Printer क्या हैं? इसके प्रकारों को विस्तार से जानिए?

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What are Printers? Know it’s Types in Details in Hindi?

Printer
प्रिंटर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाईस है जिसका उपयोग डिजिटल सूचना को कागज पर छापने के लिए किया जाता हैंयह कम्प्युटर का बाहरी आउटपुट डिवाईस होता है,जो कम्प्युटर में सॉफ्ट कॉपी को हार्ड कॉपी में परिवर्तित करने का काम करता हैं। 

प्रिंटर का इतिहास 

पहला कम्प्युटर प्रिंटर 19वीं शताब्दी में कम्प्युटर के पितामह मा. Charles Babbage ने अपने Difference Engine के लिए डिजाईन किया था. मगर 20वीं शताब्दी तक भी यह डिजाईन नही बन पाया था. जापान की कंपनी Epson ने वर्ष 1968 में EP-101 नामक पहला इलेक्ट्रॉनिक प्रिंटर का आविष्कार किया. ये शुरुआती प्रिंटर आमतौर पर टाईपराईटर तथा टेलीटाईप मशीन का संकर होते थे
प्रिंटर की स्पीड में बढ़ती माँग के कारण विशेषकर कंप्यूटर उपयोग के लिए प्रिंटर सिस्टम के विकास की ओर कार्य किया गया. तथा कुछ वर्षों के बाद 1984 में कम कीमत का HP Laser Jet को लॉन्च किया गया. परन्तु 2000 तक आते-आते इंटरनेट धीरे-धीरे विश्व भर में लोगों तक पहुँच रहा था
जिससे ईमेल का उपयोग कर दस्तावेज (डॉक्यूमेंट) के आदान प्रदान किया जा सकता था तथा प्रिंटिंग की आवश्यकता में कमी लाने सहायता मिली वर्ष 2010 में 3D प्रिंटिंग आकर्षण का केंद्र बन गया. जिससे 3D ऑब्जेक्ट को सरल बना दिया हैं.  परन्तु वर्तमान समय मे यह प्रिंटिंग डिवाइस पूरी तरह से विकसित नहीं हुए हैं, जिस कारण इनकी पहुँच काफी कम है

प्रिंटर क्या हैं?

प्रिंटर एक ऑनलाइन आउटपुट डिवाइस (Online Output Device) है जो कंप्यूटर से प्राप्त जानकारी को कागज पर छापता है कागज पर आउटपुट (Output) की यह प्रतिलिपि हार्ड कॉपी (Hard Copy) कहलाती है कंप्यूटर से जानकारी का आउटपुट (Output) बहुत तेजी से मिलता है और प्रिंटर (Printer) इतनी तेजी से कार्य नहीं कर पाता इसलिये यह आवश्यकता महसूस की गयी कि जानकारियों को प्रिंटर (Printer) में ही स्टोर (Store) किया जा सके इसलिये प्रिंटर (Printer) में भी एक मेमोरी (Memory) होती है जहाँ से यह परिणामों को धीरे-धीरे प्रिंट करता हैं

प्रिंटर के उपयोग और तकनीक के आधार पर इन्हे कई वर्गों में बांट सकते हैं. मगर कम्प्युटर प्रिंटर को हम मुख्यत: इन दो श्रेणीयों में बांट सकते हैं:-

  1. Impact Printers
  2. Non-Impact Printers

प्रिंटर के प्रकार


प्रिंटिंग विधि 

प्रिंटिंग (Printing) में प्रिंट करने की विधि बहुत महत्वपूर्ण कारक है प्रिंटिंग विधि (Printing Method) दो प्रकार की इम्पैक्ट प्रिंटिंग (Impact Printing)  तथा नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटिंग (Non-Impact Printing) होती है

इम्पैक्ट प्रिंटिंग 

Impact Printer वे प्रिंटर होते हैं जो अपना Impact (प्रभाव) छोड़ते हैं जैसे टाइपराइटर प्रिंटिंग (Printing) की यह विधि टाइपराइटर (Typewriter) की विधि के समान होती है जिसमें धातु का एक हैमर (hammer) या प्रिंट हैड (Print Head) होता है जो कागज व रिबन (Ribbon) से टकराता है इम्पैक्ट प्रिंटिंग (Impact Printing) में अक्षर या कैरेक्टर्स ठोस मुद्रा अक्षरों (Solid Font) या डॉट मेट्रिक्स (Dot Matrix) विधि से कागज पर उभरते हैं Impact Printer की अनेक विधियाँ हैं जैसे:-
  1. Dot Matrix Printer
  2. Daisy Wheel Printer
  3. line Printer
  4. Chain Printer
  5. Drum Printer etc.

डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर

यह एक इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printer) है अतः यह प्रिंटिंग करते समय बहुत शोर करता हैं इस प्रिंटर के प्रिंट हैड (Print Head) में अनेक पिनो (Pins) का एक मैट्रिक्स (Matrix) होता है और प्रत्येक पिन के रिबिन (Ribbon) और कागज (Paper) पर स्पर्श से एक डॉट (Dot) छपता हैं अनेक डॉट मिलकर एक कैरेक्टर बनाते (Character) है प्रिंट हैड (Print Head) में 7, 9, 14, 18 या 24 पिनो (Pins) का उर्ध्वाधर समूह (Horizontal Group) होता है एक बार में एक कॉलम की पिने प्रिंट हैड (Print Head) से बाहर निकलकर डॉट्स (Dots) छापती है जिससे एक कैरेक्टर अनेक चरणों (Steps) में बनता है और लाइन की दिशा में प्रिंट हैड आगे बढ़ता जाता है

डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर (Dot Matrix Printer) की प्रिंटिंग गति (Printing Speed) 30 से 600 कैरेक्टर प्रति सेकंड (CPS-Character Per Second) होती हैं डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर (Dot Matrix Printer) में पूर्व निर्मित मुद्रा अक्षर (Font) नहीं होते हैं इसलिये ये विभिन्न आकार-प्रकार और भाषा के कैरेक्टर (Character) ग्राफिक्स (Graphics) आदि छाप सकता हैं यह प्रिंट हैड (Print Head) की मदद से कैरेक्टर बनाते है जो की कोड (0 और 1) के रूप में मेमोरी (Memory) से प्राप्त करते है प्रिंट हैड में इलेक्ट्रॉनिक सर्किट (Electronic Circuit) मौजूद रहता है जो कैरेक्टर को डिकोड (Decode) करता हैं इस प्रिंटर की प्रिंट क्वालिटी (Quality) अच्छी नहीं होती हैं

डेजी व्हील प्रिंटर

यह ठोस मुद्रा अक्षर (Solid Font) वाला इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printer) है इसका नाम डेजी व्हील (Daisy Wheel) इसलिये दिया गया है क्योंकि इसके प्रिंट हैड की आकृति एक पुष्प गुलबहार (Daisy) से मिलती हैं डेजी व्हील प्रिंटर (Daisy Wheel Printer) धीमी गति का प्रिंटर है लेकिन इसके आउटपुट की स्पष्टता उच्च होती है इसलिये इसका उपयोग पत्र (Letter) आदि छापने में होता है और यह लैटर क्वालिटी प्रिंटर (Letter Quality Printer) कहलाता है

इसके प्रिंट हैड (Print Head) में चक्र या व्हील (Wheel) होता है जिसकी प्रत्येक तान (Spoke) में एक कैरेक्टर (Character) का ठोस फॉण्ट (Solid Font) उभरा रहता हैव्हील कागज की क्षैतिज दिशा में गति करता है और छपने योग्य कैरेक्टर का स्पोक(Spoke) व्हील के घूमने से प्रिंट पोजीशन (Position) पर आता है एक छोटा हैमर (Hemmer) स्पोक रिबन (Ribbon) और कागज पर टकराता हैं जिससे अक्षर कागज पर छप जाता है इस प्रकार के प्रिंटर अब बहुत कम उपयोग में हैं


