रशंसकों की आवश्यकता हो सकती है। एक प्रोसेसर द्वारा उत्सर्जित होने वाली गर्मी को फैलाने में विफल होने से प्रोसेसर को और अन्य घटकों को अपूरणीय क्षति हो सकती है।

Motherboard:- जब आप एक प्रोसेसर को मदरबोर्ड से जोड़ते हैं, तो आप इसे एक सॉकेट में प्लग करते हैं जो सीपीयू के नीचे एक विशिष्ट संख्या और छोटे पिन की व्यवस्था को स्वीकार करता है। मदरबोर्ड निर्माता अपने उत्पादों को सॉकेट प्रकारों द्वारा परिभाषित करते हैं जो वे समर्थन करते हैं।

जब तक प्रोसेसर और मदरबोर्ड मैचिंग सॉकेट का उपयोग नहीं करते हैं, वे कंप्यूटर की कार्यक्षमता का मूल प्रदान करने के लिए एक साथ काम नहीं कर सकते हैं। संगतता के लिए इसकी आवश्यकता कंप्यूटर को अपग्रेड करने की प्रक्रिया को जटिल बनाती है क्योंकि यह उन तेज प्रोसेसर को सीमित करता है जिन्हें आप अपने वर्तमान मदरबोर्ड में फिट कर सकते हैं।

Operating Systems and Applications:- ऑपरेटिंग सिस्टम और एप्लिकेशन सॉफ़्टवेयर संगतता विनिर्देशों के साथ आते हैं जो सीपीयू कॉन्फ़िगरेशन को परिभाषित करते हैं जिस पर वे चल सकते हैं। यदि आप अपने काम को तेज करने के लिए एक नए, तेज प्रोसेसर में निवेश करते हैं, तो आपको अपने ओएस और एप्लिकेशन को अपग्रेड करने की आवश्यकता का सामना करना पड़ सकता है यदि आपका नया हार्डवेयर कॉन्फ़िगरेशन आपके द्वारा उपयोग किए जाने वाले संस्करणों का समर्थन नहीं करता है।

अब आप नए सीपीयू अधिग्रहणों के बीच प्रतीक्षा करते हैं, संभावना है कि आप एक साधारण प्रोसेसर प्रतिस्थापन के बजाय कई सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर अपग्रेड, या यहां तक ​​कि आपके सीपीयू, ओएस और सॉफ्टवेयर के पूर्ण प्रतिस्थापन की आवश्यकता का सामना कर सकते हैं।

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