Router क्या हैं? Router के बारें में विस्तार से जानिए?

0
(0)

What is Router? Know Router in Details in Hindi?


 ROUTER

ROUTER
Router एक छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होता है, जो वायर्ड या वायरलेस कनेक्शन के माध्यम से कई कंप्यूटर नेटवर्क को कनेक्‍ट करते हैं। Routers डिवाइस में सॉफ़्टवेयर होता हैं जो Router एक कंप्‍यूटर नेटवर्क को दूसरे कंप्‍यूटर नेटवर्क से कनेक्‍ट करता हैं या एक कंप्‍यूटर नेटवर्क को इंटरनेट से कनेक्‍ट करता हैं। इसलिए Route कि पोजिशन आपके मॉडेम और कंप्यूटर के बीच होती है।


हिस्ट्री ऑफ़ Router

एक राउटर की आइडीया, जिसे गेटवे कहा जाता था, कंप्यूटर नेटवर्किंग रिसर्चर्स का एक ग्रुप से आया जो एक अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क वर्किंग ग्रुप नाम के एक आर्गेनाइजेशन था, जो 1972 में इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर इन्फॉर्मेशन प्रोसेसिंग की एक कमेटी बन गई।
1974 में, पहला Router डेवलप किया गया था और 1976 तक, PDP-11 आधारित Router इंटरनेट का एक प्रोटोटाइप एक्सपेरिमेंटल वर्जन बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। 
1970 के दशक के मध्य से लेकर 1980 के दशक तक मिनी कंप्यूटरों को Router के रूप में इस्तेमाल किया गया था।
आज, हाई-स्पीड मॉडर्न Router वास्तव में तेजी से डेटा पैकेट फॉरवार्डिंग के लिए अतिरिक्त हार्डवेयर वाले कंप्यूटर और एन्क्रिप्शन जैसे विशेष सिक्‍युरिटी फ़ंक्शन हैं।


Router का परिचय 

Router एक हार्डवेयर डिवाइस है जो की इनकमिंग नेटवर्क पैकेट्स को रिसीव करने के बाद Analyse करके दूसरे नेटवर्क मे Forward या Move करते है। 
अगर हम इंटरनेट के केस मे Router की बात करते है तो राऊटर पैकेट्स को एनालाइज करके Next Network Point का पता लगा कर Packet को डेस्टिनेशन पर फॉरवर्ड करता है। 
Router पैकेट्स को दूसरे नेटवर्क इंटरफ़ेस मे कन्वर्ट, ड्राप या फिर दूसरा नेटवर्क रिलेटेड ऑपरेशन भी Perform करता है। Routers को अगर Simple language मे Define किया जाये तो कहा जा सकता है।
यह एक Small Electronic Device होती है जो की Multiple Computer Networks को Wired or Wireless Connections की help से आपस मे Connect करती है And जो भी Packet Router को Receive होते है उनको Analyse करके दूसरे नेटवर्क मे Forward/Pass करने का काम करती है।


Router क्या हैं?

Router एक हार्डवेयर नेटवर्किंग डिवाइस है, 1974 में पहला Router डेवलप किया गया था। Router का इस्तेमाल नेटवर्क को जोड़ने में किया जाता है।
नेटवर्क को इंटरनेट से कनेक्‍ट करने के लिए Router मॉडेम से कनेक्‍ट होना चाहिए, इसलिए, अधिकांश Router में एक विशिष्ट Ethernet Port होता है जिसे केबल या डीएसएल मॉडेम के Ethernet Port से कनेक्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
Routers छोटे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होते हैं जो वायर्ड या वायरलेस कनेक्शन के माध्यम से कई कंप्यूटर नेटवर्क को कनेक्‍ट करते हैं।
Routers डिवाइस में सॉफ़्टवेयर होता हैं जो किसी विशेष ट्रांसमिशन के लिए, उपलब्ध Paths का सर्वोत्तम Path निर्धारित करने में सहायता करते हैं।
आसन भाषा में Router एक कंप्‍यूटर नेटवर्क को दूसरे कंप्‍यूटर नेटवर्क से कनेक्‍ट करता हैं या एक कंप्‍यूटर नेटवर्क को इंटरनेट से कनेक्‍ट करता हैं।
इसलिए Route कि पोजिशन आपके मॉडेम और कंप्यूटर के बीच होती है।नेटवर्क को इंटरनेट से कनेक्‍ट करने के लिए Route मॉडेम से कनेक्‍ट होना चाहिए। इसलिए, अधिकांश राउटर में एक विशिष्ट ईथरनेट पोर्ट होता है जिसे केबल या डीएसएल मॉडेम के ईथरनेट पोर्ट से कनेक्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।