लाइन प्रिंटर

यह भी एक इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printer) हैं बड़े कंप्यूटरों के लिए उच्च गति (High Speed) के प्रिंटरो की आवश्यकता होती है उच्च गति के प्रिंटर एक बार में एक कैरेक्टर छापने की बजाय एक लाइन पृष्ट को एक बार में छाप सकते है इनकी छापने की गति 300 से 3000 लाइन प्रति मिनिट (Line Per Minute) होती हैं ये प्रिंटर Mini व Mainframe कंप्यूटर में बड़े कार्यों हेतु प्रयोग किये जाते है लाइन प्रिंटर (Line Printer) तीन प्रकार के होते हैं-
  1. Drum Printer
  2. Chain Printer
  3. Band Printer

ड्रम प्रिंटर

ड्रम प्रिंटर में तेज घूमने वाला एक ड्रम (Drum) होता है जिसकी सतह पर अक्षर (Character) उभरे रहते हैं एक बैंड (Band) पर सभी अक्षरों का एक समूह (Set) होता हैं, ऐसे अनेक बैंड सम्पूर्ण ड्रम पर होते हैं जिससे कागज पर लाइन की प्रत्येक स्थिति में कैरेक्टर छापे जा सकते हैं ड्रम तेजी से घूमता हैं और एक घूर्णन (Rotation) में एक लाइन छापता है एक तेज गति का हैमर (Hammer) प्रत्येक बैंड के उचित कैरेक्टर पर कागज के विरुद्ध टकराता हैं और एक घूर्णन पूरा होने पर एक लाइन छप जाती हैं


चेन प्रिंटर 

इस प्रिंटर में तेज घूमने वाली एक चेन (Chain) होती है जिसे प्रिंट चेन (Print Chain) कहते हैं चेन में कैरेक्टर छपे होते है प्रत्येक कड़ी (Link)  में एक कैरेक्टर का फॉण्ट (Font) होता हैं प्रत्येक प्रिंट पोजीशन (Print Position) पर हैमर (Hammer) लगे होते हैं  जिससे हैमर (Hammer) कागज पर टकराकर एक बार में एक लाइन प्रिंट करता हैं


बैंड प्रिंटर 

यह प्रिंटर चेन प्रिंटर (Chain Printer) के समान कार्य करता है इसमें चेन (Chain) के स्थान पर स्टील का एक प्रिंट बैंड (Print Band) होता है इस प्रिंटर में भी हैमर (Hammer) एक बार में एक लाइन प्रिंट करता हैं

नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटिंग 

नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटिंग (Non-Impact Printing) में प्रिंट हैड (Print Head) या कागज (paper) के मध्य संपर्क नहीं होता है इसमें लेजर प्रिंटिंग (Lager Printing) द्वारा तकनीक दी जाती है इसलिये इसकी Quality High होती है Non-Impact Printer की अनेक विधियाँ हैं जैसे:-

  1. Laser Printer
  2. Photo Printer
  3. Inkjet Printer
  4. Portable Printer
  5. Multi functional Printer
  6. Thermal Printer.


लेजर प्रिंटर

लेजर प्रिंटर (Lager printer) नॉन इम्पैक्ट पेज प्रिंटर हैं लेजर प्रिंटर का प्रयोग कंप्यूटर सिस्टम में 1970 के दशक से हो रहा हैं पहले ये Mainframe Computer में प्रयोग किये जाते थे  1980 के दशक में लेजर प्रिंटर का मूल्य लगभग 3000 डॉलर था ये प्रिंटर आजकल अधिक लोकप्रिय हैं क्योकि ये अपेक्षाकृत अधिक तेज और उच्च क्वालिटी में टेक्स्ट और ग्राफिक्स  छापने में सक्षम हैं अधिकांश लेजर प्रिंटर (Laser Printe) में एक अतिरिक्त माइक्रो प्रोसेसर(Micro Processor) रेम (Ram) व रोम (Rom) का प्रयोग (use) किया जाता है यह प्रिंटर भी डॉट्स (dots) के द्वारा ही कागज पर प्रिंट (print) करता है परन्तु ये डॉट्स (dots) बहुत ही छोटे व पास-पास होने के कारण बहुत सपष्ट प्रिंट (print) होते है इस प्रिंटर में कार्टरेज का प्रयोग किया जाता है जिसके अंदर सुखी स्याही (Ink Powder) को भर दिया जाता हैं

लेजर प्रिंटर के कार्य करने की विधि मूलरूप से फोटोकॉपी मशीन की तरह होती है लेकिन फोटोकॉपी मशीन में तेज रोशनी का प्रयोग किया जाता है लेजर प्रिंटर )Laser Printer 300 से लेकर 600 DPI  (Dot Per Inch) तक या उससे भी अधिक रेजोलुशन की छपाई करता है रंगीन लेजर प्रिंटर उच्च क्वालिटी का रंगीन आउटपुट देता हैं इसमें विशेष टोनर होता है जिसमे विभिन्न रंगों के कण उपलब्ध रहते हैं  यह प्रिंटर बहुत महंगे होते है क्योकि इनके छापने की गति उच्च होती हैं तथा यह प्लास्टिक की सीट या अन्य सीट पर आउटपुट (output) को प्रिंट (print) कर सकते है| यह एक ऐसी तकनीक है जिसमे कागज पर wax आधारित रिबन से अक्षर प्रिंट (Print) किये जा सकते है इस प्रिंटर के द्वारा किया गया प्रिंट ज्यादा समय के लिए स्थित नहीं रहता अर्थात कुछ समय बाद प्रिंट किया गया Matter पेपर से मिट जाता हैं सामान्यतः इन प्रिंटरो का प्रयोग ATM मशीन में किया जाता हैं


फोटो प्रिंटर 

फोटो प्रिंटर एक रंगीन प्रिंटर होता है जो फोटो लैब की क्वालिटी फोटो पेपर पर छापते हैं इसका इस्तेमाल डॉक्युमेंट्स की प्रिंटिंग के लिए किया जा सकता है इन प्रिंटरो के पास काफी बड़ी संख्या में नॉजल होते है जो काफी अच्छी क्वालिटी की इमेज के लिए बहुत अच्छे स्याही के बूंद छापता है| कुछ फोटो प्रिंटर में मिडिया कार्ड रिडर भी होते है ये 4×6 फोटो को सीधे डिजिटल कैमरे के मिडिया कार्ड से बिना किसी कंप्यूटर के प्रिंट कर सकता है ज्यादातर इंकजेट प्रिंटर और उच्च क्षमता वाले लेजर प्रिंटर उच्च क्वालिटी की तस्वीरे प्रिंट करने में सक्षम होते हैं कभी कभी इन प्रिंटरो को फोटो प्रिंटर के रूप में बाजार में लाया जाता है बड़ी संख्या में नॉजल तथा बहुत अच्छे बूंदों के अतिरिक्त इन प्रिंटरो में अतिरिक्त फोटो स्यान (cyan) हल्का  मैजेंटा (magenta) तथा हल्का काला (black) रंगों में रंगीन कर्टेज होता है ये अतिरिक्त रंगीन कार्टेज को सहायता से अधिक रोचक तथा वास्तविक दिखने जैसा फोटो छापते है इसका परिणाम साधारण इंकजेट तथा लेजर प्रिंटर से बेहतर होता है


इंकजेट प्रिंटर

यह Non Impact Printer है जिसमे एक Nozzle (नोजल) से कागज पर स्याही की बूंदो की बौछार करके कैरेक्टर व ग्राफिक्स प्रिंट किये जाते है इस प्रिंटर का आउटपुट बहुत स्पष्ट होता हैक्योंकि इसमें अक्षर का निर्माण कई डॉट्स से मिलकर होता हैं रंगीन इंकजेट प्रिंटर में स्याही के चार नोजल होते है नीलम लाल पीला काला इसलिए इसको CMYK प्रिंटर भी कहा जाता हैं तथा ये चारो रंग मिलकर किसी भी रंग को उत्पन्न कर सकते है इसलिए इनका प्रयोग (use) सभी प्रकार के रंगीन प्रिंटर (Colored Printer) में किया जाता है|इस प्रिंटर में एक मुख्य समस्या है कि इसके प्रिंट हैड में इंक क्लौगिंग (Ink Clogging) हो जाती है यदि इससे कुछ समय तक प्रिंटिंग ना कि जाये तो। इसके नोजल के मुहाने पर स्याही जम जाती है। जिससे इसके छिद्र बंद हो जाते है। इस समस्या को इंक क्लिोंगिग कहा जाता है। आजकल इस समस्या को हल कर लिया गया है। इसके अलावा इस प्रिंटर की प्रिंटिंग पर यदि नमी आ जाये तो इंक फैल जाती है। इसकी प्रिंटिंग क्वालिटी प्रायः 300 Dot Per Inch होती हैं