Router के प्रकार 

  1. WIRELESS ROUTER (WI- FI)
  2.  BROADBAND ROUTER
  3. EDGE ROUTER
  4. CORE ROUTER
WIRELESS ROUTER (WI-FI):- आज के समय में सबसे ज्यादा यूज होने वाला राउटर वाई-फाई राउटर होता है जोकि सभी के घरों पर होगा । इसकी सबसे मुख्य विशेषता यह है की या एक समय पर कई सारे डिवाइसों को डाटा प्रदान करा पाता है इसकी क्षमता एक मोबाइल फोन से कई गुनी है इसकी स्पीड 100 MB /PS तक की होती है इसकी सहायता से आप कम से कम 20 डिवाइस को टाटा प्रोवाइड करा पाते हैं और उनकी स्पीड भी 100 MB /PS तक की होती है। 
इसकी रेंज सीमा 100 फिट ( 30 मीटर ) तक की होती है परंतु किसी कारण की स्पीड स्लो होती है वह कारण यह है कि आपके घरों में जो बड़े-बड़े फर्नीचर, अलमारियां एवं घर के बगल में बड़ी-बड़ी बिल्डिंग यह सभी प्रकार के मुख्य कारण हैं जो नेटवर्क की क्षमता को बहुत ही कम कर देते हैं जिसके कारण आपको नेटवर्क का लाभ उठाने में बहुत ही कठिनाइयां होती हैं। 
इन सभी दिक्कतों से बचने के लिए आपको अपना यह डिवाइस घर की सबसे ऊपर की मंजिल पर इसे रखना चाहिए या फिर इसे आपको घर के सेंटर में रखना चाहिए । जिससे की आपको एक बेहतर नेटवर्क प्राप्त हो। इसे आप अपने घरों के सरफेस पर मत रखें। इसे आप किसी टेबल पर सुरक्षित रख सकते हैं जिसके कारण आपको एक बेहतर नेटवर्क प्राप्त होगा प्राप्त होगा। जिसके परिणाम स्वरूप आपको घर के कोने कोने में नेटवर्क की सुविधा प्राप्त होगी।
WIRELESS ROUTER (WI-FI)
BROADBAND ROUTER:- यह एक ऐसा माध्यम है जो कि केवल दो या दो से अधिक के कंप्यूटर को आपस में जोड़ता है और नेटवर्क की सुविधा प्रदान करता है। यह केबल की सहायता से कंप्यूटर को नेटवर्क प्रदान करता है। अगर केबल खराब होने पर नेटवर्क की सुविधा नहीं प्राप्त की जा सकती है इसकी रेंज केबल पर निर्धारित होती है।
केबल की लंबाई जितनी होगी उतना ही इसकी रेंज होगी। इसकी स्पीड 100 MBPS से 150 MBPS तक हो सकती है। अगर ब्रॉडबैंड अच्छी क्वालिटी का है तो इसकी स्पीड अधिक हो सकती है।
BROADBAND ROUTER
EDGE ROUTER:- इस प्रकार के राउटर को आईएसपी (इंटरनेट सेवा प्रदाता) के किनारे रखा जाता है। बाहरी प्रोटोकॉल जैसे BGP (बोर्डर गेटवे प्रोटोकॉल) को दुसरे आईएसपी के BGP के साथ conifigure जाता है Edge Routers वह Routers होते है जो बाहरी प्रोटोकॉल के बिच सामंजस्य स्थापित करते है।
EDGE ROUTER
CORE ROUTER:- CORE ROUTER यह अलग अलग के DISTRIBUTED ROUTER को आपस में जोड़ने के लिए प्रयोग किया जाता है मतलब अगर एक कंपनी है जिसके बहुत सारे ROUTER होंगे। जो अलग-अलग क्षेत्र में होंगे। इन सभी क्षेत्रों के राउटर को आपस में जोड़ता है। CORE ROUTER का बहुत बड़ा USE है या सबसे अधिक प्रयोग होने वाला राउटर है जो की बड़ी-बड़ी कंपनियों में प्रयोग होता है।
CORE ROUTER