पोर्टेबल प्रिंटर

पोर्टेबल प्रिंटर छोटे कम वजन वाले इंकजेट या थर्मल प्रिंटर होते है जो लैपटॉप कंप्यूटर द्वारा यात्रा के दौरान प्रिंट निकलने की अनुमति देते है यह ढोने में आसान इस्तेमाल करने में सहज होते है मगर कापैक्ट डिज़ाइन की वजह से सामान्य इंकजेट प्रिंटरो के मुकाबले महंगे होते है। इनकी प्रिंटिंग की गति भी सामान्य प्रिंटर से कम होती है कुछ प्रिंट डिजिटल कैमरे से तत्काल फोटो निकालने के लिए इस्तेमाल किये जाते है इसलिए इन्हें पोर्टेबल फोटो प्रिंटर कहा जाता है


मल्टीफंक्शनल/ऑल इन वन प्रिंटर

ऐसा प्रिंटर जिसके द्वारा हम किसी Document को Scan कर सकते हैं उसे प्रिंट कर सकते है तथा प्रिंट करने के बाद फैक्स भी कर सकते हैं उसे मल्टीफंक्शनल प्रिंटर कहा जाता हैं मल्टीफंक्शनल/ऑल इन वन प्रिंटर को मल्टीफंक्शनल डिवाइस (Multi Function Device) भी कहा जाता है यह एक ऐसी मशीन है जिसके द्वारा कई मशीनों के कार्य जैसे प्रिंटर स्कैनर कॉपीयर तथा फैक्स किये जा सकते है मल्टीफंक्शन प्रिंटर घरेलु कार्यालयों (Home Offices) में बहुत लोकप्रिय होता हैं इसमें इंकजेट या लेजर प्रिंट विधि का प्रयोग हो सकता है कुछ मल्टीफंक्शन प्रिंटरो में मिडिया कार्ड रिडर का प्रयोग होता है जो डिजिटल कैमरा से कंप्यूटर के प्रयोग के बगैर सीधे-सीधे इमेज छाप सकता है


थर्मल ट्रांसफर प्रिंटर 

थर्मल पेपर एक विशेष जुर्माना पेपर है जो गर्मी के संपर्क में रंग बदलने के लिए तैयार सामग्री के साथ लेपित होता है। इसका उपयोग थर्मल प्रिंटर में और विशेष रूप से सस्ते या हल्के उपकरणों जैसे मशीनों, नकदी रजिस्टर, और क्रेडिट कार्ड टर्मिनलों में किया जाता है। कागज की सतह को डाई के एक ठोस-राज्य मिश्रण और उपयुक्त मैट्रिक्स के साथ लेपित किया जाता है; एक उदाहरण के रूप में एक fluoran leuco डाई का एक संयोजन। जब मैट्रिक्स को पिघलने बिंदु से ऊपर गर्म किया जाता है, डाई एसिड के साथ प्रतिक्रिया करता है, उसके रंगीन रूप में बदल जाता है, और परिवर्तित रूप तब मेटास्टेबल राज्य में संरक्षित होता है जब मैट्रिक्स जल्दी से पर्याप्त ठोस हो जाता है। थर्मल पेपर में रिएक्टेंट एसिड अक्सर बिस्फेनॉल ए (बीपीए) होता है।

 आम तौर पर, कोटिंग गर्म होने पर काला हो जाती है, लेकिन कभी-कभी नीले या लाल रंग की कोटिंग्स का उपयोग कभी-कभी किया जाता है। जबकि एक खुली गर्मी स्रोत, जैसे कि लौ, कागज को विघटित कर सकती है, पेपर में तेजी से स्वाइप की गई एक नाखून भी घर्षण से पर्याप्त गर्मी उत्पन्न करेगी ताकि एक निशान उत्पन्न हो सके। मल्टीकोरर थर्मल पेपर पहली बार 1990 के दशक (1993) में फ़ूजी थर्मो-ऑटोक्रोम (टीए) प्रणाली की शुरूआत के साथ उपलब्ध हो गया। यह पोलराइड ज़िंक (“शून्य-स्याही”) प्रणाली के विकास के बाद 2000 के दशक (2007) के उत्तरार्ध में हुआ था। इन दोनों विधियों में तीन अलग रंगीन परतों के साथ बहु-परत कोटिंग्स पर भरोसा है, लेकिन प्रत्येक परत के स्वतंत्र सक्रियण के लिए विभिन्न विधियों का उपयोग किया जाता है।

 प्रभाव प्रकार प्रिंटर जो थर्मल हेड (हीटिंग तत्व) के साथ गर्मी लगाने के द्वारा प्रिंट और प्रिंट करता है। थर्मल प्रिंटर के रूप में भी जाना जाता है। एक स्याही रिबन का उपयोग कर थर्मासेंसिटिव कलरिंग पेपर और थर्मल ट्रांसफर टाइप ( थर्मल ट्रांसफर प्रिंटर ) का उपयोग करके प्रत्यक्ष थर्मल प्रकार होता है। प्रत्यक्ष थर्मल प्रकार का अक्सर मुखौटा और पसंद के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन उनमें से अधिकतर काला हो जाते हैं, और एक नुकसान होता है कि समय के साथ विघटन करना आसान होता है। थर्मल ट्रांसफर प्रकार के लिए, एक पिघला हुआ स्याही का उपयोग कर एक होता है और एक सब्सिमेबल डाई का उपयोग करके, और एक स्याही रिबन के लिए तीन रंग या चार रंगों का उपयोग करके, पूर्ण रंग अभिव्यक्ति आसान होती है।


प्रिंटर की विशेषताएं 

डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर इम्पैक्ट प्रिंटर का एक उदाहरण है। नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटर्स नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटर की विशेषता है की इसकी काम करने की प्रिक्रिया काफी शांत होती है क्योंकि प्रिंट हेड, कार्ट्रिज, और पेपर के बीच भौतिक संपर्क स्थापित नहीं होता है।

प्रिंटर की उपयोगिता 

प्रिंटर ग्राफिक्स को बहुत ही अच्छी तरह प्रिंट करते हैं और वह प्रिंट दिखने में भी आकर्षक होते हैं इसके लिए हमारे प्रिंटर में पर्याप्त मात्रा में मेमोरी भी होनी चाइए जिससे ये बड़े प्रिंट कर सके अच्छे दिखने वाले। प्रिंटर का मुख्य लाभ यह है कि इनसे कार्बन कॉपी तैयार किया जा सकता है। ये प्रिंटआउट के बोहुत साड़ी प्रतियां प्राप्त करने का सस्ता औए विश्वसनियो तरीका है। प्रिंटर हलके है और कुछ तो इतने छोटे है कि उन्हें छोटे बॉक्स में रखकर इधर उधर ले जाया जा सकता है। प्रिंटर में शोर नही होता, गति तीब्र होते है और ये उच्च गुणबत्ता वाले प्रिंटर है।

प्रिंटर के फ़ायदे 

इन 6 बातों का ध्यान में रखकर खरीदे प्रिंटर, मिलेंगे कई फायदे:-

Jalandhar:- वैसे तो बाजार में मिलने वाले प्रिंटर्स की वैरायटी सैकड़ों में हैं और उनके फीचर्स भी अलग-अलग कामों के हिसाब से दिए जाते हैं। लेकिन जब प्रिंटर लेने की बात आती है तो हम असमंजस में पड़ जाते हैं की कौन-सा प्रिंटर हमारे लिए बेहतर होगा या किस तरह का प्रिंटर लेना चाहिए। इस पोस्ट में हम आपका यह काम आसान करने जा रहे हैं क्योंकि हम आपको प्रिटंर से जुड़ी कुछ ऐसी बाते बताने जा रहे हैं जो प्रिटंर खरीदते समय आपका काम आसान बना सकती हैं।