Router के मुख्य कंपोनेंट

  1. RAM
  2. ROM
  3. CPU
  4. FLASH
RAM:- इसे डायनामिक रेंडम एक्सेस मेमोरी भी कहा जाता है RAM Ciso Router के CPU का वर्किंग एरिया होता है। इस मेमोरी में Running Configuration File और Routing Table Store होती है।
ROM:- यह Read only Memory होती है यह राउटर में Hardwired होती है। ROM के अंदर Bootstrap Program होता है जो Power on Self Text Perform करता है। इसे ROM Monitor Mode कहां जाता है जब एक राउटर IOS Find नहीं कर पाता है। तो वह ROM से ही Boot होता है।
FLASH:- BY DEFAULT सबसे पहले और राउटर IOS के लिए Flash Memory को ही Search करता है। और IOS को Boot करता है। यह Electronically Erasable Programmable Read only Memory होती है।


Router कैसे काम करते हैं?

एक राउटर उपलब्ध Routes और उनकी कंडिशन का एक टेबल बनाता है और किसी भी पैकेट के लिए सर्वोत्तम मार्ग निर्धारित करने के लिए डिस्टेंस और कॉस्‍ट एल्गोरिदम के साथ इस इनफॉर्मेशन का उपयोग कर सकता है।
टेक्निकल शब्दों में, एक राउटर एक लेयर 3 नेटवर्क गेटवे डिवाइस है, जिसका अर्थ है कि यह दो या अधिक नेटवर्क्स को जोड़ता है और राउटर OSI मॉडल की नेटवर्क लेयर पर ऑपरेट होता है।
रूटर में एक प्रोसेसर (CPU), कई प्रकार की डिजिटल मेमोरी और इनपुट आउटपुट (I/O) इंटरफेस होते हैं।
Routes नेटवर्क लेयर एड्रेस या लॉजिकल एड्रेस IP address को एक्‍सेस होता हैं। इसमें एक Routing Table होता हैं, जो इसे Route के बारे में निर्णय लेने में सक्षम बनाता है, उदाहरण के लिए ट्रांसमिशन के लिए सोर्स और डेस्टिनेशन के बिच कौनसे संभावित पाथ उपलब्‍ध हैं और इनमे सर्वोत्‍तम पाथ कौनसा हैं।
यह Routing Table डायनामिक होता हैं और राउटिंग प्रोटोकॉल से अपडेट होता हैं।
Routes एक कनेक्‍टेड नेटवर्क से पैकेट प्राप्‍त करता हैं और उसे दूसरे कनेक्‍टेड नेटवर्क को पास करता हैं। एक बार जब Routes पैकेट के लिए सर्वोत्तम मार्ग का पता लगा लेता है, तो यह पैकेट को उपयुक्त नेटवर्क के साथ दूसरे राउटर से गुजरता है। यह राउटर डेस्टिनेशन एड्रेस को चेक करता है और पैकेट को सबसे अच्छे मार्ग से सोर्स नेटवर्क पर भेजता है।