Take inkjet or laser:- अगर आपको यह निर्णय लेना है तो सबसे पहले तय करें की आप किस तरह की इंक का इस्तेमाल करना चाहते हैं। टोनर और इंक कार्ट्रिज में कीमत का अंतर हो सकता है, तो अपने बजट के हिसाब से आप इसका चयन करें।

How many functions are required in a printer:- कुछ लोग या कंपनियां प्रिंटर और फोटोकॉपी फीचर से ही संतुष्ट होते हैं। वहीं, कई उपभोक्ताओं को प्रिंटर में अधिक फीचर्स जैसे की आल-इन-वन प्रिंटर की जरुरत होती है, जिसमें स्कैन, फैक्स, प्रिंट और फोटोकॉपी सभी हो पाए। इसलिए ये सुनिश्चित कर लें की आपको कितने फंक्शन्स की जरुरत है।

Print speed:- आपको प्रिंटर से कितना काम लेना है? अगर आपको रोजाना ज्यादा प्रिंट निकालने हैं तो आपको फास्ट प्रिंटर की जरुरत होगी।

Connectivity:- आप चाहते हैं की आप अपनी मोबाइल डिवाइस से भी प्रिंट कर सकें या आपको सामान्य कंप्यूटर कनेक्शन वाला प्रिंटर चाहिए। इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी है।

Paper handling:- इसी के साथ आप प्रिंट के साइज का भी ख्याल रखें। अगर आपको बड़े साइज के प्रिंट चाहिए तो साफ है की वैसे प्रिंटर न लें, जो इस काम के लिए सही ना हो।

Office size:- अगर आपके ऑफिस में ज्यादा स्पेस नहीं है और अधिकतर लोग लैपटॉप पर काम करते हैं तो आपके लिए पोर्टेबल प्रिंटर बेहतर विकल्प रहेगा।

प्रिंटर के नुकसान 

कंप्यूटर प्रिंटर कार्ट्रिज वाले पाउडर को टोनर कहते हैं। टोनर के कण इतने महीन होते हैं कि कार्ट्रिज से बाहर वे बड़ी देर तक हवा में तैर सकते हैं और साँस के रास्ते से हमारे फेफड़ों में पहुँच कर हमें बीमार कर सकते हैं।
जर्मनी में फ्राइबुर्ग विश्वविद्यालय के पर्यावरण चिकित्सा और अस्पताल स्वच्छता संस्थान की एक शोध टीम ने इसी को अपनी खोज का विषय बनाया।

वह जानना चाहती थी कि टोनर से उड़ने वाले अत्यंत महीन कण जब हमारे फेफड़ों में पहुँचते हैं, तो उनका क्या असर होता है? उन्होंने टोनर की धूल का फेफड़े की कोषिकाओं के कल्चर यानी संवर्ध से संपर्क कराया। परिणाम उनके लिए बहुत ही आश्चर्यजनक रहा। जैसा कि संस्थान के निदेशक प्रो. फोल्करमेर्स सुंदरमान का कहना है, ‘फेफड़े की इन ‍कोशिकाओं को टोनर की धूल के संपर्क में लाने पर उनके जीनों को बड़ा नुकसान पहुँचा। यह नुकसान इतना व्यापक और गहरा पाया गया कि हमें कहना पड़ेगा कि उससे ‍कोशिकाओं के जीनों में म्यूटेशन पैदा होता है।’

Lung cancer is also possible:- म्यूटेशन को हिंदी में उत्परिवर्तन कहते हैं। यह परिवर्तन आकस्मिक होता है। वह हानिकारक हो भी सकता है और नहीं भी, क्योंकि हो सकता है कि ‍कोशिका अपनी मरम्मत आप कर ले। लेकिन, यह भी हो सकता है कि कुछेक ‍कोशिकाएँ मर जाएँ और मवाद पैदा हो जाए। सबसे बुरा तो तब होगा जब कोई क्षतिग्रस्त ‍‍कोशिका कैंसर की ‍कोशिका में बदल जाए और फेफड़े का कैंसर पैदा करने लगे। सुंदरमान कहते हैं, ‘यह एक संभावना है, जिसे गंभीरता से लेना होगा। ये पहले नतीजे हमें प्रयोगशला में मिले हैं, तब भी वे इस तथ्य के महत्वपूर्ण सूचक हैं कि प्रिंटर जैसे उपकरणों से जो पदार्थ हवा में पहुँच सकते हैं, वे मानव शरीर के भीतर जाकर ‍कोशिकाओं में म्यूटेशन पैदा कर सकते हैं।’

Many more signs:- फ्राइबुर्ग के शोधक और डॉक्टर अभी दावे के साथ यह नहीं कह सकते कि कंप्यूटर प्रिंटरों और फोटोकॉपी मशीनों से स्वास्थ्य के लिए क्या ठोस खतरे पैदा होते हैं। लेकिन संकेत यही हैं कि वे स्वास्थ्य के लिए अच्छे तो नहीं ही हैं। विन्फ्रिड एबनर फ्राइबुर्ग विश्वविद्यालय के पर्यावरण चिकित्सा संस्थान में बहिरंग चिकित्सा विभाग के निदेशक हैं और ऐसे रोगियों की देखभाल करते हैं, जो गंभीर रूप से बीमार हैं।एबनर कहते हैं, ‘वे अक्सर साँस लेने में तकलीफ की शिकायत करते हैं। उनकी श्वासनली के ऊपरी हिस्से में जलन होती है। आँखें जलने, लाल हो जाने या आँखों से पानी आने की बार-बार शिकायत करते हैं।’

Root of printer’s toner problem:- रोगी कई बार पूरे शरीर में अजीब से दर्द की भी शिकायत करते हैं। यह कहना मुश्किल है कि ये सारे लक्षण कंप्यूटर प्रिंटरों के टोनर वाली धूल की ही देन हैं। इसे जानने के लिए और खोज करने की जरूरत है। लेकिन जहाँ तक चिरकालिक तकलीफों की बात है, वैज्ञानिकों को कुछ ठोस इशारे जरूर मिले हैं। उन्होंने पाया कि हर प्रिंटर या फोटोकॉपी मशीन एक समान टोनर-धूल हवा में नहीं फैलाती और यह भी कि हर टोनर की बनावट एक ही जैसी नहीं होती। प्रो. फ्रोल्करमेर्स सुंदरमान के मुताबिक,’यह इस पर भी निर्भर करता है कि टोनर किन चीजों के मेल से बना है। किस मुद्रणविधि का उपयोग किया जा रहा है। किस तरह का कागज इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रिंटर कितना नया या पुराना है। उसका रखरखाव कैसा रहा है। हमने ऐसे भी प्रिंटर पाए, जो टोनर कण उड़ाने वाले पंखे की तरह थे, पर मरम्मत और साफ-सफाई के बाद वे बिल्कुल ठीक हो गए।’

Keep the printer in a separate room:- फ्राइबुर्ग के इन विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रिंटरों और कॉपिंग मशीनों को यथासंभव किसी हवादार अलग कमरे में रखना चाहिए, ताकि उनके टोनर से निकले धूलकण एक जगह जमा न हो सकें। जर्मनी के ही रोस्टोक विश्वविद्यालय के एक अप्रकाशित अध्ययन में यह भी पाया गया है कि प्रिंटर में इस्तेमाल होने वाले टोनर के सूक्ष्म कण एस्बेस्टस की तरह ही कैंसरजनक भी हो सकते हैं। उनकी मरम्मत और दैनिक रखरखाव का काम करने वाले तकनीशियनों के बीच फेफड़े के कैंसर के मामले समय के साथ बढ़ते गए पाए गए।

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