Router की विशेषताएँ 

  1. राउटर का मुख्य उद्देश्य कई नेटवर्कों को जोड़ना है और फॉरवर्ड पैकेट्स को या तो अपने नेटवर्क या अन्य नेटवर्क के लिए किस्मत में लाना है।
  2. राउटर को एक लेयर -3 डिवाइस माना जाता है, क्योंकि इसका प्राथमिक अग्रेषण निर्णय लेयर -3 आईपी पैकेट, विशेष रूप से गंतव्य आईपी पते की जानकारी पर आधारित होता है।
  3. यह दो नेटवर्क से जुड़ता है, एक से दूसरे तक सूचनाओं को पहुंचाता है। यह नेटवर्क को एक दूसरे से बचाता है, एक पर यातायात को अनावश्यक रूप से फैलने से रोकता है।
  4. भले ही कितने नेटवर्क संलग्न हों, राउटर का मूल संचालन और कार्य समान रहता है।


Router का उपयोग 

  1. राऊटर की मदद से विभिन्न कलाकृति इथरनेट, टोकन रिंग आदि नेटवर्क को कनेक्ट किया जा सकता हैं।
  2. राऊटर में मौजूद डायनामिक रूटिंग तकनीक के इस्तेमाल से यह इंटरनेटवर्क में Best Path चुन सकता हैं।
  3. राऊटर Conllision डोमेन के निर्माण कर नेटवर्क ट्रैफ़िक को काफी कम करने का कार्य करता हैं।
  4. इसके साथ ही राऊटर बोर्डकॉस्ट डोमेन का निर्माण कर नेटवर्क ट्रैफिक में कमी लाने में साहयता करता हैं।


Wi-Fi राउटर खरीदने वाले हैं तो इन बातों का रखें खास ख्याल

कुछ लोग तो धीमे नेटवर्क से समझौता कर सकते हैं पर ज्यादातर लोग बेहतर की उम्मीद करते हैं। वे अपनी सुविधा के अनुसार कई सिस्टमों पर इंटरनेट इस्तेमाल करना चाहते हैं, साथ में इंटरनेट स्पीड भी तेज हो और घर के हर कमरे में नेटवर्क मिले, ऐसे में राउटर के बारे में यह सब जानना बेहद ही अहम हो जाता है।
अगर आप अपने घर में Wi-Fi का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो संभव है कि आप अपने इंटरनेट प्रोवाइडर द्वारा दिए गए फ्री राउटर का इस्तेमाल कर रहे होंगे। कई लोगों के लिए यह व्यवस्था सुविधाजनक है क्योंकि वह सेट-अप की माथापच्ची से बच जाते हैं और साथ में पैसे व समय की भी बचत।
पर समस्या की शुरुआत यहां से होती है, कभी कभार नेटवर्क धीमा हो जाता है या फिर घर के कई हिस्सों में नेटवर्क नहीं मिलता। पर राउटर के बारे में जरूरी जानकारी नहीं होने के कारण आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकते।
इसके अलावा लोग खुद से राउटर खरीदने से भी बचते हैं। क्योंकि उन्हें इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता। या फिर जो जानकारियां उपलब्ध हैं, उनकी भाषा बेहद ही तकनीकी हैं जिसे पढ़ना किसी साइंस के लेक्चर सुनने जैसा होता है।
कुछ लोग तो धीमे नेटवर्क से समझौता कर सकते हैं पर ज्यादातर लोग बेहतर की उम्मीद करते हैं। वे अपनी सुविधा के अनुसार कई सिस्टमों पर इंटरनेट इस्तेमाल करना चाहते हैं, साथ में इंटरनेट स्पीड भी तेज हो और घर के हर कमरे में नेटवर्क मिले, ऐसे में राउटर के बारे में यह सब जानना बेहद ही अहम हो जाता है।
इंटरनेट के साथ भी और उसके बिना भी:- Wi-Fi राउटर को मुख्यतः इंटरनेट कनेक्शन शेयर करने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है, लेकिन यह इसकी एक मात्र खासियत नहीं है। अगर आपके पास एक्टिव इंटरनेट कनेक्शन नहीं है तो भी आप अपने स्मार्टफोन्स, टैबलेट्स, टीवी और कंम्प्यूटर को इसके जरिए कनेक्ट कर सकते हैं।
ज्यादातर यूजर्स को राउटर की जरूरत कई डिवाइसेज पर इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए होती है। आपका इंटरनेट कनेक्शन या तो केबल वाला होगा या फिर ADSL। केबल कनेक्शन होने की स्थिति में आपको अपने इंटरनेट प्रोवाइडर से पूछ लेना चाहिए कि आपका कनेक्शन कैसा है। 
सामान्य तौर पर आपको एक राउटर के अलावा किसी और डिवाइस की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, अगर आपके पास DSL कनेक्शन है और BSNL, MTNL और एयरटेल जैसी कपंनी सर्विस प्रोवाइडर हैं तो आपको राउटर के साथ ADSL मॉडेम की भी जरूरत पड़ेगी। ऐसी परिस्थिति में बिल्ट इन ADSL मॉडेम वाला राउटर खरीदना ज्यादा बेहतर होगा। 
हालांकि इन राउटरों की कीमत थोड़ी ज्यादा होती है पर मजबूरी ही ऐसी है।वैसे तो आपको मार्केट में कई किस्म के और अलग-अलग फीचर्स वाले राउटर उपलब्ध हैं, लेकिन इसे खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान।
Router का वाई-फाई स्टेंडर्ड (802.11 a/b/g/n/ac):- सबसे पहले आपको यह देखना होगा कि राउटर किस वाई-फाई स्टेंडर्ड को सपोर्ट करता है। पुराने मॉडल पर 802.11 ‘b’ or ‘g’ का सपोर्ट मिलता है जबकि नए राउटर्स ‘n’ को भी सपोर्ट करते हैं। 802.11n स्टेंडर्ड पर आप 600Mbps (Mega Bits Per Second) के स्पीड से डाटा ट्रांसफर कर सकते हैं, हालांकि कुछ 802.11n राउटर्स की टॉप स्पीड 300Mbps होती है (इसका मतलब डाउनलोड स्पीड 37.5MBps or Mega Bytes Per Second)।
802.11ac लेटेस्ट स्टेंडर्ड है। इस पर आपको 1.3Gbps का ट्रांसफर स्पीड मिलती है। वैसे अभी बेहद ही कम मोबाइल फोन और लैपटॉप 802.11ac को सपोर्ट करते हैं। इसके अलावा यह टेक्नोलॉजी 802.11n की तुलना में काफी महंगी है। फिलहाल आप ‘n’ स्टेंडर्ड वाले राउटर पर भरोसा जता सकते हैं। भारत के इंटरनेट कनेक्शन के लिए यह काफी तेज है और साथ में सभी डिवाइसेज पर इसका सपोर्ट मिलता है। और साथ में पैसों की बचत भी।
Router की वायरलेस फ्रिक्वेंसी (2.4GHz या 5GHz):- राउटर की फ्रिक्वेंसी से यह निर्धारित होता है कि आपका नेटवर्क कितना पावरफुल है। राउटर के दो मुख्य स्टेंडर्ड हैं 2.4GHz और 5GHz। दोनों के बीच मुख्य अंतर रुकावट और रेंज का है। 2.5 GHz स्टेंडर्ड राउटर की तुलना में 5GHz स्टेंडर्ड राउटर में नेटवर्क तो बेहतर मिलता है, पर यह इसकी कीमत भी ज्यादा है। अगर नेटवर्क इंटरफेरेंस मुख्य मुद्दा नहीं है तो आप 2.5GHz वाला राउटर ही खरीदें।
Router की स्पीड:- किसी भी राउटर की स्पीड उस मॉडल में इस्तेमाल किए गए हार्डवेयर पर भी निर्भर करती है। वैसे हर डिवाइस में स्पीड का जिक्र “High Speed Upto” सेक्शन में किया रहता है। जो राउटर स्लो होंगे उनकी कीमत भी कम होगी। अगर जरूरत सिर्फ इंटरनेट से जुड़ने की है तो आप सस्ता राउटर खरीदें। अगर लेपटॉप पर हाई डेफिनेशन वीडियो देखने या उसे अपने स्मार्ट टीवी पर स्ट्रीम करने का शौक है तो आपका 300 Mbps राउटर से काम चल जाएगा।
Router के एंटीना का रेंज:- किसी Wi-Fi राउटर का रेंज जानने का कोई सीधा तरीका नहीं है क्योंकि यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है। हालांकि, राउटर के पीछे उसके एंटीने के dBi रेटिंग्स का जिक्र रहता है। अमेरिका के एक नेटवर्क कंसल्टेंट प्रणव राजपारा का कहना है कि किसी छोटे से मिडिल साइज अपार्टमेंट के लिए 2-4dBi रेंज वाला राउटर पर्याप्त है। 
हालांकि आपके घर में फ्रीज, माइक्रोवेव ओवन जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हैं और तो आपको ऊंची रेंज वाला राउटर लेना होगा। वाई फाई सिग्नल रोकने में दीवारों का भी अहम रोल है। चाहे दीवार कंक्रीट की हो या फिर लकड़ी की, एक स्टडी के मुकाबिक 3 से 4 दीवारों के बाद सिग्नल का स्ट्रेंथ और कमजोर हो जाता है। इसलिए राउटर खरीदने से पहले उसकी dBi प्रॉपर्टी पर जरूर ध्यान दें। 
वैसे इंटरनेट प्रोवाइडर आपको मुफ्त में राउटर उपलब्ध करा रहा है तो इससे बेहतर और कुछ नहीं, लेकिन आप बार-बार नेटवर्क और रेंज की समस्या से जूझ रहे हैं तो आपको खुद ही राउटर खरीदने के बारे में सोचना चाहिए। ऊपर लिखी हुई बातों का ध्यान रखें और अपनी जरूरत के हिसाब से राउटर खऱीद लें।
साधारण इंटरनेट कनेक्शन के लिए 150Mbps या 300Mbps वाला राउटर फिट है। इसके लिए आपको 800 रुपये से ऊपर के रेंज में खर्चना होगा। वैसे Netgear, Asus, D-Link और Cisco Linksys पर ही भरोसा दिखाएं। और इसकी वजह सिर्फ एक है कि कल को जब आप किसी कारण से प्रोब्लम में फंस जाते हैं तो इन कंपनियों की डिवाइस के बारे में इंटरनेट पर बहुत सारी जानकारियां उपलब्ध हैं। वैसे राउटर वही लें जो आपकी जरूरतों और जेब के लिए फिट बैठे।


Router के लाभ 

  1. राउटर विभिन्न नेटवर्क आर्किटेक्चर, जैसे ईथरनेट और टोकन रिंग को कनेक्ट कर सकते हैं।
  2. राउटर डायनामिक रूटिंग तकनीकों का उपयोग करके इंटरनेटवर्क में सर्वश्रेष्ठ पथ चुन सकता है।
  3. राउटर टकराव डोमेन बनाकर नेटवर्क ट्रैफ़िक को कम करते हैं।
  4. रूटर्स ब्रॉडकास्ट डोमेन बनाकर नेटवर्क ट्रैफ़िक को कम करते हैं।


Router के नुकसान 

  1. Protocolवेबल नेटवर्क प्रोटोकॉल के आधार पर काम करते हैं।
  2. वे अन्य नेटवर्क उपकरणों की तुलना में महंगे हैं।
  3. Head डायनेमिक राउटर संचार अतिरिक्त नेटवर्क ओवरहेड का कारण बन सकता है। यह उपयोगकर्ता डेटा के लिए कम बैंडविड्थ में परिणाम है।
  4. Data वे धीमे हैं क्योंकि उन्हें लेयर -3 के माध्यम से लेयर -1 से डेटा का विश्लेषण करने की आवश्यकता है।
  5. प्रारंभिक विन्यास की काफी मात्रा की आवश्यकता होती है।
  6. वे प्रोटोकॉल आश्रित उपकरण हैं, जो कि वे जिस प्रोटोकॉल को अग्रेषित कर रहे हैं, उसे समझना चाहिए।

How useful was this post?

Click on a star to rate it!

Average rating 0 / 5. Vote count: 0

No votes so far! Be the first to rate this post.

Leave a Comment